मामला मुख्य सचिव से बदसलूकी का
नई दिल्ली, 24 फरवरी। दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश पर कथित रूप से हमला करने के मामले में गिरफ्तार किये गये आप के विधायकों अमानतुल्ला खां और प्रकाश जारवाल की जमानत अर्जियों को शुक्रवार को दिल्ली की एक अदालत ने खारिज कर दिया। हालांकि मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट शैफाली बरनाला टंडन ने पुलिस को उन्हें हिरासत में लेने की अनुमति नहीं दी और कहा कि उनसे हिरासत में पूछताछ का कोई नया आधार नहीं है। गौरतलब है कि अदालत ने गुरुवार को विधायकों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था।

19 फरवरी को मुख्य सचिव के साथ की थी बदसलूकी
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर 19 फरवरी की रात को बैठक के दौरान दिल्ली के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी पर कथित हमले के सिलसिले में दोनों विधायकों को गिरफ्तार किया गया था। देवली से विधायक जारवाल को मंगलवार की रात को गिरफ्तार किया गया था, वहीं अमानतुल्ला को बुधवार शाम को हिरासत में लिया गया।
जितेंद्र सिंह से मिला आईएएस अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल
मुख्य सचिव अंशु प्रकाश पर कथित हमले के बाद दिल्ली सरकार के अंतर्गत काम करने वाले आईएएस अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह से मिला और अपनी शिकायतें उनके सामने रखी. बैठक के बाद सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि हमने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को सुना. हमने उनकी ओर से उठायी गयी शिकायतों और चिंताओं का संज्ञान लिया और आवश्यक कदम उठाये जायेंगे. उन्होंने कहा कि अधिकारी कार्मिक मंत्रालय के समक्ष अपनी शिकायत आधिकारिक तौर पर दर्ज कराना चाहते थे. कार्मिक मंत्रालय भारतीय प्रशासनिक सेवा के कैडरों का नियंत्रण करने वाला प्राधिकार है।
हमें अपने अधिकारियों को बेहतर काम करने देना चाहिये : राज्य मंत्री सिंह
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री सिंह ने कहा कि अधिकारियों ने एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उनकी कुछ मांगे हैं और इस पर आवश्यक कदम उठाया जायेगा. उन्होंने कहा कि हम सभी का समान लक्ष्य है कि हमें अपने अधिकारियों को बेहतर काम करने देना चाहिये और राष्ट्रहित में उनकी संभावनाओं के बेहतर इस्तेमाल के लिए काम करने देना चाहिए।
कानून के मुताबिक कदम उठाया जायेगा : मनीषा सक्सेना
बैठक के बाद दिल्ली आईएएस अधिकारी एसोसिएशन की सचिव मनीषा सक्सेना ने कहा कि मंत्री ने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है. सक्सेना ने कहा कि उन्होंने कहा कि वह घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं और कानून के मुताबिक कदम उठाया जायेगा. उन्होंने कहा कि नौकरशाहों के सम्मान को बहाल रखने और इसकी रक्षा के लिए वे सभी कदम उठायेंगे। यह आरोप कि अधिकारी कथित रूप से भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि हम सभी सरकारी कर्मचारी हैं. हम किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं. जो घटनाक्रम हुआ है, उसपर हम आक्रोशित हैं. अपनी शिकायतों को रखना हमारा संवैधानिक अधिकार है।
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