डॉ दिलीप अग्निहोत्री
भाजपा विचारधारा पर आधारित पार्टी है। इसलिए भारत की अन्य परिवार आधारित पार्टियों की भांति इसकी सरंचना नहीं है। इसमें चाय बेचने वाला बालक आगे चलकर प्रधानमंत्री बनाया जा सकता है, जमीनी स्तर से कार्य करने वाले संगठन के शीर्ष पर पहुंच सकते है। जेपी नड्डा को भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष बनना ऐसा ही निर्णय है। पार्टी की संसदीय समिति ने उन्हें यह दायित्व सौंपा है। उन्होंने चमक दमक से दूर रहकर अपनी संगठन क्षमता प्रमाणित की है। पार्टी ने अब तक उन्हें जो दायित्व सौंपा, उसका उन्होंने बखूबी निर्वाह किया है। सरकार और संगठन दोनों में उन्होंने अपनी सफलता की छाप छोड़ी है। यही वह कारण है, जिनके चलते उन्हें देश की सबसे बड़ी पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किसी ने सवाल किया था, वह यह कि क्या कभी बचपन उन्होंने प्रधानमंत्री बनने का सपना देखा था। इस पर नरेंद्र मोदी का जबाब दिलचस्प था। यह भारत के अधिसंख्य लोगों पर लागू भी होता है। उन्होंने कहा था कि जिस परिवार में उनका जन्म हुआ था, उसमें ऐसा सपना देखना संभव ही नहीं था। चाय बेचकर जीवन यापन करते थे। इसी के साथ समाजसेवा से जुड़े, अपना कर्तव्य निर्वाह करते रहे, बाद में भाजपा ने उन्हें गुजरात का मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया। जनादेश से वह इस पद पर पहुंचे।
मोदी के पहले अटल बिहारी वाजपेयी इसी पार्टी से प्रधानमंत्री बने थे। वह भी साधारण परिवार के थे। प्रधानमंत्री बनने का सपना उन्होंने भी बचपन में नहीं देखा होगा। केवल समाज सेवा का जुनून था। उसी में लगे रहे। पार्टी ने उनके योगदान को सम्मान दिया। अमित शाह, जेपी नड्डा , राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी आदि की पारिवारिक पृष्टभूमि इतने बड़े सपने देखने की नहीं थी। लेकिन भाजपा में ही इनका संगठन के शीर्ष पद पर पहुंचना संभव था। जनसंघ के स्थापना काल से ही यह परम्परा चली आ रही है। इसी लिए भाजपा अन्य पार्टियों से अलग है।
नितिन गडकरी ने अध्य्क्ष बनने के बाद एक दिलचस्प किस्सा सुनाया था। नागपुर में अटल बिहारी वाजपेयी की जनसभा थी। उनको सुनने के लिए नितिन गडकरी और उनके दो साथ स्कूटर पर बैठ कर जा रहे थे। ट्रैफिक पर रोके गए। इन्हें बताया गया कि तीन सवारी नहीं बैठ सकती, इन्होंने कहा कि अटल जी को सुनने जा रहे है। इसलिए इन्हें भविष्य में तीन सवारी न बैठाने की चेतावनी देकर जाने दिया गया। यहाँ कहने का मतलब यह कि जो युवक स्कूटर पर तीन सवारी बैठकर अटल जी की सुनने जा रहा था, वह उन्हीं के जीवन काल में पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गया। फिर वह अटल जी का आशीर्वाद लेने भी गए थे।
परिवार आधारित पार्टियों में ऐसे प्रसंगों की कल्पना करना भी संभव नहीं है। कांग्रेस में सोनिया गांधी को कई वर्षों तक इंतजार करना पड़ा, क्योंकि राहुल गांधी अध्य्क्ष बनने को तैयार नहीं हो रहे थे। अन्य नाम पर विचार संभव नहीं था। जब राहुल ताजपोशी को तैयार हुए, तब सोनिया गांधी निश्चिंत हुई। अभी लोकसभा चुनाव में करारी हार में बाद राहुल ने अध्य्क्ष पद से इस्तीफे की पेशकश की, तब फिर इसी बात पर मामला अटक गया। राहुल नहीं तो फिर कौन। प्रियंका गांधी भी इस चुनाव में नाकाम हुई थी, इसलिए उनके नाम के प्रति उत्साह नहीं रह गया था। क्षेत्रीय पार्टियां तो शून्य पर पहुंच जाए, तब भी कमान परिवार के हाँथ में ही रहती है। ऐसे में भाजपा ने साबित किया कि वह औरों से अलग है।
भाजपा संसदीय समिति ने जे पी नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष चुना है। उनकी संगठन क्षमता पर विश्वास व्यक्त किया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को गृह मंत्री बनाया गया है। इस मंत्रालय की जिम्मेदारी बहुत अधिक होती है। ऐसे में संगठन के चुनाव सम्पन्न होने तक जेपी नड्डा उनका सहयोग करेंगे। अगले कुछ महीनों में महाराष्ट्र, झारखंड, हरियाणा में दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में भी विधानसभा चुनाव होने है। रक्षा राजनाथ सिंह ने ठीक कहा कि अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में पार्टी ने कई राज्यों के चुनाव में जीत हासिल की है। अब अमित शाह चाहते हैं कि किसी अन्य को पार्टी की जिम्मेदारी दी जाए। इसलिए जेपी नड्डा जी को भारतीय जनता पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है।
वह संसदीय समिति के सचिव भी हैं। अभी सम्पन्न हुए आम चुनाव में उन्हें उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रभारी बनाया गया था। जमीनी स्तर पर कार्य करने की उनकी शैली भी अमित शाह जैसी दिखाई दी। यहां सपा बसपा गठबन्धन को लेकर बड़े बड़े दावे चल रहे थे। जेपी नड्डा ने प्रदेश संगठन,सरकार, और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर प्रभावी रणनीति बनाई। विपक्षी गठबन्धन के बाबजूद भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्हें पूरे देश का जमीनों अनुभव है। वह मूलतः हिमाचल प्रदेश के है। जन्म और पढ़ाई पटना में हुई। सेंट जेवियर्स स्कूल पटना से अपनी पढ़ाई के बाद पटना यूनिवर्सिटी से ही स्नातक किया। फिर शिमला की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से विधि स्नातक किया। की पढ़ाई की है। हिमाचल प्रदेश से तीन बार विधायक बने। नरेंद्र मोदी की पिछली सरकार में स्वास्थ मंत्री के रूप में उन्होंने बेहतरीन कार्य किया। उनके पिछले रिकार्ड को देखकर कहा जा सकता है कि नई जिम्मेदारी का निर्वाह भी वह सफलता पूर्वक करेंगे।








5 Comments
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