रस्सी जल गयी पर बल नहीं गया, यह कहावत आज पाक पर बिलकुल फिट बैठती है। एक ओर जहां सारी दुनिया कोरोना वायरस का प्रकोप झेलने के लिए पूरी तरह से मजबूर है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान अपनी पुरानी हरकत को जारी रखे हुए है। रविवार को उसने उत्तरी कश्मीर के उड़ी से केरन तक रिहायशी क्षेत्रों में भारी गोलीबारी की। इसमें आठ वर्षीय बच्चे सहित तीन लोगों की मौत हो गई। इसके जवाब में भारतीय सेना की कार्रवाई में सरहद पार केल इलाके में स्थित पाक सेना के ब्रिगेड मुख्यालय, स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप यूनिट मुख्यालय और आतंकियों के दो लांचिंग पैड समेत आठ इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा।
भारत की जवाबी कार्रवाई में तो ये होना ही था क्योंकि हमारे सुरक्षा जवान किसी भी कीमत पर मुंहतोड़ जवाब देने का कदम ही उठाते हैं और इस बात को पाक भी जानता है लेकिन ये भी एक सच है कि अपनी अंदरूनी समस्याओं की ओर से अपने देश के लोगों का ध्यान हटाने के लिए वह इस तरह की हरकतें करता रहता है।

इससे एक बात यह भी स्पष्ट होती है भारत द्वारा कई कदम उठाये जाने के बाद भी पाकिस्तान अभी भी कश्मीर को लेकर उल्टी-सीधी कार्रवाइयां करने से बाज नहीं आ रहा है। उस कश्मीर में जहां हालात अब तेजी के साथ सामान्य होते जा रहे हैं। जेल गए नेताओं व अन्य लोगों को रिहा किया जा रहा है, विकास कार्यों का खाका नए सिरे से बन रहा है, युवाओं को रोजगार के जरिए आगे बढ़ने के मौके मुहय्या कराए जा रहे हैं।
सामान्य होती यही परिस्थिति पाकिस्तान के जी का सबसे बड़ा जंजाल है। उसकी तमन्ना तो कश्मीर को सदा एक समस्या के रूप में उठाते रहने की है और इसके लिए वह संयुक्त राष्ट्र संघ तक में भी तमाम बेइज्जती झेलने के बाद भी मुद्दे को उठाता रहता है। यही नीति है कि मौका लगते ही वह कश्मीर में हमले जैसी कार्रवाई को भी अंजाम देता रहता है। यही काम उसके इस बार भी किया है। वहीं यह भी सही है कि भारतीय सेना वहां की स्थिति को लेकर किसी भ्रम में नहीं आती और सधे ढंग से सारे हालात को डील करती है।







