कोरियाई मुख्य अतिथि किम चोंग की मौजूदगी में संगोष्ठी; वक्ताओं ने कहा : नफ़रत से नहीं, न्याय और एकता से बनेगा बेहतर समाज
लखनऊ: महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर ‘बज़्म-ए-ख़्वातीन’ के तत्वावधान में ऐतिहासिक फिरंगी महल चौक में एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बापू के ‘संदेश-ए-हक़’, इंसानियत, सत्य, अहिंसा और सांप्रदायिक सौहार्द पर प्रमुखता से चर्चा हुई।
कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय वक्ताओं के साथ-साथ शायराओं ने भी अपने कलाम पेश कर महात्मा गांधी को ख़िराज-ए-अक़ीदत (श्रद्धांजलि) अर्पित की।
अशआर का संदेश –
“सच्चाई का चिराग़ लेकर जो ज़ुल्मत से लड़ता है, वही इंसानियत के रास्ते पर आगे बढ़ता है।” — संगोष्ठी में प्रस्तुत अशआर का संदेश
कार्यक्रम की प्रमुख बातें:
इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म: बज़्म-ए-ख़्वातीन की अध्यक्ष बेगम शहनाज़ सिदरत ने कहा कि गांधी जी ने सत्याग्रह के जरिए सिखाया कि अन्याय का मुकाबला नफ़रत से नहीं, बल्कि धैर्य, नैतिक बल और शांति से किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय सहभागिता: कोरिया से आई मुख्य अतिथि किम चोंग ने कहा कि व्यक्ति की असली पहचान उसका धर्म या दौलत नहीं, बल्कि उसका चरित्र और दूसरों के प्रति व्यवहार है।
गंगा-जमुनी तहज़ीब की रक्षा: आफ़रीन बानो और सारिका श्रीवास्तव ने भारत की साझी विरासत पर जोर देते हुए कहा कि देश का निर्माण नफ़रत से नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और भाईचारे से होता है।
काव्य रचनाओं ने बांधा समां: रिज़वाना ख़ान, ज़िक्राह सिद्दीक़ी, हफ़्सा फ़ातिमा और अन्य शायराओं ने कविताओं और अशआर के जरिए राष्ट्रीय एकता और मोहब्बत का पैगाम दिया।
कार्यक्रम के अंत में हयातुल्लाह ने संचालन की ज़िम्मेदारी निभाते हुए कहा कि गांधी जी का संदेश केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि आज और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण सबक है। सत्य को अपना चरित्र, अहिंसा को अपना रास्ता और इंसानियत को अपनी सेवा का आधार बनाकर ही एक शांतिपूर्ण, एकजुट और न्यायपूर्ण समाज की स्थापना की जा सकती है।
संगोष्ठी का समापन गांधी जी के आदर्शों को अपनाने तथा देश में अमन, भाईचारे और इंसानियत को मज़बूत करने के संकल्प के साथ हुआ।







