देवरहा बाबा की उपस्थिति में हुई थी अयोध्या में शिलान्यास की घोषणा, पूरा देश हो गया राममय

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राजीव गांधी ने उस वर्ष फैजाबाद से शुरू किया था चुनावी अभियान, रामराज्य का किया था जिक्र

सन 1989 जनवरी का महीना था। प्रयाग कुंभ मेला में संत समाज का सम्मेलन देवरहा बाबा की उपस्थिति में हुआ। उस समय देवरहा बाबा की उपस्थिति में संतों ने अयोध्या में श्री रामजन्मभूमि पर शिलान्यास की घोषणा कर दी। इसके बाद विहिप के अशोक सिंहल ने गांव-गांव से ईंट पूजकर अयोध्या तक ले जाने का निर्णय लिया। देशभर में पौने तीन लाख से ‘शिला’ या ईंटें जुटाने का अभियान चलाया। गांव-गांव में ईंटे पूजीं गयीं। माहौल ऐसा बना कि पूरा देश राम मय हो गया। इन ईंटों पर ‘श्रीराम’ लिखा होता था और ये केसरिया कपड़ों से लिपटे होते थे। इसके बाद तमाम झंझावतों के बीच नौ नवम्बर को बिहार के अनुसूचित जाति से आने वाले कामेश्वर चौपाल के हाथों से अयोध्या में शिलान्यास करवा दिया गया। इस शिलान्यास के लिए लखनऊ की बैठक की भी रही अहम भूमिका रही।

जब कुंभ मेले में शिलान्यास की घोषणा कर दी गयी तो तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने किसी तरह इसे टालने की रणनीति पर काम करना शुरू किया। इसके लिए वे देवरहा बाबा की शरण में भी गये। इस संबंध में उस समय आरएसएस के प्रचारक रहे छोटे लाल जी का कहना है कि कांग्रेस दो राहे पर चलना चाहती थी। वह हिन्दुओं को भी नाराज नहीं करना चाहते और मुसलमानों को भी अपने पक्ष में रखना चाहते थे।

बढ़ते तनाव के बीच राजीव गांधी सरकार के गृहमंत्री बूटा सिंह और श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के महंत अवेद्यनाथ, दिगंबर अखाड़े के महंत रामचंद्र परमहंस और विहिप नेता अशोक सिंहल की बैठक आठ नवम्बर को लखनऊ में हुई। चूकि अगले ही दिन अयोध्या में शिलान्यास होना था। गांव-गांव से पूजी गयी शिलाएं अयोध्या पहुच चुकी थी। कांग्रेस को डर था कि कहीं वहां बवाल न हो जाय। इस कारण वह किसी भी तरह से अब शांति की अपेक्षा कर रही थी। इस कारण बैठक में निर्णय हुआ कि शिलान्यास आभासी होगा और नौ नवम्बर को अयोध्या में कामेश्वर चौपाल के हाथों शिलान्यास की प्रक्रिया पूरी करा दी गयी।

उसी समय चुनाव का भी वक्त था। कांग्रेस हिन्दुओं की भावनाओं को भी भुनाने में जुटी हुई थी। यह भी नहीं चाहती थी कि दूसरे वर्ग के लोग नाराज हो जाय। भाजपा के मात्र दो सांसद ही थे। इस कारण उसके पास खोने के लिए कुछ नहीं था। वह सिर्फ अपनी सीटें बढ़ने की उम्मीद लगाये बैठी थी। आरएसएस के प्रचारक छोटे जी कहते हैं कि इसी माहौल में अक्‍टूबर, 1989 में राजीव गांधी ने फैजाबाद से अपने चुनावी अभियान की शुरुआत की। अपने भाषण के दौरान उन्‍होंने ‘रामराज्य’ का जिक्र किया।

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