राष्ट्रमण्डल में भी पाक की फजीहत

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
वैश्विक मंचो पर अपनी फजीहत कराना पाकिस्तान की फितरत बन चुकी है। विचार के अनेक विषय होते है, जिनका संबन्ध मानव मात्र से होता है। इन पर सभी देश अपना मन्तव्य रखते है। इन्हीं आधार पर साझा घोषणा पत्र तैयार किया जाता। लेकिन पाकिस्तान के लिए अपनी आतंकी छवि से बाहर निकलना मुश्किल होता है। वैचारिक रूप से वह दिवालिया ही नजर आता है। वैश्विक मंचो पर कश्मीर के अलावा कोई प्रमुख मुद्दा उसके पास नहीं रहता है। पहले संयुक्त राष्ट्र संघ में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ने कश्मीर का राग अलापा था। इसके कुछ घण्टे बाद ही कम्पाला में राष्ट्रमण्डल सम्मेलन हुआ। इसमें भी पाकिस्तान कश्मीर के दायरे से बाहर नहीं निकल सका। इसके लिए उंसकी जमकर खिंचाई की गई। जबकि राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में युवा बेरोजगारी, दिव्यांग लोगों को सुविधा देना सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के नेतृत्व में भारतीय संसद के प्रतिनिधिमंडल ने उगांडा के कंपाला में चल रहे चौसठवें सम्मेलन की कार्यशाला में भाग लिया।
कार्यशाला सी में दिव्यांग उम्मीदवारों और विधायक के रूप में दिव्यागं लोगों की सुविधा के लिए संसद की भूमिका पर चर्चा की गई। सांसद अपराजिता सारंगी ने  ब्रेकआउट समूह में से एक समूह की ओर से इस विषय पर एक प्रस्ताव भी रखा जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। बाद में इसे आम सभा में पेश किया गया।उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित कार्यशाला ई के पेनलिस्ट चुने गए। गुजरात विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र त्रिवेदी और अरुणाचल प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष पी डी सोना ने भी इसमें भाग लिया। भारतीय दल ने कार्यशाला एफ में भी भाग लिया जिसमें संसद में नवाचार, ब्रिटेन के ब्रेक्सजिट से बाहर होने के संभावित प्रभाव पर चर्चा की गयी।
संयुक्त राष्ट्र संघ के बाद  राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में पाकिस्तान की फजीहत हुआ। भारतीय संसदीय शिष्टमंडल की सदस्य रूपा गांगुली ने पाकिस्तान को जोरदार हमला किया। पाकिस्तानी संसदीय शिष्टमंडल ने कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि भारतीय सैन्‍य बलों ने कश्मीर को बंधक बनाया हुआ है। रूपा गांगुली ने कहा कि सैनिक शासन की परंपरा पाकिस्तान में व्याप्त है और वह तैतीस साल सेना के शासन में रहा है। भारत में सैनिक शासन कभी भी और कहीं भी नही रहा है। भारत ने प्रचार के तौर पर विभिन्‍न अंतर्राष्‍ट्रीय मंचों पर कश्‍मीर मुद्दा उठाने के लिए पाकिस्‍तान की आलोचना की है।
पाकिस्‍तान ने पिछले महीने मालदीव में दक्षिण एशियाई स्‍पीकर्स सम्‍मेलन के दौरान भी कश्‍मीर का राग अलापा था। भारत के कड़े विरोध के बाद माले घोषणा पत्र में इसे अस्‍वीकार कर दिया गया था।
भारत की अनेक विधानसभाओं में ई-विधान प्रणाली से समस्त कार्यवाही को पेपरलैस करने का कार्य चल रहा है। इससे समय और धन दोनों की बचत संभव हो रही है। इसके अलावा सदस्यों से संवाद करना भी सुगम हो गया है।
यह पर्यावरण मित्र प्रणाली है।  इसके इस्तेमाल से बड़ी संख्या में वृक्ष प्रतिवर्ष कटने से बचेगें। इस तकनीक को अपनाने से करोड़ों रुपए की बचत भी होगी।ई विधान प्रणाली, ई-निर्वाचन क्षेत्र प्रबन्धन, ई-समिति, ई-डायरी तथा विधायकों के इस्तेमाल के लिए मोबाइल एप जैसी आधुनिक तथा नवीनतम डिजिटल प्रणाली की दिशा में प्रगति हो रही है।

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