पेंशनभोगियों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र अभियान 4.0: सुविधा और चुनौतियों का मिश्रण
नई दिल्ली/लखनऊ: पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा 1 नवंबर से 30 नवंबर 2025 तक चलाया जा रहा राष्ट्रव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र (डीएलसी) अभियान 4.0 वरिष्ठ नागरिकों के लिए पेंशन प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह अभियान डिजिटल इंडिया के तहत पेंशनभोगियों के डिजिटल सशक्तिकरण और ईज ऑफ लिविंग पर फोकस करता है। इसका लक्ष्य देश के 2,000 से अधिक शहरों-कस्बों में रहने वाले दो करोड़ से ज्यादा पेंशनभोगियों तक पहुंच बनाना है।
अभियान की मुख्य सुविधाएं
इस बार विशेष रूप से आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक पर जोर दिया गया है, जिससे पेंशनभोगी घर बैठे स्मार्टफोन से ही जीवन प्रमाणपत्र जमा कर सकते हैं, बिना किसी बायोमेट्रिक डिवाइस के। अति-वरिष्ठ नागरिकों (80+ आयु) और दिव्यांगों के लिए इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की डोरस्टेप सेवा को मजबूत किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मन की बात और संविधान दिवस संबोधन में इस पहल की सराहना की थी, इसे वरिष्ठों के लिए सरल और सुलभ बताया था।
अभियान के तहत हजारों शिविर आयोजित हो रहे हैं, और विभाग के अधिकारी जैसे निदेशक अमित शर्मा मुरादाबाद-बरेली दौरे पर पेंशनभोगियों से सीधा संवाद कर रहे हैं। पिछले अभियानों की तुलना में इस बार फेस ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल बढ़ा है, जिससे लाखों प्रमाणपत्र आसानी से जेनरेट हो रहे हैं।
चुनौतियां और आलोचनाएं
हालांकि अभियान की काफी प्रशंसा हो रही है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल डिवाइड एक बड़ी समस्या है – कई बुजुर्गों के पास इंटरनेट, स्मार्टफोन या डिजिटल ज्ञान की कमी है। फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक नई होने से कुछ मामलों में ऐप क्रैश, सर्वर डाउन या फेलियर की शिकायतें आई हैं। उम्र के कारण फिंगरप्रिंट फीके होने पर पुरानी बायोमेट्रिक विधि भी असफल हो जाती है, जिससे कुछ पेंशनभोगियों को परेशानी हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शहरों में यह सुविधा अच्छी है, लेकिन दूरदराज के इलाकों में जागरूकता और सहायता की अभी कमी है। कुछ पेंशनभोगियों को डेटा मिसमैच या तकनीकी गड़बड़ी के कारण प्रमाणपत्र रिजेक्ट होने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
कुल मिलाकर डीएलसी अभियान 4.0 निश्चित रूप से पेंशन प्रक्रिया को आधुनिक और सुविधाजनक बना रहा है, खासकर शहरी और तकनीक-जागरूक बुजुर्गों के लिए। लेकिन ग्रामीण एवं कम डिजिटल साक्षर पेंशनभोगियों के लिए अभी और प्रयासों की जरूरत है, जैसे ज्यादा डोरस्टेप सेवाएं, सरल ट्रेनिंग कैंप और हेल्पलाइन को मजबूत करना। विभाग की प्रतिबद्धता सराहनीय है, पर पूर्ण सफलता के लिए इन चुनौतियों का समाधान जरूरी होगा। पेंशनभोगी समय रहते प्रमाणपत्र जमा करें, ताकि पेंशन में कोई रुकावट न आए।






