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    Home»Featured

    गया के प्रेतशिला में ‘पिंडदान’ से मिलती है प्रेतयोनि से मुक्ति

    By October 4, 2018 Featured No Comments2 Mins Read
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    पटना, 04 अक्टूबर 2018:  यदि आपके गुजरे प्रियजनों को मुक्ति नहीं मिल रही है या वो यदा- कदा आपके सपने में या आसपास दिखते हैं तो आप उनकी मुक्ति के लिए गया में पिंडदान कर उन्हें मुक्त कर सकते हैं। ‘मुक्तिधाम’ के रूप में विश्व विख्यात विष्णुनगरी गयाजी में ‘पितृपक्ष’ के दौरान ‘पडदान’ का विशेष महत्व है। गयाजी में कई वेदियों पर ‘पडदान’ किया जाता है लेकिन मान्यता है कि प्रेतशिला में ‘पडदान’ करने से प्रेतयोनि से मुक्ति मिलती है।

    बता दें कि गया शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित प्रेतशिला पर्वत का विशेष महत्व है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इस पर्वत पर ‘पडदान करने से अकाल मृत्यु को प्राप्त पूर्वजों तक ‘पड सीधे पहुंच जाता है। इससे उन्हें कष्टदायी योनियों से मुक्ति मिल जाती है। करीब 873 फुट और 676 सीढ़ी चढ़कर ही कोई प्रेतशिला वेदी तक पहुंच सकता है।

    वायु पुराण के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि अकाल मौत को प्राप्त लोगों को प्रेत योनि से मुक्ति के लिए प्रेतशिला पर्वत पर ‘पडदान किया जाता है। प्रेत आत्माओं की शांति के लिए प्रेतशिला पर ‘पडदान करने की परम्परा है। प्रेत पर्वत के शिखर पर स्थित ब्रम सरोवर में तर्पण करने के बाद वहां ¨पड का विसर्जन किया जाता है। पर्वत के शिखर पर स्थित शिला विष्णु मंदिर, ब्रह्म चरण एवं माता सीता द्वारा उपलब्ध कराई गई स्वर्ण अंगूठी से भगवान राम की खींची तीन रेखायें आज भी मौजूद हैं, जो ब्रह्म लिपि के नाम से जानी जाती है। 

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