अपने-अपने पत्थर बाजों पर इनायत 

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पत्थरबाज सुमित की मौत का मुआवजा देने वाली योगी सरकार सवालों के घेरे में
नवेद शिकोह
लखनऊ, 07 दिसम्बर 2018: तो क्या पत्थरबाजों की पत्थरबाजी सियासत के संरक्षण में होती है! कोई सरकार कश्मीर के पत्थर बाजों को लेकर नर्म है तो कोई सरकार यूपी के पत्थर बाजों का हौसला बढ़ा रही है। कश्मीर में सैनिकों पर पत्थर बरसाये जा रहे हैं तो उत्तर प्रदेश में पुलिस पत्थर और गोलियां खा रही है।
देश के चंद सिरफिरे नागरिक उन सैनिक और पुलिसकर्मियों की जान के दुश्मन बन गये हैं जो नागरिकों की रक्षा-सुरक्षा का फर्ज निभाते हैं। इस दुर्भाग्य की जिम्मेदार वो राजनीतिक दल हैं जो किसी भी अपराध को धर्म के चश्में से देखकर कही नर्म तो कहीं सख्त हो जाते हैं। कांगेस और कश्मीर के क्षेत्रीय दल यदि भारतीय सैनिकों पर पत्थरबाजी करने वालों पर नर्म रहते हैं तो भाजपा यूपी में पुलिस पर पत्थरबाजी या गोलियां चलाने वालों के जुर्म को नजरअंदाज कर देती है। ऐसी चर्चाएं तब से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं जब से बुलंदशहर की घटना में पत्थर बाजी करने के दौरान हिंसा में मरे सुमित नाम के एक पत्थरबाज के परिजनों को उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने दस लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी है।
ज्ञातव्य हो कि यूपी के बुलंदशहर कांड में दरोगा की शहादत के अलावा सुमित नाम के युवक की मौत हो गयी थी। जिसके दूसरे दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने मृतक सुमित के परिजनों को दस लाख रूपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। घोषणा के कुछ घंटे बाद एक वीडियो ने सुमित को दंगाई साबित कर दिया। वायरल होने वाले इस वीडियो में सुमित बुलंदशहर की हिंसा में पत्थर बाजी कर रहा है। सुमित बुलंदशहर की हिंसा का दंगाई था या निर्दोष!  इस बात की जांच किये बिना ही योगी सरकार ने इस मृतक के परिजनों को दस लाख रूपये का मुआवजा देने की घोषणा कर दी थी।
बुलंदशहर की घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि भविष्य में गौकशी का कोई मामला सामने आया तो जिम्मेदार डीएम/पुलिसकर्मी बख्शें नहीं जायेंगे। योगी ने अपने बयान में भीड़ द्वारा मौत के घाट उतारे गये शहीद दरोगा का ना तो कोई जिक्र किया और ना दुख व्यक्त किया। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने बुलंदशहर में दरोगा को मारने वाले हमलावरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी नहीं दिये।

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