पतंजलि ग्रुप चंदन की लकड़ियों को आखिर चीन क्यों भेज रहा था, विवाद बढ़ा

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पतंजलि ग्रुप ने यह भी कहा कि हमने लकड़ियां APFDCL से खरीदी हैं, जिसमें कुछ भी गलत नहीं है

पतंजलि ग्रुप 50 टन चंदन की लकड़ियां भेज रहा था चीन

नई दिल्ली, 24 फरवरी। बाबा के कंपनी पतंजलि आयुर्वेद के बने कई प्रोडक्ट भी लोग धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन रामदेव की कंपनी से संबंधित एक मामले ने काफी जोर पकड़ लिया है और सबकी नींद भी उड़ा दी है। दरअसल केन्द्र सरकार की एक जांच एजेंसी डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने पतंजली ग्रुप की 50 टन चंदन की लकड़ियां जब्त की हैं, जिन्हें चीन भेजा जा रहा था। अब इसी जांच एजेंसी के खिलाफ पतंजलि ग्रुप दिल्ली हाईकोर्ट चली गयी है। जांच एजेंसी DRI ने चंदन की लकड़ियों के साथ ही पतंजलि ग्रुप के प्रतिनिधि का पासपोर्ट और निर्यात से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किये हैं।

मामला हाईकोर्ट जाते बढ़ा:

मामले तूल तब पकड़ा जब पतंजलि कोर्ट चली गयी। बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद केन्द्र सरकार की एक जांच एजेंसी के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट चली गई है। डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने पतंजिल ग्रुप की 50 टन चंदन की लकड़ियां जब्त कर ली है। ये लकड़ियां पतंजलि ग्रुप द्वारा चीन भेजी जा रही थी। DRI के इस कदम के खिलाफ पतंजलि ग्रुप दिल्ली हाईकोर्ट गई है। डीआरआई ने चंदन की लकड़ियों के अलावा पतंजलि ग्रुप के प्रतिनिधि का पासपोर्ट और निर्यात से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पतंजलि ग्रुप के पास सी ग्रेड की लकड़ियों को एक्सपोर्ट करने की अनुमति हासिल है। 

पतंजलि ग्रुप को सी ग्रेड की एक्सपोर्ट करने की अनुमति मिली हुई है

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि ग्रुप को सी ग्रेड की एक्सपोर्ट करने की अनुमति मिली हुई है. लेकिन जांच एजेंसी को शक है कि 50 टन पर जो चंदन की लकड़ियां चान भेजी जा रही थीं , उनमें ग्रेड-A और ग्रेड-B की लकड़ियां भी शामिल हैं. हालांकि कंपनी ने ऐसी किसी भी बात को साफतौर पर खारिज कर दिया है। इसे लेकर पतंजलि ग्रुप ने यह भी स्पष्ट किया है कि, हमने अब तक निर्यात नहीं किया है और अभी इसे बाहर भेजने की प्रक्रिया में ही हैं. साथ ही कहा कि चंदन की ये लकड़ियां APFDCL ( आंध्र प्रदेश जंगल विकास निगम लिमिटेड) से हमने खरीदी हैं, जिसमें कुछ भी गलत नहीं है. वहीं इस मामले पर मिले एक ई-मेल के जवाब में ग्रुप की ओर कहा गया है कि निर्यात करने को लेकर सभी दस्तावेज, परचेज ऑर्डर, परफॉर्मा इनवॉयस, कृष्णपट्टनम पोर्ट पर लकड़ियों की मौजूदगी के अलावा उनके पास लकड़ियों की दर के पेपर मौजूद हैं. साथ ही जवाब न में कहा गया है कि ग्रेड- C लकड़ियों के निर्यात का परमिशन के साथ ही लाइसेंस भी उनके पास मौजूद हैं।

नियम तोड़ने की बात पतंजलि ग्रुप ने की ख़ारिज

जांच एजेंसियों को शक है कि बाहर भेजी जा रही चंदन की लकड़ियों में ग्रेड-A और ग्रेड-B की लकड़ियां भी शामिल हैं।पतंजलि ग्रुप ने नियमों को किसी भी तरह से तोड़ने की बात को खारिज किया है। ग्रुप की तरफ से कहा गया है कि चंदन की ये लकड़ियां आंध्र प्रदेश वन विभाग द्वारा की गई एक नीलामी में खरीदी थी। बता दें कि भारत से बेहतरीन क्वालिटी की चंदन की लकड़ियों का निर्यात प्रतिबंधित है। हालांकि, सामान्य किस्म की लकड़ियों को बाहर भेजा जा सकता है। चीन चंदन की लकड़ियों का सबसे बड़ा खरीददार है, लेकिन जाँच एजेंसियों को शक था कि ग्रेड A और B की लकड़ियाँ इसमें शामिल हो सकती हैं।

चन्दन की लकड़ी, भेजी जा रही थी चीन

पतंजलि ग्रुप की ओर से बताया गया कि निर्यात की प्रक्रिया में शामिल में सभी दस्तावेज, परचेज ऑर्डर, परफॉर्मा इनवॉयस, कृष्णपट्टनम पोर्ट पर लकड़ियों की मौजूदगी, लकड़ियों की दर और सी कैटेगरी की लकड़ियों के निर्यात का परमिशन और लाइसेंस उसके पास मौजूद है। उनका कहना है कि इसमें नियमों को ताक पर रखकर कोई कार्य नहीं किया गया है और ना ही कोई प्रतिबंधित लकड़ी का निर्यात किया जा रहा था।

पासपोर्ट भी हुए जब्त

लाल चंदन की लकड़ी के साथ पतंजलि कर्मचारी के पासपोर्ट भी जब्त किये गए हैं। पतंजलि के प्रवक्ता ने बताया कि, ‘हम कोई गैरकानूनी काम नहीं कर रहे हैं। लाल चंदन की लकड़ी हमने APFDCL (आंध्र प्रदेश फॉरेस्ट डिवेलपमेंट कॉर्प) से खरीदी है। एक्सपोर्ट में लगने वाले परचेज ऑर्डर, परफॉर्मा इनवॉइस, कृष्णापट्टनम बंदरगाह पर पड़ा माल, माल का दाम और डॉक्युमेंट्स, परमिशन और लाइसेंस सी कैटिगरी के लाल चंदन की लकड़ी आंध्र प्रदेश फॉरेस्ट डिवेलपमेंट कॉर्प ने सत्यापित की हुई है।’

बाबा रामदेव सबसे बड़े खरीदार

पतंजलि आयुर्वेद देश में लाल चंदन के सबसे बड़े खरीदार के रूप में उभर रहा है। आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से की गई हालिया नीलामी में ट्रस्ट ने करोड़ों रुपये का लाल चंदन खरीदा था। चीन के बाद देश में संभवत: बाबा रामदेव ही ऐसे खरीदार हैं, जिन्होंने इतने बड़े पैमाने पर इस कीमती लकड़ी को खरीदा था। सूत्रों के अनुसार पतंजलि योगपीठ आयुर्वेदिक दवाओं के उत्पादन के लिए लाल चंदन की लकड़ी का उपयोग करता है। हकीकत में पतंजलि जिस मात्र में आयुर्वेद दवा बनाता है, असल में उतनी मात्र में देश में जड़ी बूटियां पैदा ही नहीं होती, यह एक अलग घपला है।