उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग के सामने रखें आंकडे कहा प्रदेश की बिजली कम्पिनयों का सिस्टम ओवरलोड नहीं मिल पा रही है उपभोक्ताओं को बिजली नहीं तो घरेलू फिक्स चार्ज की वसूली समाप्त हो, जब 24 घंटे फिक्स बिजली का बने सिस्टम तब हो फिक्स चार्ज की वसूली, उपभोक्ता परिषद ने कहा जहां प्रदेश की बिजली कंपनियां इस वर्ष बिजली दरों में बढोतरी करने के लिए पूरी जोर लगाने के लिए रणनीति में जुटी है
लखनऊ, 3 जून 2024 : प्रदेश की बिजली कंपनियों की तरफ से 30 नवंबर 2023 को वर्ष 2024 -25 के लिए रुपया 101784 करोड की दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता ( एआरआर) को जहां विद्युत नियामक आयोग एक-दो दिन में स्वीकार करने जा रहा है क्योंकि उसके बाद बिजली दर की सार्वजनिक सुनवाई शुरू होगी दो दिन पहले विद्युत नियामक आयोग और पावर कारपोरेशन के बीच में टेक्निकल वैलिडेशन सेशन की बैठक हो चुकी है वही इसी बीच उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने आज विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन अरविंद कुमार व सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात कर एक जनहित प्रस्ताव सौंपा और कहा विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में कमी होना चाहिए क्योंकि लंबे समय से प्रदेश के उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर जो लगभग 33122 करोड रूपया सरप्लस निकल रहा है उसका हिसाब नहीं हुआ.
उपभोक्ता परिषद ने कहा कि अब समय आ गया है विद्युत नियामक आयोग या तो एक साथ लगभग 40 प्रतिशत बिजली दरों में कमी करें या फिर अगले 5 वर्षों तक लगातार 8 प्रतिशत प्रत्येक वर्ष बिजली दरों में कमी करके प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का हिसाब बराबर करे क्योंकि प्रदेश का विद्युत उपभोक्ता इसको लेकर लंबे समय से आयोग आयोग से संवैधानिक निर्णय की अपेक्षा कर रहा है विद्युत उपभोक्ताओं की या सर प्लस धनराशि विद्युत नियामक आयोग द्वारा निकाली गई है इसलिए उसका हिसाब तत्काल कराया जाना जरूरी है। वही प्रदेश की बिजली कंपनियां इस वर्ष बिजली दरों में बढोतरी के लिए अभी से तैयारी में जुटी है लेकिन उपभोक्ता परिषद उन्हें कामयाब नहीं होने देगा।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग के सामने प्रस्ताव रख दिया कि प्रदेश की बिजली कंपनियों का जो सिस्टम है वह ओवरलोड है और वह गर्मी के महीना में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को सुचार विद्युत आपूर्ति नहीं दे पा रहा है
उन्होंने कहा कि मार्च 2024 के आंकडों पर ध्यान दें तो प्रदेश में कुल 473 की सँख्या में 132 केवी सब स्टेशन है और उनकी कुल क्षमता जो है है वह 65213 एमवीए है यानी कि जब उसे किलोवाट में निकाला जाएगा तो वह 5 करोड 86 लाख 91 हजार हजार 700 किलो वाट होगा वहीं मार्च 2024 की बात करें तो प्रदेश में लगभग 3 करोड 45 लाख 93087 विद्युत उपभोक्ताओं है उनका कुल स्वीकृत भार है वह लगभग 7 करोड 38 लाख 35635 किलो वाट है
ऐसे में यह कहना उचित होगा कि जब भीषण गर्मी पड रही है और उपभोक्ता अपने स्वीकृत भार का सत प्रतिशत उपभोग कर रहा है तो पावर कारपोरेशन का सिस्टम कांपने लग रहा क्योंकि इस भीषण गर्मी में डायवर्सिटी फैक्टर 1 अनुपात 1 हो ही जाएगा उपभोक्ताओं द्वारा लिए गए भार और प्रदेश की बिजली कंपनियों के सिस्टम के भार में लगभग 2 करोड किलोवाट का अंतर है वही 33 केवी सब स्टेशनो की बात करे तो उसकी क्षमता लगभग 59 हजार से 60 हजार एमवीए के ही बीच है जो और कम है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में जब उपभोक्ताओं को फिक्स बिजली नहीं उपलब्ध कराई जा रही है तो उनसे फिक्स चार्ज की वसूली बंद की जाए उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग के सामने यह आंकडे रखा की प्रदेश की सभी बिजली कंपनियां प्रदेश के लगभग 3 करोड 45 लाख विद्युत उपभोक्ताओं से साल में लगभग मार्च 2024 तक की बात करें तो 20761 करोड का फिक्स चार्ज वसूल जाता हैं जिसमें से केवल घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं से 4855 करोड का राजस्व केवल फिक्स चार्ज से वसूल किया जाता है ऐसे में घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं पर लगने वाल फिक्स चार्ज को तब तक समाप्त किया जाए जब तक प्रदेश की बिजली कंपनियों का सिस्टम उपभोक्ताओं को सुचारू रूप से 24 घंटे विद्युत आपूर्ति देने लायक ना हो जाए।विद्युत नियामक आयोग ने सभी बिंदुओं पर आगामी बिजली दर की सुनवाई में विचार करने का आश्वासन दिया गया।







