हवाई चप्पल वालों की हवाई यात्रा की हवाई बातें
ओम माथुर
इसे कहते हैं आपदा में अवसर। इधर भारत की सबसे बड़ी एयरलाइंस इंडिगो की सैंकड़ों फ्लाइट विभिन्न शहरों से रद्द हुई और उधर अन्य एयरलाइंस से अपने किराए में चार से पांच गुना बढ़ोतरी कर दी। लोग भुगत रहे हैं। गंतव्य पर जल्दी पहुंचने के लिए एयर टिकट बुक कराए थे। लेकिन क्या पता था कि हवाई जहाज आसमान में उड़ने की बजाय एयरपोर्ट पर ही जमीन पर खड़े रहेंगे। कोई जोड़ा ही अपनी शादी के रिसेप्शन में नहीं पहुंच पाया। कोई अपने पिता की अस्थियां लेकर हवाईअड्डे पर बैठा रहा।
कोई कम्पनी की मीटिंग मिस कर गया। कोई इंटरव्यू। कोई हालिडे पर जा रहा था,उसका आगे तक का कार्यक्रम और होटलों में बुकिंग का पैसा बेकार हो गया। किसी भी क्षेत्र में एक कंपनी की मोनोपोली लोगों पर ऐसे ही भारी पड़ती है। आखिर इंडिगो का भारतीय एविएशन सेक्टर में 65 फीसदी हिस्सेदारी है। करीब ढाई हजार फ्लाइट रोज संचालित करती है और रोजाना सफर करते हैं तीन लाख यात्री।
डीजीसीए के बनाए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन यानी एफडीटीएल की पालना समय पर की नहीं और सरकार पर अपनी मनमानी से ऐसा दबाव बनाया कि अब उसे नियमों में भी दो माह की छूट मिल गई। एफडीटीएल के तहत पायलट को 36 के बजाय 48 घंटा आराम देने, दो दिन वीकली टेस्ट अनिवार्य करने का नियम एक जुलाई से लागू हुआ। तो 1 नवंबर से पायलट और अन्य क्रू मेंबर्स के लगातार नाइट शिफ्ट पर पाबंदी लगा दी थी। इसका मतलब ये हुआ कि इंडिगो को अपने पायलट और क्यू मेंबर्स की संख्या बढ़ानी चाहिए थी। यानि नई भर्ती करनी चाहिए थी। लेकिन उसने ऐसा नहीं किया और अब भुगत रहे हैं यात्री।
हालांकि देश में हवाई यात्रा करने वाले 10-12 फीसदी लोग ही है लेकिन सबसे ज्यादा टैक्स ये लोग ही देते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कुछ साल पहले कहा था कि उनकी इच्छा की हवाई चप्पल पहनने वाला हवाई जहाज में यात्रा करें । लेकिन अब तो सूट-बूट पहनने वाले ही हवाई यात्रा नहीं कर पा रहे। और चप्पल वाले लोगों के लिए कम किराए की बात थी,तो आज दिल्ली से पटना जाने का किराया, दिल्ली से पेरिस जाने के किराए से भी ज्यादा था।







