दिलीप अग्निहोत्री
लखनऊ,28 जुलाई 2019: आजकल पुष्पगुच्छ के द्वारा किसी को सम्मानित करने का चलन बढा है। यहां तक कि लोग सामाजिक उत्सवों में भी पुष्पगुच्छ से ही व्यवहार का निर्वाह करने लगे है। जबकि यह किसी के लिए यादगार सौगात नहीं होती। फूल जल्दी ही कुमल्हा जाते है, फिर उन्हें कचरे में फेंक दिया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वागत के समय केवल एक फूल देने का चलन शुरू किया।
आनन्दी बेन गुजरात में उन्हीं के मंत्रिमंडल में थी। जाहिर है कि नरेंद्र मोदी की यही कार्यशैली रही होगी। उनके सभी सहयोगियों को इससे प्रेरणा मिली होगी। इस बात का प्रमाण आनन्दी बेन ने लखनऊ पहुंचने से पहले ही दे दिया। मनोनीत राज्यपाल आनंदीबेन ने नवाचार के तौर पर कहा है कि भेंट के अवसर पर पुष्प गुच्छ आदि के बजाय पुस्तकें एवं खाद्य वस्तुएं दी जानी चाहिए जिन्हें किसी जरूरतमंद को दिया जा सके। जो किसी के उपयोग में आ सके।
आनंदीबेन पटेल का मानना है कि पुष्प स्वीकार कर निश्चय ही सुखद अनुभूति होती है पर फूल के खराब होने के साथ पैसे भी बेकार हो जाते हैं। उसकी अपेक्षा यदि कोई पुस्तक या खाद्य वस्तु आदि हो तो वह जरूरतमंद बच्चों को भी भेजी जा सकती है। इससे पूर्व भी वे राजभवन मध्य प्रदेश में खाद्य वस्तुओं एवं किताबों को अनाथालय, वृद्धाश्रम और मलिन बस्तियों के बच्चों को उपहार स्वरूप भेजती रही हैं।






