फिर हुयी नाइंसाफी, नहीं मिला इटौंजा को स्टेशन का दर्जा

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file photo

बार-बार धरना प्रदर्शन के बावजूद मांगे नहीं हुई पूरी: हजारों दूधिए, छात्र-छात्राओं श्रमिकों व दैनिक यात्रियों से हुआ सौतेला व्यवहार

काफी लम्बे समय से चली आ रही इटौंजा को स्टेशन का दर्जा की मांग सरकारी आश्वासन और दांव पेच में ही उलझ कर रह गयी। बता दें कि इटौंजा में रेलवे स्टेशन का दर्जा बरकरार रखने के लिए कई संगठन ने बार-बार धरना प्रदर्शन किया। उसके बावजूद इटौंजा क्षेत्रवासियों के इटौंजा स्टेशन की मांग पूरी नहीं हुई। इटौंजा स्टेशन की जगह इटौंजा को हाल्ट से उनको संतोष करना पड़ा। सिर्फ इस क्षेत्र के नागरिकों को कोरा आश्वासन ही हाथ लगा। जिससे यह स्टेशन दांव पेच में ही उलझ कर रह गई।

इटौंजा क्षेत्र के चंद्रशेखर आजाद इंटर कॉलेज महोना के प्रबंधक दिनेश कुमार कश्यप का कहना है कि इटौंजा रेलवे स्टेशन कई सदियों पहले से थी लेकिन बड़ी लाइन बनाने के समय इस का दर्जा खत्म कर दिया जिससे यहां से यात्रा करने वाले हजारों दूधिया छात्र-छात्राओं श्रमिकों व दैनिक यात्रियों के साथ सौतेला व्यवहार किया गया। जिसकी कमी अभी भी लोगों को खल रही है।

इटौंजा स्टेशन खत्म करने के विरोध में भाकियू कार्यकर्ताओं राम प्रकाश सिंह ने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ पूर्व में इटौंजा खेल मैदान में धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद भारतीय टिकैतगुट की महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष बबली गौतम व सुनील मिश्र ने इटौंजा में धरना प्रदर्शन किया।इतना ही नहीं इटौंजा रेलवे स्टेशन के पास इस मांग को लेकर क्षेत्र के मदन मोहन मिश्र, दिनेश कुमार कश्यप, बालक राम रावत व राधेश्याम गुप्ता ने सैकड़ों लोगों के साथ आमरण अनशन तक किया किंतु नतीजा सिफर रहा।

इसके अलावा क्षेत्रीय नागरिकों ने रेलवे विभाग को भी शिकायत कर रेलवे स्टेशन का दर्जा बरकरार रखने की मांग की लेकिन सिर्फ कागजी घोड़े की दौड़ते रहे। जिससे यहां के नागरिकों का कहना है, कि यहां से करीब 5000 दैनिक यात्री ट्रेन से सफर करते थे, जो आज भी यात्रा के नाम पर ठोकरे खा रहे हैं। वहीं छात्राओं के लिए भी मुसीबत का सबब है।

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