उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश सरकार से उठाई मांग और कहा सरकार 3 करोड़ उपभोक्ताओ को दिलाये उनका हक
प्रदेश की बिजली कंपनियां जो नियामक आयोग से फरवरी 2021 के अंतिम सप्ताह में बिजली दर ट्रूप वर्ष 2019-20 व वार्षिक राजस्वा आवश्यकता एआरआर वर्ष 2021-22 को दाखिल करने का समय लिया है, यानी की 2 सप्ताह में वार्षिक राजस्वा आवश्यकता एआरआर दाखिल करने जा रही है लेकिन प्रदेश के उपभोक्ताओ का जो लगभग 19537 करोड़ रुपया बिजली कंपनियों पर निकल रहा उसे देने के लिए पावर कार्पोरेशन की नियत बिलकुल साफ नहीं है।
इस मामले में उपभोक्ता परिषद का कहना है कि जबकि पिछले 8 वर्षो से बिजली कम्पनिया उपभोक्ताओ की बिजली दरों में बड़े पैमाने पर इजाफा करा चुकी है लेकिन जब उपभोक्ताओ को लाभ देने का समय आया तो वह चुप है और सरकार भी मूकदर्शक बनी हुई है जो अपने आप में बड़ा सवाल है?
उपभोक्ता परिषद ने कहा कि हम प्रदेश सरकार से मांग करते हैं कि वह पावर कार्पोरेशन को निर्देश दे की इस बार जो उपभोक्ताओ का पैसा बिजली कम्पनियो पर निकल रहा है उसके एवज में बिजली दरों में कमी का प्रस्ताव आयोग में दाखिल करे अन्यथा प्रदेश की जनता का विश्वास सरकार से उठाना लाजमी है।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा पूरे प्रदेश को पता है कि 11 नवम्बर 2020 को विद्युत नियामक आयोग द्वारा सभी पक्षों को सुनने के बाद यह एलान किया कि वर्ष 2020-21 की बिजली दर में कोई बदलाव नहीं किया जायेगा और बिजली कम्पनियो के स्लैब को खारिज करते हुए अधिक वितरण हानियों को भी कम करते हुए 4500 करोड़ गैप को भी खारिज करते हुए प्रदेश के उपभोक्ताओ का ही बिजली कम्पनिया पर रुपया 800 करोड पर निकाल दिया।
उन्होंने कहा कि इससे पहले उपभोक्ताओ का बिजली कम्पनियो पर वर्ष 2017-18 से लेकर अब तक उदय ट्रूप में निकले रुपया 13337 करोड़ नियामक आयोग ने तय किया था वह भी सभी पक्षों की सुनवाई के बाद अब जो बढ़कर कैरिंग कॉस्ट सहित कुल लगभग रुपया 19537 करोड़ हो गया है जिसके लिए उपभोक्ता परिषद ने आयोग में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर उपभोक्ताओ को उनका हक दिलाने व बिजली दरों में कमी की मांग उठाई है , लेकिन बिजली कम्पनिया उपभोक्ताओ का पैसा न वापस करना पड़े उसके खिलाफ एक बार फिर अपटेल नई दिल्ली पहुंच गयी है लेकिन उपभोक्ता परिषद अंतिम साँस तक लड़ेगा और एक बार फिर बिजली कम्पनियो को मुँह की खानी पड़ेगी अब सवाल यह उठना लाजमी है की प्रदेश सरकार वास्तव में यदि 3 करोड़ उपभोक्ताओ की सुभचिन्तक है तो बिजली दरों में कमी का प्रस्ताव दाखिल कराकर उपभोक्ता को उसका लाभ दिलवाए।







