- सीमैप देगा टेक्निक, एकस सोशल वेलफेयर आर्गनाईजेशन बनाएगा अगरबत्ती, हुआ समझौता पत्र पर हस्ताक्षर
- हर रोज चढ़ता है तीन से चार टन फूल, साईं मंदिर पर चढ़ाये फूल से पहले से ही बन रहीं अगरबत्तियां
अब उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन चढ़ाया जाने वाला तीन से चार टन फूल बेकार नहीं जाएगा। अब उसी फूल से अगरबत्ती बनेगी, महाकालेश्वर से लेकर सभी देव मंदिरों और घरों में सुंगध फैलाएगी अर्थात “आम तो आम गुठलियों के दाम” के दाम वाली कहावत चरितार्थ होगी।
यह अगरबत्ती बनाने का काम एकस सोशल वेलफेयर आर्गनाईजेशन करेगा और उसको अगरबत्ती बनाने का तरीका बताएंगे लखनऊ स्थित सीएसआईआर-सीमैप (केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान) के वैज्ञानिक। बुधवार को एकस और सीमैप के बीच समझौता पत्र पर हस्ताक्षर हुए।
समझौता पत्र पर एकस शोसल वेल्फेयर ऑर्गनाइज़ेशन उज्जैन के मनप्रीत एवं सीएसआईआर-सीमैप के प्रशासनिक अधिकारी द्वारा हस्ताक्षर किए गये। संस्था जल्द ही अपनी विनिर्माण सुविधा में आने वाले महीने में उपरोक्त उत्पाद का उत्पादन शुरू करेगी।

इस संबंध में सीमैप के मीडिया प्रभारी मनोज सेमवाल ने बताया कि उज्जैन के मंदिर महाकालेश्वर में लगभग 3-4 टन फूल (गुलाब, गेंदा एवं बेल पत्र) रोज भक्तों द्वारा चढ़ाए जाते हैं, जिनका उचित निस्तारण करने में मंदिर प्रशासन को काफी मुश्किल होती है। इसलिए मंदिर प्रशासन ने उज्जैन की संस्था एकस शोसल वेल्फेयर ऑर्गनाइज़ेशन से उसका उचित उपयोग करने हेतु एवं फूलों से अगरबत्ती तथा कोन बनाने के लिए अनुरोध किया था, जिसके लिए उक्त तकनीक सीमैप, लखनऊ से हस्तांतरित की गयी है, जिससे उसका उचित उपयोग एवं पर्यावरण को बचाने में सहयोग मिलेगा। फूलों से निर्मित अगरबत्ती में कोयले का प्रयोग नहीं किया जाता है। यह अधिक देर तक जलने मे भी सक्षम है, इसके अलावा बांस की तीलियों का प्रयोग भी नहीं किया जाता है एवं रासायनिक पदार्थ रहित तथा जहरीला धुआँ भी नहीं होता है। इस तकनीकी को सीएसआईआर-आईआईटीआर, लखनऊ द्वारा प्रमाणित भी किया गया है।
सीमैप की तकनीकी का प्रयोग वैष्णों देवी के चढ़ाये फूलों और साईं मंदिर के फूलों की अगरबत्ती बनाने के काम में पहले से ही हो रहा है। साईं मंदिर में तो तीन सौ से अधिक लोग प्रत्यक्ष रूप से रोजगार से जुड़े हैं। डॉ. अब्दुल समद, निदेशक, सीमैप, ने समझौता पत्र एकस संस्था को सौंपा। इस अवसर पर डॉ. आर. के. श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, व्यापार विकास विभाग, डॉ. संजय कुमार, ई. मनोज सेमवाल, करजी सिन्हा, आदि उपस्थित थे।







