डॉ दिलीप अग्निहोत्री
अयोध्या दीपोत्सव में फिजी की डिप्टी स्पीकर व सरकार में मंत्री वीणा भटनागर मुख्य अतिथि थी। केवल इतने पर ही विचार करें तो बात सामान्य लगती है। अनेक प्रमुख समारोहों में विदेशी मेहमानों को बुलाया जाता है। लेकिन अयोध्या दीपोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में विदेशी मेहमान की भागीदारी भावनात्मक रूप से भी विशिष्ट थी। यह भावना फिजी की मंत्री वीणा और यहां उपस्थित जनसमुदाय दोनों पर समान रूप से लागू हुई। यहां दूर दूर से आये रामभक्तों के लिए श्री राम शोभा यात्रा और राम चरित मानस की चौपाइयां कोई नई नहीं थी। इनको देखते सुनते ही लोग बड़े हुए है। लेकिन सुखद आश्चर्य तब हुआ जब फिजी की निवासी वीणा भटनागर श्री राम शोभायात्रा में न केवल सम्मिलित हुई, बल्कि वह परमरागत रूप से कलश उठा कर पैदल भी चली। उस समय वह एक सामान्य रामभक्त के रूप में ही थी। यह सब उनके लिए भी भावनात्मक रूप से सुंदर पल था।

करीब दो शताब्दी पहले उनके पूर्वक यहीं कहीं से फिजी गए थे। उनके पास सम्पत्ति के रूप में केवल राम चरित मानस ही थी। फिजी गए तो वहीं के होकर रह गए। बहुत कुछ उनके जीवन मे बदला होगा। लेकिन जो एक बात नहीं बदली ,वह थी रामभक्ति। उनकी अगली पीढ़ियों ने भी इस धरोहर को संभाल कर रखा। आज तक इस धरोहर को धूमिल नही होने दिया। ये सभी लोग आज भी मानस का पाठ करते है। रामायण की चौपाई आज भी यहां गूंजती है। वीणा भटनागर ने श्री राम शोभायात्रा के बाद मंच से मानस की चौपाइयों का गायन किया।
मंगल भवन अमंगल हारी।
हरहुं नाथ मम संकट भारी।।
वीणा भटनागर पूरे भक्ति भाव से चौपाइयों का गायन कर रही थी। उसी भक्तिमय उत्साह व आंनद में वहां उपस्थित लोग इन चौपाइयों को दोहरा रहे थे। लगा ही नहीं कि कोई विदेशी मेहमान श्रीराम का गुणगान कर रहा है। यह भारतीय संस्कृति की व्यापकता है। सात समुद्र पार भी लोगों ने इस संस्कृति को सैकड़ों वर्षों से सहेज कर रखा है। यह बात यहाँ रामलीला के विदेशी कलाकारों ने भी प्रमाणित की। रामलीला का मंचन इनके लिए सामान्य अभिनय नहीं है, बल्कि यह उनके लिए श्रीराम की भक्ति का माध्यम है। उनका यह भाव रामलीला के मंचन से भी प्रकट होता है।
वीणा भटनागर ने कहा कि श्रद्धा भक्ति का भाव वहां के लोगों के रोम रोम में बसा है। भारत और फिजी के रिश्ते निरन्तर मजबूत हो रहे हैं। सांस्कृतिक, सामाजिक व आर्थिक समृद्धि की दिशा में दोनों देश परस्पर मिल-जुलकर कार्य कर रहे हैं। वहां पर भारतीय संस्कृति व हिन्दी का संरक्षण व संवर्धन किया जा रहा है। फिजी के विद्यार्थियों को भारत सरकार की तरफ से छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है, जिससे उन्हें अध्ययन में मदद मिलती है। भारत की चिकित्सा सुविधाओं का लाभ भी फिजीवासियों को मिलता है।







