दुश्मन हो या दोस्त, बात से है क्या डरना

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क्या डरना किस बात से, करे पेट भर बात
बने या न बने, कर लेंगे हर बात।।
कर लेंगे हर बात, बात में बात उठाएं,
चले जहां से वही लौटकर फिर आ जाएं,
बिना बात के बात से, बात से है जी भरना,
दुश्मन हो या दोस्त, बात से है क्या डरना।।

कदम कदम पर ठगा, हाय जिसने दिल तोड़ा

दिल तोड़ा धोखा दिया, बिखराए अरमान।
फिर भी छलिया के लिए, तड़प रही है जान।।
तड़प रही है जान, रंग गिरगिटी सा बदले,
जालिम है क्या चीज न फिर भी दिल से निकले,
जाने क्यों हर बार, उसी से नाता जोड़ा।
कदम कदम पर ठगा, हाय जिसने दिल तोड़ा।।

साभार: सीएम त्रिपाठी

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