- भागीदारी संकल्प मोर्चा के सात घटक दलों के सभी पदाधिकारी, कार्यकर्ता व समर्थकों ने किया सात दिन तक ऑनलाईन धरना-प्रदर्शन
लखनऊ। भागीदीरी संकल्प मोर्चा ने सरकार से कई माँगों को लेकर लगातार सातवें दिन तक ऑनलाईन धरना-प्रदर्शन किया। मोर्चा में सम्मिलित सभी घटक दलों के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने काली पट्टी बाँधकर इस महामारी के दौरान सरकारी गाईडलाईन का पालन करते हुए भाग लिया।
जन अधिकार पार्टी के वरिष्ठ नेता आईपी कुशवाहा ने बताया कि हमारे नेता पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा व मोर्चा के सभी वरिष्ठ नेता मोर्चा की नीतियों के साथ हैं। मोर्चा की नीतियाँ मजबूर, गरीबों, वंचितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, दलितों, बेरोजगारों, किसानों, छोटे व्यापारियों आदि उन सबके हितों के लिये सदैव तत्पर है और रहेगा। इस महा दुःखद काल में सरकार की असंवेदनशीलता से करोड़ों लोग पैदल हो गये। यूपी में पिछड़ों, दलितों, वंचितों पर अपराध बढ़े हैं। लगातार कहीं न कहीं ये लोग निशाना बनाये जा रहे हैं। कई लोगों की हत्यायें भी हुई हैं। कई मामलों में आरोपियों तक शिकंजा तक नहीं कस सका। करोड़ों लोग बेरोजगार हो गये हैं। कई लोगों के सामने बहुत सी समस्याएं आकर खड़ी हो गयी हैं। इन सब समस्याओं के समाधान के लिये भागीदारी संकल्प मोर्चा ने एक जून से सात जून तक ऑनलाईन धरना-प्रदर्शन कर सरकार तक अपनी बातें पहुँचायी हैं।
आईपी कुशवाहा ने आगे कहा कि ‘हम क्या हैं, कहाँ पर हैं’? इसे ही केंद्रबिंदु मानकर जब सरकार कोई नीतियाँ तय करेगी तभी संभव है वह नीतियाँ यहाँ के लोगों के लिये फलदायी हों। हम विकसित देशों में झाँककर, वहाँ की नीतियों को यथावत लागू करने से जरूर बचें। क्योंकि वहाँ और यहाँ में राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, भौगोलिक आदि बहुत से बड़े अंतर हैं। आज सरकार केवल पश्चिम से उजाला लेकर अपने यहाँ का अंधियारा दूर करना चाहती है। जो कि पूर्णतः संभव नहीं है। हमें खुद को जमीनी हक़ीकत देख कर फैसले लेने होंगे, आँख मूंद कर नहीं। फैसले भी ऐसे हों जो आमजन को सीधे लाभ दें। बीस लाख करोड़ का राहत पैकेज, किसी के भी समझ नहीं आ रहा। यहाँ तक सत्ताधारी दल के अच्छे-अच्छे नेताओं को भी। कि कैसे और किन-किन लोगों को ये पैसा किस प्रकार मिलेगा।
बैंकों की प्रक्रियाएं किसी से छिपी नहीं हैं। लगभग हर लोन में साहबों को सुविधा राशि भी चाहिए होती है। आईपी कुशवाहा ने आगे कहा कि 90 हजार करोड़ रूपये बड़ी बिजली कंपनियों को क्यों दिये गये? क्या सरकार ने लोगों का बिजली बिल माफ किया, क्या सरकार ने लोगों की ईएमआई कुछ महीनों के लिये भी माफ किया। बैंक में बात करो तो वो प्रेशर डालते हैं कि आप जमा करते रहो तो ठीक है, नहीं तो जितने दिन न जमा करने की छूट मिली है उतने दिन का भी ब्याज वसूला जायेगा।
उन्होंने कहा कि कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बीस लाख करोड़ रूपये के राहत पैकेज में सिर्फ 1,86,650 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रोत्साहन पैकेज है तथा आर्थिक पैकेज की कई घोषणाएं बजट का हिस्सा हैं और कई घोषणाएं कर्ज देने की व्यवस्था का हिस्सा है। प्राईवेट अस्पतालों में कोरोना का ईलाज इतना मँहगा है कि आम लोग वहाँ जाने की सोच भी नहीं सकते। इस महामारी के दौरान में तो सरकार को यहाँ भी लगाम लगानी चाहिए। जब लॉकडाउन की शुरूआत हुई थी तब देश में कोविड-19 के लगभग 500 मरीज ही थे लेकिन लॉकडाउन में ही संक्रमित लोगों की संख्या ढाई लाख होने को है।
सरकार के पास बहुत समय होने के बावजूद वो महामारी से लड़ने की नीतियाँ सही समय पर न बना सकी। नहीं तो आज भारत इस महामारी से सुरक्षित रहता तथा आर्थिक तबाही से बचा होता। करोड़ों लोग एक झटके में बेरोजगार न हो पाते। हजारों दुःखद मौतों को होने से बचाया जा सकता था। गाँवों में राहत योजनाएं भेजी जा रही हैं लेकिन स्थितियाँ किसी से छिपी नहीं हैं। गाँवों के प्रधानों व उनके सचिवों के लिये भी यह महामारी अवसर लेकर ही आयी है।
ऐसे में बहुत से जरूरतमंद फाँकाकशी करने को मजबूर हैं। बेबस लोगों की आत्महत्या का ग्राफ भी तेजी से बढ़ रहा है। कई पश्चिम देशों ने बच्चों के स्कूल शुरू कर जो गलती की उससे भी भारत को अभी बचना होगा। क्योंकि यहाँ हर तरह की लापरवाही देखने को मिलती आयी है और आगे भी होगी। अनलॉक-1 में तो सब ऐसे निष्फिकर हो गये जैसे कुछ हुआ ही नहीं। मानो देश में से संक्रमण चला गया। इस तरह के हालात में 8 जून के बाद से पब्लिक प्लेस पर और ढिलाई देने से संक्रमण की रफ्तार क्या होगी। किसी से छिपा नहीं। जब तक इसके रोकने का कोई सही दवा नहीं आ रही तब तक कड़ाई से सावधानी का पालन करवाना व करना जरूरी है।
मोर्चा के धरना-प्रदर्शन को सफल बताते हुए आईपी कुशवाहा ने आगे कहा, उत्तर प्रदेश में पिछड़ों की हत्याओं का ग्राफ भी लगातार बढ़ रहा है। इन हत्याओं के आरोपियों को जल्द से जल्द पकड़ कर कार्रवाई हो। इस माँग के साथ मोर्चा ने किसानों को उनके सभी उत्पादों पर समर्थन मूल्य दिये जाने की माँग रखी और किसानों का कर्ज माफ किये जाने की भी माँग की।
निम्न मध्यम वर्ग, श्रमिकों व मजदूरों की जीविका के लिये एक मुश्त 15000 रूपये दिये जायें और प्रति माह 7500 रूपये दिये जाने की माँग की। बेरोजगारों को रोजगार दिया जाये। छोटे व मझोले किसानों का बिजली का बिल माफ किये जाने की माँग की। जिससे आमजन पर राहत की बरसात हो सकती है और वो भी पुनः सामान्य जिंदगी जी सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि मोर्चा के वरिष्ठ नेताओं ने अपने-अपने पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से इस दुःखद वक्त में दीन-दुःखी व पीड़ित लोगों के लिये हर संभव मदद के लिये भी आग्रह किया है। प्रदेश भर में हमारे हजारों साथियों ने इस अनोखे धरने को सफल बनाया। सरकार तक अपनी बातें पहुँचायीं।







