Home इंडिया मटके से झांकती दो खूबसूरत आँखें !

मटके से झांकती दो खूबसूरत आँखें !

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हैवेन ऑन अर्थ: anurag prakash

संस्मरण: अनुराग प्रकाश

बात 2019 की है। एक रोज़ मैं आफिस में कुछ जरूरी काम कर रहा था। तभी करीब शाम 4 बजे घर से बेटी का फ़ोन आया। वो उदास आवाज़ में बोली ….पापा उल्लू का नेस्ट बॉक्स पेड़ से गिर गया है। कुछ गाओं के लोगो ने रोड पर पड़ी एक लकड़ी को उठा कर ऊपर फेका ! वो लकड़ी नेस्ट बॉक्स से टकरा गई। जिससे बॉक्स नीचे गिर कर टूट गया।

अब उल्लू बार बार आकर उसी डाल पर बैठ रहा है। आफिस से मैं करीब 7 बजे वापस आया तो अंधेरा हो चुका था। मैने सोचा अब कल इस नेस्ट बॉक्स को ठीक करवाकर वापस उसी डाल पर लगवा दूंगा। फिर किसी काम से मैं मार्किट गया वहाँ रोड किनारे जो लोग मिट्टी के पॉट व मटके बेचते है उसके पास एक बड़ा मिट्टी का मटका रखा था जिसमे एक होल बना था वो किसी ने चिड़ियों के लिए ही बनवाया था। मैंने वो तुरंत ले लिया और सुबह उसे लगाने की प्लानिंग करने लगा। सुबह जल्दी ही मेरी आंख खुली तो देखा उल्लू उसी डाल पर बैठा था जहाँ उसका नेस्ट बॉक्स लगा था पिछले साल उसने उसी नेस्ट बॉक्स में उसने 4 बच्चो को जन्म दिया एवं पाला था।

मैं सोचने लगा कि अब इस मटकी को कैसे टंगा जाए पेड़ पर। सिर्फ एक मटकी को टांगने के लिए मैने सुबह कई मजदूर से बात की लेकिन कोई तैयार नही हुआ। बहुत मुश्किल से एक लड़के ने पेड़ पर चढ़ कर वो मटकी टांग दी। अब देखना ये था कि उल्लू उस पर वापस आता है कि नही मुझे पूरी उम्मीद थी कि वो जरूर वापस आएगा।

ये सोच कर मैं बालकनी पर बैठ कर चाय की चुस्की लेने लगा पर मेरी नज़र लगातार उस मटकी पर ही थी। कुछ देर के इंतजार के बाद ही उल्लू वापस आ गया और उसी डाल पर बैठ कर आसपास का व उस मटकी का मुआयना करने लगा। अब मैं आस्वस्त हो गया था कि वो इसे अपना लेगा। और इसके बाद मैं ऑफिस चला गया। अगले दिन देखा तो मेरी खुशी का ठिकाना न रहा 2 खूबसूरत आंखे उस मटकी से बाहर झांक रही थी। इस बार भी मेरे नेस्ट को मेरे दोस्त ने कुबूल कर लिया था।

और कुछ वक्त बाद उस मटकी में भी मुझे छोटी छोटी आंखे कौतूहल वश बाहर झांकती नजर आई इस बार फिर इस परिवार में नए सदश्यो का आगमन हुआ था।

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