पुलिस केस की मिर्ची ने बना दिया नमक-रोटी वाली खबर को चटपटा 

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  • राष्ट्रीय पत्रकारों को एक स्थानीय पत्रकार ने बता दिया कि असल ख़बर क्या होती है
  • एक सच्ची खबर ग्रामीण पत्रकार को राष्ट्रीय ब्रॉड पत्रकार बना देती है
  • गंभीर मामले मे डर के चूलों मे छिप जाते हैं चाटूकार पत्रकार संगठन
नवेद शिकोह
लखनऊ, 03 सितम्बर 2019: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर के सरकारी स्कूल मे बच्चों के मिडडेमील भोजन की असलियत को सामने लाने वाली पत्रकार पवन जायसवाल की खबर वाक़ई क़ाबिलेतारीफ है। जिससे घबराकर पत्रकार पर  मुकदमा दायर करना खबर की सच्चाई पर मोहर लगाना जैसा है।
सच से डरकर और घबराकर पुलिस केस करने से तमाम लाभ भी हुए हैं-
सरकारी स्कूलों मे अनिमितताओं की सच्चाई बयां करती इस खबर का दायरा और भी बढ़ गया।
इस ख़बर से निडर ग्रामीण पत्रकार जायसवल की बॉन्डिंग हो गयी।
साबित हो गया कि जमीनी हक़ीक़त से जुड़ी पत्रकारिता से दूर  तथाकथित बड़े-बड़े पत्रकारों की खबरों से बड़ा कद गांव-देहात के स्थानीय पत्रकार की खबर का होता है।
 सिद्ध हो गया कि छोटे जिले का एक छोटा पत्रकार किस तरह अपनी खबर से तहलका मचाकर रातोंरात राष्ट्रीय ख्याति हासिल कर सकता है।
 ज़ाहिर हो गया कि खबर के स्थान पर टीवी चैनल्स की डिबेट संस्कृति में तू-तुकार करने वाली पत्रकारिता के इस बुरे दौर मे भी झूठ पर से पर्दा उठाती और छिपे हुए सच को उजागर करने वाली खबरों का दौर अभी भी ज़िन्दा हैं।
सरकारी स्कूलों मे गरीब बच्चों के भोजन की असलियत बयां करती नमक-रोटी देने वाली खबर लिखने वाले पत्रकार जायसवल पर मुकदमा दर्ज कराने वालों की घबराहट ने बहुत कुछ जाहिर कर दिया। ये एक बानगी है। तमाम सरकारी स्कूलों मे ऐसा ही हाल हो सकता है। ये भी जाहिर हो गया कि जो लोग गरीब बच्चों की रूखी-सूखी सब्जी तक का धन हड़प लेते हैं वे कहां कुछ छोड़ पाते होंगे।
इस खबर से ये भी पता चल गया कि कौन सचमुच का मीडिया संगठन है,कौन दलाली, चाटूकारिता और धन उगाही के लिए बनाये संगठन को नाजायज तौर से मीडिया संगठन का नाम देते हैं।
नाली के कीड़ों की तरह बजबजाते सैकड़ों कथित मीडिया संगठनों मे से कोई भी संगठन पत्रकार पवन जायसवाल पर मुकदमा दर्ज होने के विरुद्ध सामने नहीं आया। सोशल मीडिया पर मीडिया संगठन चलाकर वुसूली कर फट्टर(फर्जी) पत्रकारों की फौज बढ़ाने वाले सैकड़ों संगठनों मे से एक भी संगठन ने सोशल मीडिया तक पर भी जायसवाल पर मुकदमे की निंदा नहीं की।
सुखद बात ये है कि इस  मामले मे देश-प्रदेश के प्रतिष्ठित मीडिया संगठन- एडीटर्स गिल्ड, आईएफडब्ल्यूजे और उत्तर प्रदेश राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त  संवाददाता समिति ने ग्रामीण पत्रकार पवन जायसवाल को न्याय दिलाने की मांग की है।
 वास्तविक पत्रकार संगठनों ने अपने मांग पत्र मे लिखा है कि हमे अपनी लोकतांत्रिक व्यवस्था, न्यायव्यवस्था और मुख्यमंत्री के न्यायसंगत फैसलों पर  पूरा भरोसा है। पत्रकार नेताओं का कहना है कि हमें पूरा विश्वास है कि हमारी मांग जरूर पूरी होगी और पत्रकार पवन जायसवाल पर से पुलिस केस वापस लिया जायेगा।
प्रदेश के मुखिया की साफ नियत और मजबूत इरादों पर जनता का विश्वास बना हुआ है। मीडिया भी उम्मीद करती है कि सूबे के मुखिया बरसों से जमे यूपी मे भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग जरूर जीतेंगे।
ईमानदार और वास्तविक पत्रकारों ने समय समय पर ये मंशा जाहिर की है कि यदि मोदी/योगी सरकारें भष्ट्राचार के खिलाफ जंग लड़ रही हैं तो भ्रष्टाचार उजागर करने वाली खबरें लिखने वाले पत्रकारों को सहयोग मिलेगा, नाकि दुश्वारी। और यदि कोई पत्रकार का मुखौटा लगाकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है.. सोशल मीडिया पर निराधार बातों से  ब्लैकमेलिंग कर रहा है.. धन उगाही की नियत से सरकार को बदनाम कर रहा है.. अवैध वसूली कर रहा है..  दलाली कर रहा है.. या कोई भी गलत काम कर रहा है तो ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही हो। पत्रकार बिरादरी इसका स्वागत करेगी।

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