Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Thursday, October 1
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    सूर्य से सबसे दूर…,फिर भी ज्ञान के सबसे करीब…!

    ShagunBy ShagunJuly 6, 2026 Current Issues No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 97

    क्या यह केवल संयोग है…? या हमारी ऋषि परम्परा के ज्ञान की कोई अनकही कहानी…?

    बृजेश सिंह तोमर

    क्या पाँच सौ वर्ष पहले बाबा तुलसी दास जी द्वारा रचित हनुमानचालीसा में लिखी एक चौपाई “युग सहस्त्र योजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू” खगोल विज्ञान से संवाद करती है, या यह हमारी ऋषि परम्परा के विस्मृत ज्ञान की एक झलक है…?यहीं से एक ऐसी जिज्ञासा जन्म लेती है, जो केवल धार्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक भी है…।

    6 जुलाई को पृथ्वी अपनी वार्षिक यात्रा के उस बिंदु पर पहुँचेगी, जहाँ वह सूर्य से पूरे वर्ष में सबसे अधिक दूर होगी। खगोल विज्ञान की भाषा में इस स्थिति को अपहेलियन (Aphelion) कहा जाता है। इस समय पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी लगभग 15.21 करोड़ किलोमीटर होती है। ठीक छह महीने पहले जनवरी में यही पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट होती है, जिसे पेरिहेलियन (Perihelion) कहा जाता है। उस समय यह दूरी लगभग 14.71 करोड़ किलोमीटर रहती है।

    अर्थात, एक ही वर्ष में पृथ्वी और सूर्य के बीच की दूरी लगभग 50 लाख किलोमीटर बदल जाती है। यह परिवर्तन सुनने में बहुत बड़ा लगता है, किंतु कुल दूरी का केवल लगभग तीन प्रतिशत है।

    यहीं से एक ऐसी जिज्ञासा जन्म लेती है, जो केवल धार्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक भी है।
    जब यह तथ्य सामने आता है तो सहज ही बाबा तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा की वह प्रसिद्ध चौपाई स्मरण हो आती है “युग सहस्त्र योजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू।”

    हममें से अधिकांश ने इस चौपाई को बचपन से श्रद्धा के साथ पढ़ा है। सामान्य अर्थ भी यही बताया गया कि बाल हनुमान ने सूर्य को फल समझकर निगलना चाहा। लेकिन वर्षों से विद्वानों का एक वर्ग इस चौपाई की अंकगणितीय व्याख्या भी प्रस्तुत करता आया है।
    यदि युग अर्थात 12,000, सहस्त्र अर्थात 1,000 और योजन मतलब 12.8 किलोमीटर माना जाए, तो गणना होती है—

    12,000 × 1,000 × 12.8 = 153,600,000 किलोमीटर, अर्थात 15 करोड़ 36 लाख किलोमीटर।

    अब आधुनिक खगोल विज्ञान की ओर देखिए। पृथ्वी और सूर्य की औसत दूरी लगभग 14 करोड़ 96 लाख किलोमीटर मानी जाती है। दोनों के बीच का अंतर लगभग 40 लाख किलोमीटर बैठता है, जो कुल दूरी का लगभग 2.7 से 3 प्रतिशत है।
    और यहीं प्रश्न जन्म लेता है…

    क्या यह केवल संयोग है कि पृथ्वी की वास्तविक दूरी भी वर्षभर में लगभग तीन प्रतिशत बदलती है और इस चौपाई की लोकप्रिय अंकगणितीय व्याख्या भी आधुनिक औसत दूरी से लगभग तीन प्रतिशत के भीतर पहुँच जाती है? क्या यह किसी प्राचीन खगोलीय परम्परा का संकेत है? या यह मात्र संख्यात्मक समानता है? इन प्रश्नों के उत्तर शोध से ही मिलेंगे, भावनाओं से नहीं।

    यहाँ एक तथ्य स्पष्ट करना भी आवश्यक है। आज तक किसी अंतरिक्ष एजेंसी या आधुनिक वैज्ञानिक संस्था ने आधिकारिक रूप से यह नहीं कहा है कि हनुमान चालीसा की यह चौपाई पृथ्वी और सूर्य की दूरी का वैज्ञानिक सूत्र है। इसलिए ऐसा दावा करना उचित नहीं होगा। किंतु यह भी उतना ही सत्य है कि इस गणना की निकटता जिज्ञासा उत्पन्न करती है और गंभीर अध्ययन की माँग करती है।

    विज्ञान का स्वभाव ही प्रश्न पूछना है, प्रश्नों से बचना नहीं।

    विडंबना यह है कि आज का समाज ज्ञान का मूल्यांकन कागज़ की डिग्रियों से करता है। किसी व्यक्ति के नाम के आगे लिखे अक्षर उसकी योग्यता का पैमाना बन गए हैं। किंतु यदि इतिहास के पन्ने पलटे जाएँ तो प्रश्न उठता है कि महर्षि कणाद के पास कौन-सी डिग्री थी..? आर्यभट्ट किस विश्वविद्यालय से स्नातक थे..? वराहमिहिर, भास्कराचार्य, चरक, सुश्रुत, पतंजलि या पाणिनि के पास कौन-सा आधुनिक प्रमाणपत्र था..?

    उनकी पहचान डिग्रियों से नहीं, उनके ज्ञान से बनी। उनकी प्रयोगशाला प्रकृति थी, उनका विश्वविद्यालय गुरुकुल था, उनका शोध उपकरण सूक्ष्म निरीक्षण, तर्क, गणना और साधना थी। उन्होंने नौकरी के लिए नहीं, सत्य के लिए अध्ययन किया था।
    यह वही सभ्यता है जिसने विश्व को शून्य दिया, दशमलव दिया, विशाल संख्याओं की गणना दी, ग्रहणों की गणना की परंपरा दी, पंचांग निर्माण की अद्भुत पद्धति दी, आयुर्वेद दिया, शल्य चिकित्सा दी, व्याकरण को विज्ञान का स्वरूप दिया और खगोल विज्ञान को आध्यात्मिक जिज्ञासा से जोड़ा। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि भारत की ऋषि परम्परा ने ज्ञान को कभी विषयों में बाँटा ही नहीं। यहाँ गणित भी साधना था, खगोल भी साधना था, चिकित्सा भी साधना थी और दर्शन भी साधना था।

    दुर्भाग्य यह है कि हमने अपने प्राचीन ग्रंथों को दो छोरो के बीच फँसा दिया। एक वर्ग बिना जाँचे हर बात को विज्ञान घोषित कर देता है, जबकि दूसरा वर्ग बिना पढ़े हर बात को मिथक कहकर खारिज कर देता है। दोनों ही दृष्टियाँ ज्ञान के साथ न्याय नहीं करतीं।

    आवश्यकता इस बात की है कि भारतीय ज्ञान परम्परा का आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों, गणितीय विश्लेषण और निष्पक्ष शोध के साथ पुनर्मूल्यांकन किया जाए। यदि हमारे ग्रंथों में वैज्ञानिक संकेत हैं, तो वे पूरी मानवता की धरोहर हैं। यदि वे सांकेतिक हैं, तो उन्हें उसी रूप में समझा जाए। किंतु बिना अध्ययन के किसी निष्कर्ष पर पहुँचना न तो विज्ञान है और न ही बौद्धिक ईमानदारी।

    कल जब समाचारों में आप पढ़ेंगे कि पृथ्वी सूर्य से वर्ष की सबसे अधिक दूरी पर है, तब एक क्षण के लिए हनुमान चालीसा की उस चौपाई को भी स्मरण कीजिए। उसे किसी पूर्वाग्रह से नहीं, बल्कि जिज्ञासा से पढ़िए। हो सकता है, वहाँ केवल भक्ति हो। हो सकता है, वहाँ गणित का संकेत भी हो। और यह भी संभव है कि वहाँ दोनों साथ-साथ हों।

    आख़िर ऋषि परम्परा की सबसे बड़ी पहचान यही तो थी कि जहाँ आध्यात्म और विज्ञान एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि सत्य की खोज में सहयात्री थे।

    Shagun

    Keep Reading

    Three-day-old baby elephant swept away by the waves; mother left writhing in distress on the shore; emotional reunion follows rescue.

    लहरों में बह गया तीन दिन का नन्हा हाथी, किनारे तड़पती रही मां; रेस्क्यू के बाद हुआ भावुक मिलन

    नालसा का एलएडीसी सिस्टम खत्म करने का फैसला: क्या गरीब कैदियों से छिन जाएगा न्याय का सहारा?

    A Scorpio on the roof! Thieves were stunned and the whole country had a laugh at this *jugaad* (ingenious hack) by a man from Gopalganj, Bihar.

    चोरों से बचाने को छत पर चढ़वा दी स्कॉर्पियो! इस बिहारी का जुगाड़ देखकर चोर भी हैरान, देश भी हंस पड़ा

    Nepal Flood Tragedy: The Most Harrowing Incident of Devastation

    नेपाल बाढ़ त्रासदी: तबाही का सबसे दर्दनाक हादसा

    रक्षाबंधन: परंपरा, पहचान और बाजारवाद का संगम

    Trump Trapped in a Labyrinth: US President's Mounting Difficulties Amid the Maze of an Iran War

    चक्रव्यूह में फंसे ट्रंप: ईरान युद्ध की भूलभुलैया में अमेरिकी राष्ट्रपति की बढ़ती मुश्किलें

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Nyrraa M Banerji’s Glamorous Style in Front of the Camera

    हर फ्रेम में छाईं न्यारा एम बनर्जी, दिखा स्टाइलिश अंदाज

    October 1, 2026
    Aman Sehrawat Receives Major Brand Recognition After Winning Olympic Bronze

    ओलंपिक कांस्य के बाद अमन सहरावत को मिला बड़ा ब्रांड सम्मान

    October 1, 2026
    "Books focus the mind and connect it with traditions" - Brajesh Pathak; Isha-Misha Ratan's Kathak performance captivated the audience

    ‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन

    October 1, 2026
    Youth dies after venomous insect bite; family delayed seeking medical help by relying on faith healing; he breathed his last on the way to the hospital.

    जहरीले कीड़े के काटने से युवक की मौत, झाड़-फूंक में उलझा रहा परिवार,रास्ते में तोड़ा दम

    October 1, 2026
    'Bazm-e-Khwateen' Organized on Gandhi Jayanti: Message of Truth, Non-violence, and the Composite Culture of 'Ganga-Jamuni Tehzeeb' Resonates at Firangi Mahal

    गांधी जयंती पर ‘बज़्म-ए-ख़्वातीन’ का आयोजन: फिरंगी महल में गूंजा सत्य, अहिंसा और गंगा-जमुनी तहज़ीब का संदेश

    October 1, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading