आईसीएआर के निदेशक ने कहा, दक्षिण भारत में भी दशहरी की अच्छी बागवानी
लखनऊ, 10 मई 2020: इस वर्ष कोरोना के कारण उत्तर भारतीय बाजारों में आम की मांग कम तो थी ही साथ ही साथ दक्षिण भारत के बागों में आम की पैदावार भी कम थी। आंध्रप्रदेश में तो कई स्थानों पर कुल उत्पादन का केवल 25 प्रतिशत ही आम था। इन दोनों कारणों से उत्तर भारतीयों को दक्षिण भारतीय आमों को ठीक से चखने का मौका नहीं मिला लेकिन दशहरी की मिठास जल्द ही बाजार में दिखने लगेगी। इस वर्ष इसकी उपज भी अच्छी है।

केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान के निदेशक डॉ शैलेंद्र राजन ने बताया कि आंध्र प्रदेश में दशहरी की खेती के प्रति किसानों का रुझान बढ़ा है। संस्थान से हजारों दशहरी के पौधे इन प्रदेश के किसानों को उपलब्ध कराएं हैं, हालांकि दशहरी का असली रंग रूप वहां देखने को नहीं मिलता है लेकिन फिर भी दशहरी का स्वाद तो दशहरी का ही है। आंध्र प्रदेश कर्नाटक महाराष्ट्र गुजरात और अन्य स्थानों पर दशहरी उगाने का मुख्य कारण इस किस्म की कई खासियत है। यद्यपि यहां पर दशहरी का आकार लखनऊ के मुकाबले बहुत छोटा होता है परंतु स्वाद में काफी समानता एवं लोगों में बढ़ती इसकी लोकप्रियता के कारण किसानों ने नए बागों में लगाना प्रारंभ कर दिया है। दशहरी की उपज इन प्रदेशों में काफी अच्छी है, जिसके कारण किसान उससे संतुष्ट हैं।
आंध्र प्रदेश में उत्पादित दशहरी पकने लगी है और उसका दिल्ली मार्केट लखनऊ के फलों से पहले आ जाना स्वाभाविक है| आंध्र प्रदेश महाराष्ट्र उड़ीसा एवं गुजरात के बहुत से क्षेत्रों में दशहरी का उत्पादन होना शुरू हो गया है और यह सभी स्थान मार्केट में मई के पहले पखवाड़े में ही दशहरी उपलब्ध कराने की सामर्थ रखते हैं।
आमतौर पर मलिहाबाद के किसान इस बात से आशंकित रहते हैं कि दशहरी उनके बाजार पर कब्जा ना जमाले, लेकिन डॉ राजन के अनुसार दक्षिण भारत का दशहरी उत्पादन उनके लिए एक अच्छा प्लेटफार्म तैयार करने की कोशिश कर रहा है। उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त कई प्रदेशों में दशहरी के उत्पादन से स्थानीय लोग उसके स्वाद से परिचित हो चुके हैं। इसका लाभ उत्तर भारत के असली दशहरी उत्पादकों को मिल सकता है, क्योंकि जब बेहतरीन दशहरी उत्तर भारत से वहां पहुंचेगा तो उसको वहाँ के बाज़ार में पैर जमाने में कोई कठिनाई नहीं होगी।
महंगा होने के कारण अल्फांसो नहीं खाते आमजन:
अल्फांसो आम विश्व प्रसिद्ध अवश्य है परंतु अधिकतर भारतीयों को इसे खाने का अवसर प्राप्त नहीं होता है| शुरुआत में अल्फाजों के आसमान छूते दाम बहुत कम ही लोगों को रास आते हैं। इस कारण आमतौर पर यह बड़ी दुकानों पर ही उपलब्ध रहता है और आम की अन्य किस्मों की तरह छोटी दुकानों पर सर्वसाधारण को उपलब्ध होना कठिन है| अभी तक देखा गया है कि दक्षिण भारतीय किसमें ही उत्तर भारत में ज्यादा लाभ कमाती हैं| सीजन के शुरुआत में मार्केट में आए आम को महंगे दाम पर भी खरीदने में किसी को कोई परेशानी नहीं होती है।







