Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Monday, June 15
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    शाश्वत रचना है भारत

    By January 12, 2020 Current Issues No Comments6 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 554

    डॉ दिलीप अग्निहोत्री

    स्वामी विवेकानन्द ने परतंत्र भारत को राष्ट्रीय गौरव का स्मरण दिलाया था। इसके माध्यम से उन्होंने न समर्थ भारत का स्वप्न देखा था। वह मानते थे कि विश्वगुरु होने की क्षमता केवल भारत के पास है। इस तथ्य का विस्मरण नहीं होना चाहिए।उन्होंने दुनिया को भारत की शाश्वत और मानवतावादी संस्कृति का ज्ञान दिया। विश्व ने विस्मय के साथ उनको सुना। उन्होंने पश्चिमी देशों को बता दिया कि भारत राजनीतिक रूप से परतंत्र हो सकता है, लेकिन विश्व गुरु को सांस्कृतिक रूप से कभी गुलाम नहीं बनाया जा सकता। स्वामी विवेकानन्द के प्रत्येक ध्येय वाक्य भारतीय संस्कृति उद्घोष करने वाले है। उनसे संबंधित समारोह उत्सव से विचारों की प्रेरणा मिलती है।

    उनका व्यक्तित्व व कृतित्व राष्ट्रवाद की प्रेरणा देता है। जिस प्रकार पावर हाउस से विद्युत का प्रवाह होता है और अंधेरे में रोशनी फैलती है। उसी प्रकार विवेकानन्द का स्मरण वैचारिक ऊर्जा का संचार करता है, जिससे अज्ञानता का अंधकार दूर हो जाता है। उन्होंने विश्व में भारत की सांस्कृतिक पताका फैलाई थी। दुनिया को भारत की शाश्वत और मानवतावादी संस्कृति का ज्ञान दिया। विश्व ने विस्मय के साथ उनको सुना। उन्होंने पश्चिमी देशों को बता दिया कि भारत राजनीतिक रूप से परतंत्र हो सकता है, लेकिन विश्व गुरु को सांस्कृतिक रूप से कभी गुलाम नहीं बनाया जा सकता। विश्व और मानवता का कल्याण भारत की वसुधैव कुटुम्बकम की भावना से ही हो सकता है। विवेकानंद जी सच्चे महापुरुष थे। उनका कोई आलोचक ही नहीं हुआ। उन्होंने भारतीय संस्कृति की ध्वज पताका विश्व मे फहराई।

    स्वामी विवेकानन्द जयंती पर लखनऊ में राष्ट्रीय युवा उत्सव का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। उन्होंने कहा कि आज पूरा देश युवा सन्यासी के समाज मे किये गए कार्यों को युवा महोत्सव के रूप में मन कर याद कर रहा है। इस सरकार में युवा मोहत्सव दूसरी बार करवाने का मौका मिल रहा है। योगी ने इसके लिए उत्तर प्रदेश की जनता की तरफ से प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया।

    भारत के बारे में कहा जाता है कि ये अनेकता में एकता का देश है, यहां सब अलग का खान पान पहनवा सब अलग है। राष्ट्रीय युवा महोत्सव जैसे आयोजनों से ये अनेकता एकता में बदल जाती है। कुम्भ के आयोजन के पहले लोग सराकर ने प्रयागराज कुम्भ का भी सफल आयोजन किया। योगी ने इसमें उत्तर प्रदेश की जनसंख्या से अधिक लोगों के आगमन की बात कही थी। उनका यह संकल्प पूरा हुआ। प्रयागराज कुम्भ में उत्तर प्रदेश की जनसंख्या से करीब साढ़े चौबीस करोड़ लोग संगम स्नान हेतु आये। प्रधानमंत्री ने स्वामी विवेकानंद जी के मंदिर कोलकाता में दर्शन किये और अपना संदेश वेलयोर मठ से दिया है। अपने पूर्वजो पर महापुरुषों पर गौरव की अनिभूति ना करना विनाशकारी साबित होता है।

    किसी ने कहा भारत राष्ट्र बनने की प्रक्रिया में है, किसी ने कहा कि हम घटना से हिन्दू बन गए। ऐसे सभी लोगों को समझना चाहिए कि भारत शाश्वत राष्ट्र है,इसका उल्लेख विश्व के सबसे प्राचीन ग्रन्थ ऋग्वेद में भी है। इसमें कहा गया कि भारत हमारी माता है हम सब इसके पुत्र है। राष्ट्र की उन्नति प्रत्येक नागरिक का फ़र्ज़ है ,जो लोग भारत को नही जानते वो लोग भारत के बारे में गलत बात षड्यंत्र करके भारत को नक्सलवाद, उग्रवाद आतंकवाद में धकेलने का प्रयास करते है। विष्णु पुराण कहता है ढाई हजार वर्ष पहले हमारा पुराण बोलता है कि ये भूभाग देवताओं के द्वारा रची गयी है।
    इस वर्ष विवेकानन्द जी की जन्म जयंती पर लखनऊ में राष्ट्रीय युवा उत्सव हो रहा है।

    उत्तर प्रदेश के मेरठ और हाथरस से स्वामीजी का जुड़ाव रहा है। मेरठ में विवेकानन्द किराए के मकान में अखण्डानन्द के साथ रहते थे। पुस्तकालय से प्रतिदिन किताब लाते फिर लौटा देते थे। पांच दिन तक यह क्रम चला। एक दिन लाइब्रेरियन ने पूछ लिया कि किताबों का करते क्या हो। स्वामी विवेकानन्द ने सभी किताबों की विस्तृत जानकारी दे दी। हाथरस में स्टेशन की बेंच पर स्वामी विवेकानन्द बैठे थे। स्टेशन मास्टर उन्हें घर ले गए। वह तीन दिन से ज्यादा रुकते नहीं थे। स्टेशन मास्टर इतने प्रभावित हुए कि उनके शिष्य बन गए। स्वामी जी ने उन्हें कुलियों के यहां से भिक्षा लाने को कहा। आगे चलकर वह स्टेशन मास्टर स्वामी सदानन्द बने।

    इस प्रकार उत्तर प्रदेश के मेरठ और हाथरस से स्वामी विवेकानन्द की स्मृति जुड़ी है। स्वामी विवेकानन्द ने देश व दुनिया में लोगों को नई सोच और नई दिशा दी। उन्होंने देशवासियों में स्वाभिमान व राष्ट्रीय चेतना का संचार किया तथा भारतीय वेदांत दर्शन और अध्यात्म पर सारे विश्व के सामने अपने विचार रखे। वह ऐसे समाज की कल्पना करते थे, जिसमें धर्म या जाति के आधार पर कोई भेदभाव न हो। स्वामी विवेकानन्द ने शिकागो में आयोजित विश्व धर्म परिषद में जो व्याख्यान दिया उससे पूरे विश्व में भारत एवं भारतीयता की एक छवि बनी थी। उस समय उनकी अवस्था मात्र तीस वर्ष थी। भारत उस समय गुलाम था। विश्व में भारतीयों को सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता था। अच्छे होटलों में भारतीयों का प्रवेश वर्जित था।

    स्वामी विवेकानन्द जी को शिकागो में बोलने के लिए मात्र तीन मिनट का समय दिया गया था। लेकिन उनके प्रारंभिक संबोधन में ही भारतीय संस्कृति का व्यापक स्वरूप निखर कर सामने आ गया। विवश होकर उनका समय बढ़ाया गया। पश्चिमी संस्कृति में तो समाज में लेडीज व जेंटलमेन का ही संबोधन दिया जाता है। उनके स्वाभिमान और अभिव्यक्ति के कारण आदर्श व्यक्तित्व का निर्माण हुआ।

    गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ने कहा था कि यदि भारत को जानना चाहते हैं तो स्वामी विवेकानन्द को पढ़िये। स्वामी विवेकानन्द ने ज्ञान और शब्दों के आधार पर सबका सम्मान प्राप्त किया। धार्मिक एवं सांस्कृतिक राजदूत के रूप में जब उन्होंने शिकागो में अपनी बात रखी तो पूरा माहौल बदल गया। भाईयों बहनों के सम्बोधन से लेकर उन्होंने भारतीय संस्कृति की अवधारणा ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की बात कहकर भारत को ऐसे देश में नई पहचान दिलाई, जहाँ भारतीय लोगों का सम्मान नहीं होता था।

    स्वामी विवेकानन्द ने पूरा विश्व एक परिवार है कहकर यह सिद्ध कर दिया कि भारतीय संस्कृति में सभी धर्मों को समाहित करने की क्षमता है। संसद के द्वार पर लिखा यह श्लोक आज भी संसद में प्रवेश करने वालों को प्रेरणा देता है कि बिना भेदभाव के काम करें तथा पूरे विश्व को एक परिवार के रूप में देखें। स्वामी विवेकानन्द ने अल्प समय में पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई।।पश्चिमी सभ्यता के लोग भारतीय उदारता की कल्पना ही नहीं कर सकते थे। स्वामी विवेकानन्द जी को शिकागो में बोलने के लिए मात्र तीन मिनट का समय दिया गया था। लेकिन उनके प्रारंभिक संबोधन में ही भारतीय संस्कृति का व्यापक स्वरूप निखर कर सामने आ गया। विवश होकर उनका समय बढ़ाया गया। पश्चिमी संस्कृति में तो समाज में लेडीज व जेंटलमेन का ही संबोधन दिया जाता है। उनके स्वाभिमान और अभिव्यक्ति के कारण आदर्श व्यक्तित्व का निर्माण हुआ।

    गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ने कहा था कि यदि भारत को जानना चाहते हैं तो स्वामी विवेकानन्द को पढ़िये। स्वामी विवेकानन्द ने ज्ञान और शब्दों के आधार पर सबका सम्मान प्राप्त किया। धार्मिक एवं सांस्कृतिक राजदूत के रूप में जब उन्होंने शिकागो में अपनी बात रखी तो पूरा माहौल बदल गया। उन्होंने भारतीय संस्कृति की अवधारणा वसुधैव कुटुम्बकम से विश्व के लोगों को अवगत कराया।

    Keep Reading

    Historic first flight from Noida International Airport (Jewar): Farmers who gave up their land became the first passengers.

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से ऐतिहासिक पहली उड़ान: जमीन देने वाले किसान बने पहले यात्री

    A Unique Campaign for Yoga Awareness: Vehicle Rally Held in Ashiana

    योग जागरुकता की अनोखी मुहिम, आशियाना में निकली वाहन रैली

    Tragic incident in Shikohabad: Man shoots cancer-stricken wife, then kills himself.

    शिकोहाबाद में दर्दनाक घटना: कैंसर पीड़ित पत्नी को गोली मारी, फिर खुद को भी उड़ाया

    The bitter truth about health insurance: No money during illness, just hassle.

    हेल्थ इंश्योरेंस का कड़वा सच: बीमारी में भी पैसा नहीं, बस परेशानी

    paper leak

    पेपर लीक : कब तक ली जाएगी युवाओं के धैर्य की परीक्षा?

    Whistling Woods International and InVideo Launch Future-Focused Filmmaking Lab

    सुभाष घई की नई पहल: मुंबई में शुरू हुई AI फिल्म मेकिंग लैब छात्रों को मिलेगा एआई का अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म

    Add A Comment
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Historic first flight from Noida International Airport (Jewar): Farmers who gave up their land became the first passengers.

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से ऐतिहासिक पहली उड़ान: जमीन देने वाले किसान बने पहले यात्री

    June 15, 2026
    A Unique Campaign for Yoga Awareness: Vehicle Rally Held in Ashiana

    योग जागरुकता की अनोखी मुहिम, आशियाना में निकली वाहन रैली

    June 15, 2026
    Tragic incident in Shikohabad: Man shoots cancer-stricken wife, then kills himself.

    शिकोहाबाद में दर्दनाक घटना: कैंसर पीड़ित पत्नी को गोली मारी, फिर खुद को भी उड़ाया

    June 15, 2026
    The bitter truth about health insurance: No money during illness, just hassle.

    हेल्थ इंश्योरेंस का कड़वा सच: बीमारी में भी पैसा नहीं, बस परेशानी

    June 15, 2026
    paper leak

    पेपर लीक : कब तक ली जाएगी युवाओं के धैर्य की परीक्षा?

    June 15, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading