बिजली कम्पनियों द्वारा अभी तक प्रदेश के 1 करोड 79 लाख विद्युत उपभोकताओं को नही दिया गया उनकी सिक्योरिटी पर ब्याज

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  • उपभोक्ता परिषद नियामक आयोग पहुचा
  • नियामक आयोग अध्यक्ष ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को दिया आश्वासन, आयोग जल्द कम्पनियों को देगा निर्देश विद्युत उपभोक्ताओं को उनकी सिक्योरिटी पर देना होगा ब्याज 
  • आयोग अध्यक्ष ने कहा कि बिजली कम्पनियों ने अभी तक क्यों नही दिया ब्याज इस पर आयोग उठायेगा कठोर कदम जिससे भविष में न हो ऐसी लापरवाही।
  • विद्युत अधिनियम 2003 के प्राविधानानुसार 1 अप्रैल को आर0बी0आई0 द्वारा जारी बैंक रेट के अनुसार प्रत्येक वर्ष विद्युत उपभोक्तााओं को उनकी सिक्योरिटी पर कम्पनियों को देना होता है ब्याज
  • इस वर्ष बैंक रेट 7.75 प्रतिशत के अनुसार विद्युत उपभोक्ताओं को मिलना है ब्याज
प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा प्रदेश के लगभग 1 करोड 79 लाख विद्युत उपभोक्ताओं को उनके द्वारा जमा की गयी सिक्योरिटी पर वर्ष 2016-17 का ब्याज न दिये जाने के विरोध में उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा आज नियामक आयोग अध्यक्ष श्री देश दीपक वर्मा से मुलाकात कर लम्बी चर्चा की और उन्हें एक जनहित प्रत्यावेदन भी सौंपा जिसमें यह मांग उठायी गयी कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47 (4) के प्राविधानानुसार विद्युत वितरण संहिता 2005 में निहित व्यवस्था के तहत प्रत्येक वर्ष बिजली कम्पनियों को प्रदेश के सभी विद्युत उपभोक्ताओं को 1 अप्रैल को भारतीय रिजर्व बैंक की जो भी दर हो उसके अनुसार उपभोक्ताओं द्वारा जमा की गयी सिक्योरिटी पर ब्याज देना होता है यह ब्याज प्रत्येक वर्ष विद्युत उपभोक्ताओं के अप्रैल, मई एवं जून के बिल में विद्युत वितरण संहिता के नियमों के तहत समायोजित किया जाता है। परन्तु इस बार बिजली कम्पनियों द्वारा अभी तक उपभोक्ताओं को ब्याज नही दिया गया जबकि मई भी बीत चुका है। जो बेहद गंभीर मामला है। गौरतलब है कि जब विद्युत उपभोक्ता नया कनेक्शन लेते हैं उस दौरान उनके द्वारा अपने भार के अनुसार सिक्योरिटी जमा की जाती है।प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा प्रदेश के लगभग 1 करोड 79 लाख विद्युत उपभोक्ताओं को उनके द्वारा जमा की गयी सिक्योरिटी पर वर्ष 2016-17 का ब्याज न दिये जाने के विरोध में उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा आज नियामक आयोग अध्यक्ष श्री देश दीपक वर्मा से मुलाकात कर लम्बी चर्चा की और उन्हें एक जनहित प्रत्यावेदन भी सौंपा जिसमें यह मांग उठायी गयी कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47 (4) के प्राविधानानुसार विद्युत वितरण संहिता 2005 में निहित व्यवस्था के तहत प्रत्येक वर्ष बिजली कम्पनियों को प्रदेश के सभी विद्युत उपभोक्ताओं को 1 अप्रैल को भारतीय रिजर्व बैंक की जो भी दर हो उसके अनुसार उपभोक्ताओं द्वारा जमा की गयी सिक्योरिटी पर ब्याज देना होता है यह ब्याज प्रत्येक वर्ष विद्युत उपभोक्ताओं के अप्रैल, मई एवं जून के बिल में विद्युत वितरण संहिता के नियमों के तहत समायोजित किया जाता है। परन्तु इस बार बिजली कम्पनियों द्वारा अभी तक उपभोक्ताओं को ब्याज नही दिया गया जबकि मई भी बीत चुका है। जो बेहद गंभीर मामला है। गौरतलब है कि जब विद्युत उपभोक्ता नया कनेक्शन लेते हैं उस दौरान उनके द्वारा अपने भार के अनुसार सिक्योरिटी जमा की जाती है। नियामक आयोग अध्यक्ष श्री देश दीपक वर्मा ने उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को आश्वासन दिया कि प्रदेश की सभी विद्युत कम्पनियों को शीघ्र सिक्योरिटी पर ब्याज दिये जाने का निर्देश भेजा जायेगा और यह भी पूछा जायेगा कि अभी तक बिजली कम्पनियों ने विद्युत वितरण संहिता के अनुसार उपभोक्ताओं को अभी तक ब्याज क्यों नही दिया? इस मामले पर आयोग गंभीर है बिजली कम्पनियों के खिलाफ कठोर कदम भी उठायेगे, जिससे भविष्य में बिजली कम्पनियाॅं इस मुददे पर उदासीनता न बरतें। उ0 प्र0 राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि वर्ष 2016-17 में बिजली कम्पनियों को प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को 7.75 प्रतिशत ब्याज देना होगा क्योंकि 1 अप्रैल को भारतीय रिजर्व बैंक की दर यही थी। विद्युत वितरण कम्पनियों द्वारा दाखिल एआरआर पर नजर डालें तो प्रदेश के सभी विद्युत उपभोक्ताओं द्वारा जो कुल सिक्योरिटी बिजली कम्पनियों के पास जमा की गयी है वह लगभग वर्ष 2017-18 में लगभग 271 करोड  है। जिसके अनुसार प्रदेश के कुल विद्युत उपभोक्ताओं को बडे पैमाने पर सिक्योरिटी में ब्याज मिलना है। यह बडे दुर्भाग्य की बात है कि बिजली कम्पनियों को जहाॅं प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं से कोई भी वसूली करना होता है वहाॅं वह आगे रहती है लेकिन वहीं दूसरी ओर जहाॅं प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं को कोई लाभ देने की बात आती है वहाॅं बिजली कम्पनियां हीलाहवाली पर उतर आती हैं। जिससे प्रदेश की बिजली कम्पनियों की उपभोक्ता विरोधी नीति का स्वतः खुलासा होता है।

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