गंगा किनारे लगेंगे पाकड़ और बरगद, गांवों में वृक्ष अभिभावकों की होगी नियुक्ति, हर वर्ष पांच करोड़ ज्यादा होगा पौधरोपण

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  • अगले दो सालों के पौधरोपण का भी लक्ष्य निर्धारित, हर वर्ष पांच करोड़ ज्यादा होगा पौधरोपण
  • 2021-22 में होगा 30 करोड़ पौधरोपण व 2022-23 में किया जाएगा 35 करोड़ का लक्ष्य, शासन ने विभागवार कर दिया है पौधरोपण लक्ष्य का बंटवारा

 

लखनऊ, 28 मई 2020: उत्तर प्रदेश सरकार इस वर्ष के साथ ही वर्ष 2021-22 और 2022-23 का भी लक्ष्य बना चुकी है। इसके साथ आगामी दो वर्षों का विभागवार लक्ष्य का बटवारा कर दिया गया है। इसके अनुसार अगले साल यूपी में 30 करोड़ पौध रोपण होगा अर्थात वर्तमान के वर्ष के 25 करोड़ के लक्ष्य से पांच करोड़ ज्यादा। 2022-23 में वन विभाग इसे बढ़ाकर 35 करोड़ कर देगा। इसके साथ ही वन विभाग ने माइक्रो प्लान बनाकर आगे का कार्य करने में भी जुट गया है।

मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन के पत्रांक संख्या 881/81-5 के अनुसार वन एवं वन्य जीव विभाग 2021-22 में सर्वाधिक 1080 लाख व 2022-23 में 1260 लाख पौधेरोपण करेगा। इसी की शाखा पर्यावरण विभाग को क्रमश: 120 व 140 लाख पौधरोपण का लक्ष्य दिया गया है। इसके बाद 2021-22 व 2022-23 में भी ग्राम्य विकास विभाग को सर्वाधिक पौधरोपण का लक्ष्य मिला है। उसे क्रमश: 1056 लाख व 1232 लाख पौध रोपण करना है। वहीं कृषि विभाग को इस वर्ष जहां 168 लाख का लक्ष्य है। वहीं 2021-22 व 2022-23 में क्रमश: 201.6 लाख व 235.2 लाख पौधरोपण का लक्ष्य दिया गया है। उद्यान विभाग को इस वर्ष 110.80 लाख, वहीं 2021-22 व 2022-23 में क्रमश: 132.96 व 155.12 लाख पौधरोपण का लक्ष्य है। राजस्व व पंचायतीराज विभाग को 2020-21, 2021-22 व 2022-23 में क्रमश: बराबर-बराबर 100, 120 व 140 लाख पौधरोपण का लक्ष्य दिया गया है।

कुल 26 विभागों को मिली है पौधरोपण की जिम्मेदारी:

प्रदेश के कुल 26 विभागों को पौधरोपण की जिम्मेदारी दी गयी है। नगर विकास विभाग, रेशम विभाग, लोक निर्माण विभाग, जलशक्ति विभाग, स्वास्थ्य विभाग, उद्योग विभाग, पशु पालन विभाग, आवास विकास विभाग, गृह विभाग आदि को 35 लाख पौध रोपण से कम का लक्ष्य है। इसके लिए शासन की तरफ से गाइड लाइन भी जारी किया गया है। इसके साथ ही महिलाओं की इच्छा अनुसार भी पौधरोपण को स्थान देने के लिए निर्देशित किया गया है।

वृक्ष अभिभावक करेगा देखभाल, मनरेगा के अनुरूप मिलेगा मानदेय:

ग्राम पंचायत स्तर पर गठित जैव विविधता, प्रबंध, नियोजन एवं विकास समिति द्वारा पौधरोपण कार्यक्रम पर जोर दिया गया है। शासनादेश के अनुसार पौधरोपण के क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों व ग्रामीणों के मध्य संवाद स्थापित कर रोपण कार्य पूरा कराने व समस्त सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक वृक्ष अभिभावक मनोनित किया जाएगा। इन्हें भी मनरेगा योजना अंतर्गत निर्धारित मानकों के अनुरूप भुगतान किया जाएगा। वृक्ष अभिभावक ग्राम पंचायतों में पौधरोपण के बाद उनकी देखरेख करने के साथ ही उसका पूरा ब्योरा रखेगा।

गंगा किनारे लगेंगे पाकड़, बरगद जैसे छायादार पौधे:

प्रदेश में बिजनौर से बलिया तक बाढ़ से होने वाले नुकसान को देखते हुए शासन ने गंगा नदी के दोनों तटों पर बड़े-बड़े तालाब तैयार कर उसके किनारे पौध रोपण करने की तैयारी कर रहा है। ये तालाब मनरेगा या अन्य योजनाओं के अंतर्गत तैयार किये जा रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इस वर्ष गंगा बेसिन में विभाग को पीपल, बरगद, पाकड़ जैसे पौधों को लगाने पर विशेष जोर देने के लिए निर्देशित किया गया है। वहीं राष्ट्रीय व राज्यमार्ग के किनारे भी छायादार पौधों को लगाने के लिए निर्देशित किया गया है।

एक मार्ग- एक प्रजाति के अंतर्गत लगेंगे शोभाकार पौधे:

शहरों में पौधरोपण के लिए उपलब्ध भूमि के साथ-साथ सड़कों के किनारे एक मार्ग-एक प्रजाति के आधार पर पौधरोपण किये जाने की तैयारी है। इससे मार्ग की शोभा बढ़ेगी। इस संबंध में अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, योजना एवं कृषि वानिकी डाक्टर प्रभाकर दूबे का कहना है कि विभाग का जोर पौधरोपण के साथ ही उससे पर्यावरणीय लाभ संग फल व खुबशुरती पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इससे आमजन का भी आकर्षण बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि एक मार्ग-एक प्रजाति के आधार पर फलदार अथवा शोभाकार पौधों को लगाने की योजना है।

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