नई दिल्ली। छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा कि केवल प्रदर्शन या आंदोलन होने भर से पुलिस को लाठीचार्ज या बल प्रयोग का अधिकार नहीं मिल जाता।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगर पुलिस पर अत्यधिक या अंधाधुंध बल प्रयोग के आरोप लगते हैं तो उनकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है।
क्या है पूरा मामला?
- विभिन्न राज्यों में छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस मारपीट के मामले सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।
- बिहार के सिवान में प्रदर्शनकारियों पर AK-47 राइफलों के इस्तेमाल का गंभीर आरोप लगा।
- जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर भी याचिका दायर की गई।
याचिकाकर्ता की मांग
याचिकाकर्ता प्रिया मिश्रा की ओर से अदालत से अनुरोध किया गया कि:
- सभी सीसीटीवी फुटेज, बॉडी कैमरा, ड्रोन वीडियो, मोबाइल रिकॉर्डिंग और पुलिस वायरलेस आदि साक्ष्यों को तुरंत सुरक्षित रखा जाए।
- यदि कोई पुलिस अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच शुरू की जाए।
सुप्रीम कोर्ट का संदेश साफ है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन पुलिस को बल प्रयोग में संयम बरतना होगा। अब इन मामलों में जांच के आदेश की उम्मीद बढ़ गई है। फिलहाल यह लोकतंत्र में प्रदर्शन का अधिकार सुरक्षित रहेगा!







