लखनऊ, 13 फरवरी 2019: देश में मंगलवार को यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य जागरूकता दिवस मनाया गया।इस अवसर पर शहर के विभिन्न इलाकों में लगभग 2 दर्जन किशोर/ किशोरियों से बात की गयी। आज के किशोर/किशोरियाँ यौन स्वास्थय पर खुलकर बात कर रहे हैं। उन्हें यौन स्वास्थ्य के बारे में जानकारी स्कूल, कॉलेज, नेट, सेमिनार व किताबों के माध्यम से मिली है। किशोरियाँ मासिक धर्म पर अनजान व्यक्ति से बात करने में हिचकती नहीं हैं, खुलकर बात करती हैं। उन्हें इस बात कि जानकारी है कि मासिक धर्म के दौरान पौष्टिक भोजन का सेवन करना चाहिए। इन दिनों के दौरान जो भ्रांतियाँ हैं, वे इनको अर्थहीन मानती हैं और परिवार वालों के द्वारा इन भ्रांतियों को मानने के लिए उन पर दबाव भी नहीं बनाया जाता है।
युवा किशोर भी अपनी बातों को लेकर खुलकर सामने आए। मासिक धर्म पर भी उन्होने बात की। वे मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतियों के बारे में जागरूक हैं। मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता पर भी उन्होने विचार रखे कि यह जरूरी है क्यूंकि इससे संक्रमण फैलता है। 19 वर्षीय किशोर ने यौन स्वास्थ्य के संबंध में बताया कि शारीरिक संबंध बनाने के दौरान स्वच्छता जरूरी है क्यूँकि इससे यौन संचारित बीमारियां फैलती हैं।

17 वर्षीय किशोरी ने बताया कि मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बहुत ही जरूरी है। उसने कहा कि वह मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतियों को बिलकुल भी नहीं मानती और इन भ्रांतियों को मानने के लिए उनके परिवार द्वारा उनके ऊपर कोई दबाव भी नहीं बनाया जाता है।
क्या है राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यकम:
किशोरावस्था (10-19) एक अद्वितीय अवस्था है, जिसमें लोग कुछ स्वास्थय समस्याओं के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं। यह एक ऐसा समय भी होता है जब मनुष्य का महत्वपूर्ण व्यवहार एक आकार लेता है। जिसका प्रभाव भविष्य में उसके स्वास्थय पर पड़ता है।
दुनिया में किशोरों की आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा 253 मिलियन भारत में है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने भारत की आबादी के 21 प्रतिशत,को स्वास्थ्य और विकास आवश्यकताओं को संबोधित करने के उद्देश्य के साथ 7 जनवरी 2014 को राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यकम (आरकेएसके) की शुरुआत की।
राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यकम (आरकेएसके) के चार मुख्य घटक हैं:
- एएफ़एचएस अडोलसेंट फ्रंडली हेल्थ सर्विसेज
- पीयर एजुकेशन
- डब्लूआईएफ़एस अर्थात वीकली आयरन फोलिक एसिड सप्लिमेंटेशन
- एमएचएस अर्थात किशोरी स्वास्थय कार्यक्रम
- एएफ़एचएस अडोलसेंट फ्रंडली हेल्थ सर्विसेजइसके तहत जिलों में अडोलसेंट फ्रंडली हेल्थ क्लिनिक चल रहे हैं। उच्च प्राथमिकता वाले 25 जिलों में ब्लाक स्तर पर भी अडोलसेंट फ्रंडली हेल्थ क्लिनिक चल रहे हैं। इन क्लिनिक्स पर प्रशिक्षित परामर्शदाता रखे गए हैं।
पीयर एजुकेशन:
यह कार्यक्रम उच्च प्राथमिकता वाले 25 जिलों में 50% ब्लाक के 2 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के अंडर में 6 उप केन्द्रों के हिसाब से 147 ब्लॉक्स पर चल रहा है इसके अंतर्गत एक आशा गाँव में 4 पीयर एजुकेटर्स का चुनाव करती है। जिनकी आयु 14-19 वर्ष के बीच होती है। 4 पीयर एजुकेटर्स में 2 स्कूल जाने वाले व 2 स्कूल नहीं जाने वाले बच्चे होते हैं। जिनमें एक लड़का व एक लड़की का होना आवश्यक है। उच्च प्राथमिकता वाले 25 जिलों में कुल 34,880 पीयर एजुकेटर्स चुने गए हैं। जिनको प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ये पीयर एजुकेटर्स पैरोल पर नहीं हैं। ये नॉन मोनिटरिंग, नॉन पेबल व नॉन इंसेंटिव हैं। इन्हें एक किट दी गयी है। इस किट में गेम कार्ड, एक्टिविटी बुक, FAQ बुक व डायरी होती है।
डायरी में पीयर एजुकेटर्स अपनी एक्टिविटीज व रिपोर्ट को लिखेंगे। पीयर एजुकेटर्स माह में एक बार अपने पीयर ग्रुप में किट के द्वारा एक्टिविटीज करेंगे व मुद्दों को पहचानकर उन्हें क्लिनिक पर संदर्भित करेंगे। ये सभी गतिविधियाँ एएनएम की देख रेख में होंगी वे उन्हें ही वे रिपोर्ट करेंगे इन सभी के लिए आशा व एएनएम को प्रशिक्षित किया गया है। उच्चप्राथमिकता वाले 25 जिलों में आशा व एएनएम के अलावा ब्लाक स्तर पर एक महिला व एक पुरुष चिकित्साधिकारी को भी प्रशिक्षित किया गया है।
डब्लूआईएफ़एस अर्थात वीकली आयरन फोलिक एसिड सप्लिमेंटेशन:
सभी 75 जिलों में 10-19 साल के बच्चों को स्कूल व आंगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से आयरन की नीली गोली दी जाती है | जिसमें 100 mg आयरन व 50 mg फोलिक एसिड होता है। यह कार्यक्रम आईसीडीएस व शिक्षा विभाग के सहयोग से चल रहा है। 1-5 वर्ष तक के बच्चों को आयरन की गुलाबी गोली दी जाती है। जिसमें 45 mg आयरन होता है। यह वितरण नेशनल आयरन प्लस इनिशिएटिव प्रोग्राम के अंतर्गत होता है।
इसके अलावा साल में दो बार अभियान चलाकर 1-19 वर्ष तक के बच्चों को पेट में कीड़े मारने की दवा (albendazole) स्कूलों व आंगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से खिलाई जाती है।
एमएचएस (मेन्स्त्रुअल हायजीन स्कीम ) अर्थात किशोरी सुरक्षा कार्यक्रम:
- 13-19 वर्ष तक की स्कूल जाने वाली सभी किशोरियों को अपर प्राइमरी स्कूल में सेनेटरी नैपकिन्स का वितरण किया जाता है।
- इसके अलावा साथिया एप भी लॉंच किया गया है जिसके अंतर्गत किशोर/किशोरी यौन व प्रजनन स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।







