घर बैठे जान सकेंगे कि किस क्लाइमेट में लगेगा कौन पौधा, कहां होगा उपलब्ध

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जून में होगी लांच वेबसाइट, सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सुगंध पौधा संस्थान में चल रही कार्यशाला

लखनऊ, 07 नवम्बर, 2019: सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) लखनऊ में गुरुवार को “बायोरिसोर्सेज इंफार्मेशन नेटवर्क डेटाबेस की जैव विविधता के संरक्षण में उपयोगिता” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला की शुरूआत हुई। इस कार्यशाला में देशभर के 55 शोधार्थी भाग ले रहे हैं। इस कार्यशाला का उद्देश्य जून माह तक बनने वाली एक साइट के संबंध में विस्तृत जानकारी देना है, जिसमें देश के क्लाइमेट के हिसाब से उगने वाले पौधों के साथ ही पौधों के मिलने के संबंध में विस्तृत जानकारी रहेगी।

वह वेबसाइट शासन द्वारा जून माह में आमजन के लिए लांच कर दिये जाने की संभावना है। विशेषज्ञों ने बताया कि इस वेबसाइट में जानवरों, पक्षी, माडलिंग आदि का विस्तृत ब्योरा भी रहेगा। इस संबंध में विशेषज्ञों ने अपनी-अपनी राय रखी। इस अवसर पर आईबिन के राष्ट्रीय समन्वयक और आईआईआरएस, देहरादून के डॉ. समीर सरन ने आईबिन नेटवर्क की उत्पत्ति के बारे में जानकारी दी। उन्होंने प्रयोगशाला में मॉडलिंग जैसी विभिन्न विशेषताओं के बारे में भी बताया, जो आईबिन डेटाबेस में उपलब्ध कराई गई हैं।

अपने स्वागत भाषण में डॉ. अब्दुल समद ने कहा कि देश के कई संस्थान भारत के जैव स्रोतों के दस्तावेजीकरण के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने इंडियन बायोरिसोर्सेज इंफॉर्मेशन नेटवर्क (आईबिन) के माध्यम से जैविक संसाधनों के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए एक एकल मंच बनाने के प्रयासों के लिए जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी), भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान – भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईआईआरएस–इसरो), एवं कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय (यूएस, बैंगलोर) की सराहना की।

अपने उद्घाटन भाषण में, डॉ. आलोक धवन ने एक डी-सेंट्रलाइज्ड बायोरिसोर्स पोर्टल प्रदान करने के प्रयासों की सराहना की। साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा कि इस डेटाबेस में डाले जा रहे डेटा की वैधता और प्रमाणिकता को भी ध्यान में रखा जाये। उन्होंने जैव विविधता की चोरी को रोकने और वास्तविक उपयोगकर्ताओं के बीच डेटा को साझा करने के लिए तंत्र के विकास पर भी जोर दिया।

वर्कशाप के दौरान, सीमैप के विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों और वैज्ञानिकों द्वारा व्याख्यान दिया गया। इनमे डॉ. आलोक कालरा, पूर्व मुख्य वैज्ञानिक और कार्यवाहक निदेशक, सीएसआईआर-सीमैप, डॉ. समीर सरन, वैज्ञानिक ‘एसएफ’ और प्रमुख भू-विज्ञान, आईआईआरएस–इसरो, देहरादून, प्रो के. एन. गणेशैय्या, परियोजना सलाहकार, एसईसी, कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, बैंगलोर, डॉ. एम. पी. दारोकर, वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक, सीएसआईआर-सीमैप शामिल थे। आईआईआरएस–इसरो, देहरादून की टीम द्वारा आईबिन पोर्टल और मोबाइल अनुप्रयोगों का हैंड्स ऑन प्रदर्शन भी दिया गया। यह कार्यशाला, सीएसआईआर-केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप), लखनऊ एवं भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान-भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईआईआरएस–इसरो) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की जा रही है।

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