- पत्नी : आपको अरेंज मैरिज और लव
मैरिज का मतलब पता हैं?
पति : – हाँ पता हैं !!!
अरेंज मैरिज : – आप जब चल रहे हो तभी
अचानक से आपको सांप काट ले ये, अरेंज
मैरिज हैं और
लव मैरिज : -आप सांप खोजते हैं और उसके
सामने नाच-नाच के कहते हैं ले काट ले – ले
काट ले, लव मैरिज हैं!
- पप्पू जंगल में जा रहा था तभी एक सांप ने पैर पर काट लिया।
पप्पू को गुस्सा आया और टांग आगे करके बोला, “ले काट ले जितना काटना है काट ले।”
सांप ने फिर तीन-चार बार काटा और थक कर बोला, “अबे तू इंसान है भूत?”
पप्पू, “मैं तो इंसान ही हूं लेकिन मेरा यहां पैर नकली है।”
- चालीस पार करने के बाद बहुत तकलीफ होती है…
कुछ अच्छा नहीं लगता..
तीस पर थे तब कितना अच्छा लगता था.. कितना उत्साह था life में..
कभी भी कहीं भी जा सकते थे..अब बाहर निकलने का मन ही नहीं करता…
बीस पर थे तब तो बहार ही कुछ और थी.. कितना भी काम कर लो, थकते नहीं थे..
पर अब तो किसी काम में मन नहीं लगता…
45 पार में तो ना जाने क्या होगा सोचकर ही डर जाते हैं।
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उम्र की बात नहीं, तापमान की बात है।
- चार जुआरियों को अदालत में पेश किया गया…
उन पर इल्जाम यह था कि पार्क में बैठ कर जुआ खेल रहे थे…
मजिस्ट्रेट ने बारी बारी उनसे पूछा…
पहला – साहब मैं उस दिन यहाँ था ही नही… सबूत के तौर पर अपने ट्रेवल एजेंट से ली रेल टिकट की रसीद सबूत के तौर पर पेश की…
दूसरा – साहब उस दिन मैं बुखार से पीड़ित था यह रहा मेरा डाक्टर का प्रमाण पत्र…
तीसरा – साहब मैं एक सरकारी मुलाजम हूं यह रहा मेरा हाजरी रजिस्ट्रर, मैं उस दिन डयूटी पर था…
चौथा चुपचाप खड़ा रहा…
मजिस्ट्रेट ने उससे पुछा अब तुम बताओ कि तुम भी जुआ नही खेल रहे थे?
चौथा जुआरी – साहब आप नें कभी जुआ खेला है…..?
मजिस्ट्रेट – नहीं, पर यह तुम मुझ से क्यों पूछ रहे हो सबूत दो सबूत…
कानून सिर्फ सबूत मांगता है…
चौथा जुआरी – साहब अब आप ही बता दो कि अकेला आदमी जुआ कैसे खेल सकता है…
- बीवी और मेरे बीच बहस शुरू हुई और नौबत मारपीट तक आ पहुंची.
बीवी बेलन लेकर मुझ पर झपटी तो मैंने बला की फुर्ती दिखाई और झटपट अलमारी के अन्दर घुस गया
“बाहर निकलो” – बीवी बेलन से अलमारी का दरवाजा खटखटाते हुए बोली
“नहीं निकलूंगा” – अन्दर से मैं बोला
“मैं कहती हूँ कि बाहर निकलो- पत्नी फिर चिल्लाई
नहीं निकलता – मैं भी चिल्लाया
आवाजें सुनकर पड़ोसी आ गए..
पत्नी चीखती हुई पड़ोसियों से – ये डरपोक इंसान अलमारी के अन्दर घुस गया है.. इसे कह दो कि चुपचाप बाहर निकल आयें वरना
“नहीं निकलता.. नहीं निकलता ! आज पूरे मोहल्ले को पता लग ही जाना चाहिए कि इस घर में मेरी मर्जी चलती हैं
- ठेकेदार से ‘बात’ हो जाने पर, clerk ने IAS साहब को बता कर फाइल रखी, साहब ने लिखा *”Approved”*
…दो दिन बाद, ठेकेदार वादे से मुकर गया….
clerk ने साहब को बताया, साहब बोले-अब क्या करें?
clerk के दिमाग का कमाल देखिये—clerk ने कहा-सर, Approved के पहले Not शब्द लिख दीजिए…
*”Not Approved”*
अब ठेकेदार परेशान
..फिर clerk से मिलकर ‘बात’ बनाई…
clerk ने फिर साहब के सामने फाइल लेकर पहुंचा….
साहब झल्लाये…..अब क्या करें? फिर clerk के दिमाग का कमाल देखिये…..clerk ने कहा, सर, Not में केवल e: लगा दें ,अर्थात…..
‘Note: Approved’
आप ही बताइए कौन देश चला रहा है ?
अफसर करें न अफसरी,
वर्कर करें न काम।
दास मलूका कह गये,
सब कुछ करें क्लर्क।







