नवेद शिकोह
अभी चर्चाएं शुरू नहीं हुई हैं। बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी। मीडिया को मुट्ठी में लेने वाली सियासी ताकतों की तरह अब अंबानी ग्रुप ने देश की हलचलों को अपनी मुट्ठी में ले लिया है। हुकूमत के बचाव की सियासत में इंटरनेट की दुनिया में वन टू का फोर करने वाली ताकतें फोर टू का वन करने लगी हैं। मेरा ये शक आपके यकीन में बदल सकता है। इसके लिए पूरा माजरा समझये-
लखनऊ, 19 दिसम्बर 2018: चार राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का मिजाज बदलना ही शुरू हुआ था कि अंबानी के जियो की रफ्तार थम गई। मुफ्त और बेहद सस्ते के मोह में देशभर को जियो को अपनाने पर मजबूर करने वाली अंबानी ग्रुप की टेलीकॉम कंपनी अब इंटरनेट पर धड़कने वाली हलचलों को थामने की कोशिश मे लग गयी है। तीन-चार रोज से जियो के इंटरनेट की नेटवर्किंग को रोक कर रात को सोशल मीडिया की रफ्तार को खामोश कर दिया जा रहा है। रात दस बजे से देर रात तक जियो मरना शुरू हो जाता है। यही सोशल मीडिया की धूम के पीक आवर्स होते हैं।
वन जी से टूजी और फिर टूजी के रिवाज को पीछे छोड़कर फोर जी की क्रान्ति लाने वाला जियो हर रोज रात को फोर जी से वन जी जैसा रेंगने लगता है। चार राज्यों में जीत कर जीने के संकेत देने वाली कांग्रेस की सफलता को सोशल मीडिया पर बढ़ने से रोकने के लिए जियो शायद मर जाना मुनासिब समझ रहा है।सरकार की लोकप्रियता विरोध में तब्दील होते ही कांग्रेस उठ खड़े होने की स्थिति में आने लगी। सोशल मीडिया जनता के बदले मिजाज का पैमाना बनकर नजर आने लगी। कांग्रेस की जीत-भाजपा की हार.. चौकीदार पर नकारात्मक टिप्पणियां.. राफेल पर सफाई देने वाले हलफनामें की स्पेलिंग मिस्टेक और कांग्रेस की नवोदित सरकारों द्वारा किसानों का कर्ज माफ करने की सराहना… मुट्ठी में रखे स्मार्ट फोन से लोगों के दिलो-दिमाग दिमाग में उतरना शुरू हो गयी। इस दौरान ही खूब तेज दौड़ने वाला फोर जी वाला जियो का नेटवर्क अब हर रात रेंगने लगा है। वैसे ही जैसे मोदी सरकार के आलोचनात्मक पहलुओं पर पुण्य प्रसून वाजपेयी के टीवी कार्यक्रम ‘मास्टर स्ट्रोक’ के पहले सिग्नल गायब हुए फिर प्रसून न्यूज चैनल से बाहर हो गये। और फिर पत्रकार प्रसून को पैदल करने के बाद चैनल के प्राइम टाइम में सिग्नल वापस आ गये।
भारत के हर खास-ओ-आम इंसान की दिनचर्या से जुड़ चुके इंटरनेट और स्मार्ट फोन के जरिए भारत की हलचलों की धड़कन अंबानी की मुट्ठी में हैं।
जियो की धीरी रफ्तार बदलते रूख वाली फिजाओं को दबाने के लिए तो नहीं ! सरकार विरोधी और कांग्रेस के पक्ष की फिजाओं पर काबू करने के लिए अंबानी ग्रुप ऐसा क्यों नहीं कर सकता ! जब राहुल गांधी खुलेआम चिल्ला रहे हैं कि चौकीदार चोर है, उसने अंबानी को चोरी करायी है। शायद जियो का नेटवर्क तब तक रेंगता रहेगा जब तक भाजपा सरकार की कोई उपलब्धि.. मनमाफिक मुद्दा या कांग्रेस की बदनामी का कोई शिगूफा ना खड़ा हो जाये।
भाजपा की जीत में सोशल मीडिया का बड़ी भूमिका रही थी। इसलिए मोदी सरकार आने के बाद आटा तो नहीं लेकिन इंटरनेट डाटा बहुत ही सस्ता हो गया। टेलीकॉम इंडस्ट्री पर अंबानी ग्रुप का एकाधिकार है। जियो कनेक्शन सबकी मजबूरी भी और जरूरत भी। मीडिया को भी धीरे धीरे अंबानी ग्रुप अपनी मुट्ठी में ले ही रहा है। जब देखा कि सोशल मीडिया प्रोफेशनल मीडिया पर हावी हो रहा है तो अंबानी को सोशल मीडिया का गला ममोड़ने में तो बस अपनी मुट्ठी को थोड़ा दबाना भर ही तो है।







