राजकुमार राव और पत्रलेखा ने अपने सफल रिश्तों के रहस्य को किया उजागर

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मुंबई, 11 फरवरी, 2019: अपने अवार्ड विनिंग मूवमेंट #ShareTheLoad (#शेयर द लोड) के जरिए वर्ष 2015 से एरियल घरों के भीतर असमानता की वास्तविकता का पता लगा रहा है। आज, एरियल ने भारत में लिंग असमानता की व्यापकता और बेटों से भार बाँटने की आवश्यकता पर चर्चा की गई। इस परिचर्चा में 100 से अधिक मम्मी ब्लॉगर्स और मीडिया की उपस्थिति रही।

इस पैनल में शामिल अभिनेता राजकुमार राव, पत्रलेखा, निर्देशक गौरी शिंदे, बीबीडीओ हेड जोसी पॉल पी एंड जी इंडिया की विपणन निदेशक सोनाली धवन ने घरों के भीतर असमानता पर सुखद बातचीत के साथ ही अपने व्यक्तिगत अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि आज के बदलते समय में ज्यादातर पुरुष पहले से कहीं ज्यादा बोझ साझा कर रहे हैं, इसके बावजूद हम समानता के आदर्श स्तर से काफी आगे चल रहे हैं।

यह पैनल एरियल की नवीनतम फिल्म-Sons#ShareTheLoad (द संस #शेयर द लोड) में भी गहराई से उतरा, जो इस दिशा में एक और प्रासंगिक सवाल उठाती है – क्या हम अपने बेटों को सिखा रहे हैं और हम अपनी बेटियों को क्या सिखा रहे हैं?– यह फिल्म आज की पीढ़ी की माताओं से बराबरी की पीढ़ी को बढ़ाने का आग्रह करती है। #शेयर द लोड के रिलीज़ किए गए नए संस्करण के जरिए, कई माता-पिता, नवविवाहित जोड़ों, प्रभावितों के साथ प्रतिध्वनित हुआ है और इसे देश भर में दर्शकों से जबरदस्त समर्थन और प्रशंसा मिल चुकी है। बता दें कि फिल्म 24 जनवरी, 2019 को रिलीज़ हुई हैं।

पैनलिस्टों ने इस असमानता के कारणों पर चर्चा करते हुए बच्चों की परवरिश के बारे में बात की। समान प्रगतिशील परिवारों में भी, हमारे बेटे और बेटियों की परवरिश के तरीके में अक्सर अंतर होता है। काफी पहले से बेटियों को मजबूत, स्वतंत्र और सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए आश्वस्त करने की बात कही जा रही है। लेकिन शादी होते ही उनपर घर का बोझ डाल दिया जाता है। यह उन पर असंतुलित अपेक्षाएं और बोझ डालता है, जो उनके पेशेवर विकास के रास्ते में आ सकता है। अब जब समाज बदल रहा है, और हमेशा बेटों को अलग तरीके से आगे बढ़ाने को लेकर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता है।

उदाहरण के लिए, उन्हें कपड़े धोने या खाना पकाने जैसे कुछ नए जीवन कौशल सिखाने चाहिए, ताकि उनके भविष्य को बेहतर बनाने में मदद मिल सके और उन्हें घरेलू समानता का पैरोकार बनाया जा सके। अगर उन्हें #शेयर द लोड नहीं सीखाया जाता है, तो आज के बेटे कल के पति तो बन जाते हैं, लेकिन वे शायद समान साझेदार बनने के लिए तैयार न हों।

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