Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Sunday, August 23
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»Featured

    जलवायु परिवर्तन से न फागुन में खिलेंगे सेमल, न पलाश से दहकेगा वसंत

    By February 11, 2019 Featured No Comments4 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 863

    जलवायु में आ रहे बदलाव ने पेड़-पौधों के प्राकृतिक चक्र में गंभीर बदलाव लाना शुरू कर दिया है। सेमल, पलाश के वृक्ष अब फरवरी-मार्च की जगह दिसंबर-जनवरी में ही फूलों से लकदक दिखते हैं। यही हाल बुरांश और किलमोड़ा जैसे वृक्षों का भी है। इनके समय से पहले ही फूलों से लद जाने को लेकर वनस्पति विज्ञानी खासे चिंतित हैं।

    मीडिया ख़बरों के अनुसार हालिया शोध में पता चला है कि इन वृक्षों में बांझपन आ रहा है। इनके बीज में प्रजनन क्षमता तेजी से खत्म हो रही है। ऐसे में इन प्रजातियों के भविष्य में विलुप्त होने के खतरे से इन्कार नहीं किया जा सकता। उत्तराखंड में इन्हें बचाने का प्रयास शुरू कर दिया गया है।

    तेजी से हो रहा बदलाव

    उत्तराखंड वन विभाग के विज्ञानियों ने इस बदलाव पर एक शोध रिपोर्ट तैयार की है। पहाड़ से लेकर मैदान तक जिन प्रजातियों में सर्वाधिक असर दिख रहा है, उनमें बुरांश, पलाश, किलमोड़ा व सेमल जैसे बड़े वृक्ष शामिल हैं। इसे जलवायु परिवर्तन का असर माना जा रहा है।

    वनस्पतियों में आ रहे बदलाव पर उत्तराखंड वन अनुसंधान केंद्र ने शोध किया है। केंद्र के प्रभारी मदन सिंह बिष्ट बताते है कि पिछले पांच वर्षों में पहाड़ के जंगलों में बुरांश, पलाश और किलमोड़ा में समय से पहले फूल आ रहे हैं। शुरुआती दो वर्ष तक जंगल के गिने-चुने पेड़ों पर इस तरह का बदलाव दिखता था, लेकिन अब तो सभी वृक्षों में एक समान व्यवहार दिख रहा है। इनमें समय से पहले फूल आ रहे हैं। मैदानी हिस्सों में भी यही स्थिति बन रही है।

    Image may contain: flower, plant, nature and outdoor

    जनवरी में फूलों से भर गए सेमल, पलाश 

    शोध प्रभारी बिष्ट कहते हैं कि पलाश (ढाक या टिशू) के पेड़ों पर फूल फरवरी-मार्च में खिलते थे, लेकिन अब जनवरी में ही पलाश के पेड़ फूलों से लदे नजर आने लगे हैं।

    पलाश का पुष्पण समय फरवरी-मार्च का महीना होता है। इसी तरह पहाड़ों में बुरांश, हिसालू, किलमोड़ा व मैदान में सेमल के पेड़ों पर भी पुष्प दो माह पूर्व ही खिलने लगे हैं। बकौल बिष्ट, यह एक खतरनाक संकेत है।

    विलुप्त हो जाएंगे सेमल-पलाश जैसे वृक्ष

    साल 2015 से 2017 में जिन पेड़ों पर समय से पहले फूल आए, उन पर किए शोध में वन अनुसंधान की टीम ने पाया कि इनके बीज में बीजाणु नहीं बन पा रहे हैं। इससे इन प्रजातियों में बीज से नए पौधे पनपने की क्षमता खत्म हो रही है। यही क्रम चलता रहा तो ये प्रजाति विलुप्त भी हो सकती है। लिहाजा, वन अनुसंधान की टीम पौधों के तनों से पौध तैयार कर प्रजाति को बचाने में जुटी है।

    जलवायु परिवर्तन है वजह

    निदेशक राज्य मौसम विज्ञान केंद्र विक्रम सिंह कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन व शीतकालीन बारिश और पहाड़ों में बर्फबारी की कमी के चलते प्राकृतिक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। दिसंबर व जनवरी में सामान्य से ज्यादा तापमान रहने लगा है। बर्फबारी भी कम होती है। इसका असर जैव विविधता पर पड़ रहा है।

    कल हो न हो… 

    इन पेड़ों का देश की माटी से बड़ा गहरा जुड़ाव रहा है। इस बदलाव के बड़े मायने हैं। कविताएं बेमानी हो जाएंगी, कहावतें अर्थहीन हो जाएंगी। मानो एक युग का ही अंत होने जा रहा हो। सेमल का लाल फूलों से लद जाना यानी फागुन। ‘जंगल की आग’ यानी बसंत में जंगलों का पलाश के फूलों से भर जाना।

    नई पीढ़ी को छोड़ दें तो अधिकांश ने अज्ञेय की कविता ‘माघ-फागुन-चैत’ बचपन में अवश्य पढ़ी होगी। उस कविता के जरिये इन महीनों की पहचान करना भी सीखा होगा। अब इन बातों के मायने बदल जाएंगे-

    सहसा झरा फूल सेमर का गरिमा-गरिम अकेला पहला।
    टूट चला सपना बसंत का चौबारा-चौमहला-लाल रुपहला।।
    झर-झर-झर लग गई झड़ी सी 
    टहनी पर बस टंगी रह गई अर्थहीन उखड़ी-सी
    टुच्ची-बुच्ची दाढिय़ां लंठूरी परखोंसे झुलसे पाखी सी।
    क्रमश: आए दिन चैती, सौगात नई क्या लाए
    बेचारी हर-झोंके-मारी, विरस अकिंचन सेमर की बुढ़िया मैया।

    बीड़ी फुलारा से साभार

    Keep Reading

    rampant sale of adulterated sweets in the market.

    त्योहार नजदीक, बाजार में नकली मिठाई का खुला खेल

    Ritual bathing of the deity at Lakshman Tila with Ganga water from Bithoor; organization remains steadfast despite police restrictions.

    लक्ष्मण टीला पर बिठूर के गंगाजल से जलाभिषेक, पुलिस रोक के बावजूद संगठन अडिग

    Slapped for not doing homework, 6-year-old child dies in the classroom.

    होमवर्क न करने पर थप्पड़, कक्षा में ही 6 साल के बच्चे की मौत

    Insistence on a mobile phone leads to family tragedy; three die after falling from a hill in Chhatrapati Sambhajinagar.

    मोबाइल की जिद में उजड़ा पूरा परिवार, छत्रपति संभाजीनगर की पहाड़ी से गिरकर तीन मौतें

    A spine-chilling, mysterious incident on the stairs in Ghaziabad: A person riding a cat or a black buffalo?

    गाजियाबाद में सीढ़ियों पर रोंगटे खड़े कर देने वाली रहस्यमयी घटना: बिल्ली या काले भैंसे पर सवार व्यक्ति?

    सिद्धांतों की बलिवेदी में सत्ता का बलिदान देने वाला जननायक

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    rampant sale of adulterated sweets in the market.

    त्योहार नजदीक, बाजार में नकली मिठाई का खुला खेल

    August 22, 2026
    Ritual bathing of the deity at Lakshman Tila with Ganga water from Bithoor; organization remains steadfast despite police restrictions.

    लक्ष्मण टीला पर बिठूर के गंगाजल से जलाभिषेक, पुलिस रोक के बावजूद संगठन अडिग

    August 22, 2026

    कोरिया इंडस्ट्री एक्सपो (KoINDEX) 2026 का 27 अगस्त को यशोभूमि में होगा शुभारंभ

    August 22, 2026

    गलगोटियास विश्वविद्यालय ने Microsoft के सहयोग और byteXL द्वारा संचालित उद्योग-एकीकृत AI एवं ML डिग्री का शुभारंभ किया

    August 22, 2026
    Ayushmann Khurrana's visit to Jalna A message of child safety and a secure childhood.

    आयुष्मान खुराना की जालना यात्रा : बच्चों की सुरक्षा और सुरक्षित बचपन का संदेश

    August 21, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading