डॉ दिलीप अग्निहोत्री
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक का कार्यकाल विशिष्ट मिसाल के रूप में सदैव याद किया जाएगा। यह संविधान के विद्यार्थियों को राज्यपाल के अधिकार व कर्तव्य को समझने में सहायक होगा। राम नाईक ने इस प्रचलित अवधारणा पीछे छोड़ दिया है कि राज्यपाल का पद आराम के लिए है। वह पांच वर्षों तक लगातार सक्रिय रहे। उल्लेखनीय यह कि उनकी सक्रियता निर्वाचित सरकार के लिए बाधक नहीं बनी, बल्कि उसे सकारात्मक सहयोग और मार्गदर्शन मिला। पिछली राज्य सरकार ने उनके सुझावों का समुचित लाभ नहीं उठाया। इसका उसे नुकसान उठाना पड़ा, जबकि योगी आदित्यनाथ ने राम नाईक के सुझावों को गंभीरता से लिया, उनपर अमल किया। इसका प्रदेश और सरकार दोनों को लाभ हुआ।राम नाईक के कार्यकाल में अनेक दौरान बनीं। राजभवन के दरवाजे आमजन के लिए भी खुलने लगे। राम नाईक ने अपने को महामहिम कहने पर रोक लगाई। इसी मानसिकता के अनुरूप बदलाव हुए। चरैवेति चरैवेति उनकी जीवनशैली और कार्यशैली में शामिल है। राज्यपाल पद का दायित्व निर्वाह भी इसी मानसिकता के अनुरूप था।

उनके सुझाव से ही उत्तर प्रदेश ने पहली बार अपना स्थापना दिवस मनाया। वैसे यह सुझाव उन्होंने पिछली सपा सरकार के दौरान दिया था। लेकिन उसने इस सलाह को महत्व नहीं दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर अमल किया। इसे प्रदेश के आर्थिक और सांस्कृतिक विकास से जोड़ दिया। राजभवन में महाराष्ट्र दिवस, योग दिवस के भव्य आयोजन होने लगे।
लोकमान्य तिलक ने लखनऊ में ही ‘स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है’ का ऐतिहासिक नारा दिया था। राम नाईक का ध्यान इसके शताब्दी वर्ष पर गया। इसे भव्यता के साथ मनाने का सुझाव भी राम नाईक ने दिया था। योगी आदित्यनाथ ने इस पर अमल किया। लखनऊ में एक पूर्व मुख्यमंत्री के आवास में तोड़-फोड़ का संज्ञान लेकर राम नाईक ने सरकार को जांच कराने हेतु लिखा था। वह चाहते थे कि सरकारी संपत्ति को नुकसान न पहुंचाने का सन्देश भी जाये। राज्यपाल ने विधानपरिषद के लिए मनोनीत होने वालों सदस्यों के संदर्भ में संविधान में उल्लखित योग्यता को महत्व दिया था। इसी प्रकार लोकायुक्त की नियुक्ति में उन्होंने प्रक्रिया का पालन किया था। इसमें यह तय हुआ कि उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश के विचार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
उच्च शिक्षा में सुधार के लिए राम नाईक ने अनेक प्रयास किये। सभी विश्वविद्यालयों में सत्र नियमित किये गए। परीक्षा और पढ़ाई की गुणवत्ता का कायम की गई। प्रत्येक विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह आयोजित होने लगे। कुलपतियों के वार्षिक सम्मेलनों की शुरुआत भी राम नाईक ने की। आमजन से मिलना उनके सहज स्वभाव में शामिल है। चरैवेति चरैवेति में वह लिखते है कि आमजन के बीच रहना उन्हें अच्छा लगता है। लोकल ट्रेन आज भी उनकी मनपसंद सवारी है, क्योंकि उसमें एक साथ बड़ी संख्या में लोगों से मुलाकात हो जाती है। वह तीन बार विधायक और पांच बार लोकसभा सदस्य रहे। इस रूप में वह प्रतिवर्ष अपना कार्यवृत्त जारी करते थे। कुछ अवधि ऐसी भी थी जब वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। फिर भी समाजसेवा में उनकी सक्रियता कम नहीं हुई थी। इस रूप में भी वह आमजन के बीच अपना कार्यवृत्त रखते थे। राज्यपाल के रूप में उन्होंने कार्यवृत्त जारी करने की अपनी परम्परा जारी रखी। पन्द्रह जुलाई दो हजार उन्नीस को उन्होंने अपना पांचवा कार्यवृत्त राजभवन में राम नाईक जारी किया।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने राम नाईक के विषय में भावपूर्ण विचार प्रस्तुत किये है। चरैवेति चरैवेति के ब्रेल लिपि संस्करण की प्रस्तावना में उन्होंन लिखा कि राम नाईक चरैवेति चरैवेति श्री राम नाईक का जीवन मंत्र है। वह सकारात्मक नजरिये से जीवन में जनसेवा के मार्ग पर निरंतर चलने वाले है। मोहन भागवत लिखते है कि आयु और अनुभव दोनों में में वह मेरे ज्येष्ठ है। श्री राम नाईक जी हम हम स्वयंसेवकों के लिये एक उदाहरण स्वरूप स्वयं सेवक है। लंबा व यशस्वी राजनीतिक जीवन बिताने के बाद भी उनका चित्त राजनीति के मनमोहक परन्तु कुटिल रंगों से स्वयं को दूर रखता रहा है।
देशभक्ति व समर्पण के विशुद्ध भावजगत में ही मनोव्यापर कि जड़ें पक्की है। उनके साथ मेरा जितना सम्पर्क आया उस के आधार पर मैं कह सकता हूँ। व्यक्तिगत और राष्ट्रीय शील की इस दृढ़ता की साधना सब परिस्थितियों में सब प्रकार के कार्यक्षेत्रों में, किसे की जा सकती है, यह उनके जीवन से हम समझ सकते है। जीवन के कर्तव्य तथा जीवन के आनंद सौंदर्य को महादुर्ध्रर व्याधि की छाया में रह कर कर भी कुम्हलाने न देते हुए, धैर्यपूर्वक उस व्याधि को ही परास्त करना कैसे संभव किया जा सकता है, यह जीविषा व विजिगीशा का संयुक्त पाठ भी उनकी जीवन गाथा में पढ़ा जा सकता है। यश तथा कीर्ति , प्रतिष्ठा के सोपनमार्ग पर चलते हुए भी, अभावग्रस्त व पीड़ित बांधवों की पीर पराई जानकर उनकी सेवा के लिए दौड़ भाग भी, अकृतिम आत्मीयता से तथा निरहंकार भाव से कैसे की जा सकती है, यह भी उनके इस जीवन कथा में हम देख सकते है। सीख सकते है।
राम नाईक रिपोर्ट कार्ड जारी करने की अपनी परम्परा का पालन किया। राज्यपाल के रूप में पांचवा रिपोर्ट कार्ड जारी किया। आत्मकथन में वह लिखते है कि उत्तर प्रदेश की जनता का असीमित प्यार व सहयोग मिला। कार्यकाल के प्रथम दिवस से ही उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने का संकल्प लिया था, आज अनुभव कर रहा हूँ कि उत्तर प्रदेश देश में सर्वोत्तम प्रदेश बनने की राह पर अग्रसर है। और उसमें मेरा भी सेतुबंध के समय जैसा गिलहरी का अपना योगदान था, वैसा ही मैने भी करने का प्रयास किया है।
विगत पांच वर्षों में मेरा यह प्रयास रहा है कि राजभवन के दरवाजे सभी के लिए खुले रहें, और खुले भी रहे। जिन लोगों ने भेंट चाही यथासंभव उनको समय दिया, तथा जिनके प्रत्यावेदन प्राप्त हुए उसके लिए प्रयास किया गया कि उनको समाधान मिले। मेरी कोशिश रही है कि राज्यपाल रहते हुए प्रदेश के सभी राजनीतिक दलों के महानुभावों से रिश्ते सौहार्दपूर्ण हों। मैने यह भी प्रयास किया कि हर वर्ग, धर्म और सम्प्रदाय के लोगों को राजभवन से जोड़ा जाए, और मुझे लगता है कि मै काफी सफल भी रहा।
राम नाईक को राज्यपाल के रूप में किये गए कुछ कार्यो का विशेष रूप से आंनद है। उत्तर प्रदेश के स्थापना दिवस का आयोजन, कुष्टपीडितों के निर्वाह हेतु भत्ता तीन सौ रुपये से बढा कर पच्चीस सौ रुपये करने, तीन हजार सात सौ इक्यानबे कुष्ठ पीड़ितों को मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रमीण के अंतर्गत छियालीस करोड़ रुपये की लागत से उन्हें पक्के आवास देने का निर्णय राज्य सरकार ने उनके अनुरोध पर किया, स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार नारे की शताब्दी का आयोजन, भीमराव राम जी आम्बेडकर नाम को इस सही रूप में लिखना, सर्वाधिक मतदान वाले बूथ कर्मियों व ग्राम प्रधान का सम्मान, पदम् पुरष्कार प्राप्त लोगो का सम्मान, इलाहाबाद का प्रयागराज नाम, कुम्भ मेले का अभूतपूर्व आयोजन आदि राम नाईक को सन्तोष प्रदान करने वाले विषय है।
राम नाईक ने राजभवन में तीस हजार दो सौ पच्चीस लोगों से मुलाकात की। दो लाख से अधिक पत्र उन्हें प्राप्त हुए। करीब एक हजार कार्यकर्मों में वह शामिल हुए। एक सौ उन्नीस दीक्षांत समारोहों में वह गए। राज्यपाल को सौ अवकाश देय होते है। राम नाईक ने इनके सापेक्ष मात्र बाइस अवकाश लिये। राजभवन से करीब दो हजार तीन सौ प्रेस विज्ञप्ति जारी की गईं।
राम नाईक द्वारा जारी रिपोर्ड कार्ड के कई अध्याय है। विधायी ,संवैधानिक उर विधिक कार्य्, कुलाधिपति के रूप में कार्य, प्रशासनिक मामले, राजभवन में कार्यक्रम,राजधानी लखनऊ में श्री राजपाल,उत्तर प्रदेश में श्री राज्यपाल,उत्तर प्रदेश से बाहर श्री राज्यपाल,स्व अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि, कुम्भ दी हजार उन्नीस, राज्यपालों की समिति की रिपोर्ट,उत्तर प्रदेश दिवस,गीत रामायण, पुस्तक चरैवेति चरैवेति केसंस्करण,मतदान महादान, महत्वपूर्ण प्रयास,राजभवन परिवार के अभिभावक के रूप में,आभार, श्री राम नाईक की दृष्टि में अटल, जार्ज फर्नांडीज तुमको न भूल पाएंगे-राम नाईक अध्याय में सारगर्भित जानकारी दी गई है।







