लखनऊ : हनुमान अंश देखकर लगता रहा है कि इतनी जल्दी खत्म क्यों हो गई। 7 अगस्त को रिलीज हुई बाबा नीब करौरी के जीवन पर आधारित है-हनुमान अंश। हर आस्तिक को यह मूवी देखनी चाहिए। उसकी भक्ति और विश्वास और ज्यादा बढ़ेगा। अगर किसी नास्तिक ने यह मूवी देख ली तो वह आस्तिक हो जाएगा। जैसा कि उस समय अंग्रेज लोग भी उनके शिष्य और भक्त थे। हनुमान अंश में जिसे फ़िल्म का पहला भाग बताया जा रहा है, दूसरा भाग जल्दी ही संभावित है, में बाबा नीब करौरी जिनका असली नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था के जीवन के बचपन से लेकर उनकी 37 वर्ष तक के जीवन की प्रमुख यात्रा, घटनाओं, शिक्षाओं और चमत्कारों को बड़े ही मनोरंजक तरीके से दिखाया है। मूवी की यही खासियत है कि इसमें आध्यात्मिकता और भक्ति होने के साथ साथ हास्य और मनोरंजन का समावेश भी है।
कोई बड़ा तामझाम नहीं, कोई बड़े स्टार कॉस्ट नहीं, कोई ओवर एक्टिंग नहीं। बहुत ही सधा हुआ स्वाभाविक सा अभिनय और अंदर तक शांति और सुकून देती है फ़िल्म हनुमान अंश। बाबाजी का किरदार बहुत ही प्रभावशाली है। एमएस धोनी का किरदार निभाने के बाद सुशांत सिंह ही असली धोनी लगता था वैसे ही मूवी देखने के बाद किरदार निभाने वाले शोबीनाव सत्य ही असली बाबाजी लगने लगते हैं। क्या भाव, तेज और एक्सेंट पकड़ा है।
इतनी अच्छी मूवी अगर कोई न देखे और बकवास सिनेमा को ही देखे तो यह उसका दुर्भाग्य ही है।
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रिलीज के बाद फ़िल्म क्रिटिक्स को लग रहा था कि हनुमान अंश बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरेगी, लेकिन शुरुआती हफ्तों में फ़िल्म जरूर कमाई नहीं कर सकी किंतु रक्षाबंधन से तो हनुमान अंश ऐसी चली की बड़ी स्टार कॉस्ट और बड़े बजट वाली फिल्में भी हनुमान अंश के सामने धड़ाम बोल गईं। दरअसल हनुमान अंश की माउथ पब्लिसिटी इस कदर हुई और सोशल मीडिया में कुछ ऐसे रिव्यू आये कि लोग फ़िल्म देखने का लोभ छोड़ नहीं सके।
हनुमान अंश की बड़ी कामयाबी के बाद लगने लगा है कि धार्मिक फिल्मों का दौर एक बार फिर लौट रहा है।






