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    जहां कुछ भी उगाना था असंभव, वहां डाक्टर राजन ने लहलहा दी अमरूद की सर्वाधिक स्वादिष्ट किस्में

    By November 27, 2019 Global NEWS No Comments5 Mins Read
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    • अरुणाचंल के लोअर सुबनसिरी जिले के याचुली गांव में ललित के पैदावार से लोगों के चेहरे पर आयी खुशी
    • केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के निदेशक की अरुणाचंल के उप मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव ने की सराहना

    उपेन्द्र नाथ राय

    लखनऊ, 27 नवम्बर 2019: अरुणांचल प्रदेश का लोअर सुबनसिरी जिले का याचुली गांव, जहां की पथरीली जमीन पर कुछ भी होना असंभव था। वहां एक लखनऊ के उद्यान विशेषज्ञ ने ऐसा अमरूद का पेड़ विकसित किया, जिससे वहां की ख्याति दूर-दूर तक फैल रही है। यही नहीं वहां के लोगों के लिए भी यह मुख्य आजीविका का साधन बन चुका है। यह विशेष प्रकार के अमरूद की किस्म तैयार की है केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के निदेशक डाक्टर शैलेन्द्र राजन ने, जिनकी प्रशंसा अरूणाचंल के उप मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव ने भी की है। इस सेब की तरह दिखने वाले विशेष किस्म के ललित नाम के विशेष अमरूद को पूरे क्षेत्र में लगाने का निर्देश दिया है।

    डाक्टर शैलेन्द्र राजन ने बताया कि अरुणाचल के याचुली में लखनऊ में विकसित अमरुद की केसरिया किस्म “ललित” पहुंचकर सेब की तरह रंगीन फल दे रही है। रंग और स्वाद दोनों ही बेमिसाल है। यह ठंड से और स्वादिष्ट हो जाता है। उनका कहना है कि जीवन में इतने स्वादिष्ट एवं आकर्षक ललित के फल देखने को नहीं मिले, जबकि ललित किस्म देश में हजारों हेक्टेयर में उगाई जा रही है। पेटी में रखे गए अमरूद के फलों को देखकर सेव का भ्रम हो जाता है। वहां एक लाख से अधिक पौधे आज वहां लगाये जा चुके हैं।

    5500 फीट ऊंचे उबड़-खाबड़ स्थान पर गड्ढा खोदना भी था मुश्किल:

    5500 फीट ऊँचे स्थान पर उबड़-खाबड़ पथरीली पहाड़ी जामिन में अमरूद की खेती करना आसान नहीं था। गड्ढे खोदने के बाद लखनऊ से इस पहाड़ी दूरस्थ स्थान पर ट्रक से लाखों पौधे पहुंचाया गया। इस कार्य के लिए ट्रक वालों को भी ले जाने के लिए तैयार करना मुश्किल था लेकिन डाक्टर शैलेन्द्र राजन ने हार नहीं मानी और पगडंडियों के सहारे ही वहां तक पौधे पहुंचवा दिये। सीआईएसएच् ने अमरूद की आधुनिक खेती की ट्रेनिंग के साथ-साथ कलमी पौधे भी प्रदान किए। किसानों को लखनऊ में एक सप्ताह का प्रशिक्षण भी दिया गया। इसके साथ ही फोन और व्हाट्सएप पर भी नियमित रूप से किसानों को सलाह दी जाती रही। प्रयास के बाद वहां के ट्राइबल युवकों की एक टीम ने अमरुद का सफल उत्पादन किया और साथ दिया याचुली की ठंडी रातों और दिन में खिली हुई धूप ने। फल विकास के दौरान ठंडी रातों ने ललित के रंग और स्वाद को निखारा। फल में मिठास के साथ-साथ खटास का अनुपम मिश्रण एक बार चखने के बाद बार-बार खाने के लिए मजबूर कर देता है।


    इससे पहले भी हो चुके कई प्रयास, लेकिन डाक्टर राजन ने समझी वहां की जलवायु की स्थिति:

    तीन साल पूर्व किसी ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि याचुली की परिस्थितियों में ललित का फल इतना आकर्षक और स्वादिष्ट होगा। अरुणांचल की परिस्थितियों में किस्मों का परीक्षण करने के लिए ललित, श्वेता, लालिमा इलाहाबाद सफेदा, लखनऊ-49 (सरदार) आदि किस्मों के हजारों पौधे लगाए गए। इसका मुख्य उद्देश्य यहां की परिस्थितियों में उपयुक्त किस्म का चुनाव एवं स्थानीय मार्केट में मांग के बारे में परीक्षण करना था। याचुली की जलवायु का विश्लेषण करके अधिक संख्या में ललित के पौधे लगाने की संस्तुति की गई। डॉ राजन द्वारा की गई परिकल्पना सही निकली, क्योंकि ललित अमरूद के पौधों को अन्य किस्मों की तुलना में पांच गुना अधिक संख्या में लगाना सफल हुआ।

    उच्च रक्तचाप में भी लाभदायक है ललित:

    लखनऊ में ललित किस्म का फल केसरिया-पीले रंग का और गूदा गुलाबी होता। याचुली में यह किस्म गुलाबी गूदे के साथ बाहर से सेब के रंग वाली हो गई। फल सुखद सुगंध के साथ मीठे-हल्के अम्लीय होते हैं। सभी ने टेस्ट की गई किस्मों में से ललित को इस क्षेत्र के लिए सर्वश्रेष्ठ माना। ललित एक दोहरे उपयोग वाली किस्म है। फल समूचा या काट कर खाने के लिए उपभोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त यह प्रसंस्करण के लिए उपयोग की जाने वाली एक प्रमुख किस्म है। गुलाबी गूदा विभिन्न उत्पादों जैसे पल्प, आरटीएस, चमकदार जेली और साइडर बनाने केलिए अत्यधिक उपयुक्त है। ललित पोषक तत्वों एवं स्वास्थ वर्धक गुणों से भरपूर और मधुमेह, उच्च रक्तचाप, कब्ज एवं प्रोस्टेट कैंसर के रोगियों के लिए उत्कृष्ट है।

    डिप्टी सीएम ने व्यावसायिक उत्पादन की दी सलाह:

    इस सफलता को देख कर अरुणांचल के डिप्टी सीएम ने राज्य में अमरूद की व्यावसायिक उत्पादन की सलाह दी। मुख्य सचिव नरेश कुमार ने यचुली में उत्पादित ललित अमरूद फलों की गुणवत्ता की सराहना की। उन्होंने आगामी वर्षों में प्रदेश में ललित के एक बड़े उत्पादक क्षेत्र को विकसित करने का सुझाव दिया। डाक्टर राजन ने संस्थान से सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले रोपण सामग्री और अमरूद की उच्च स्तरीय उत्पादन तकनीक हेतु किसानों और अधिकारियों के प्रशिक्षण के लिए कार्य योजना बनाई । यह प्रयास ताजे फल की मांग और प्रसंस्करण के लिए फलों की आपूर्ति में सुधार करेगा।

     
    खेती के लिए सीमित संसाधनों की जरूरत: 

    याचुली में अमरूद की खेती प्रणाली जैविक खेती की आवश्यकताओं के साथ अच्छी तरह से फिट बैठती है। अमरूद की खेती के लिए सीमित संसाधनों की आवश्यकता होती है। इस क्षेत्र में रोग एवं कीटों द्वारा हानि न के बराबर है। जैविक उत्पादित अमरूद के उत्पाद का घरेलू और निर्यात बाजार में उत्तम बाजार होगा। क्षेत्र में ललित की वैज्ञानिक खेती अरुणांचल प्रदेश में फल और प्रसंस्कृत-उत्पाद उत्पादन को बढ़ावा देगी।

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