जी के चक्रवर्ती
देश के विभिन्न राज्यों में सड़क दुर्घटनाओं को लेकर जिस प्रकार से चर्चाएं हो रही है। यह स्थिति बहुत अच्छी तो नहीं कही जा सकती है, क्योंकि इसमें कोई दो राय नहीं है कि देश के सड़क परिवहन मंत्री देश में फैले सड़कों को सही और उनका पुनर्निर्माण के कार्यों में बहुत जोरशोर से कर रहे हैं, तो वहीं देश के विभिन्न राज्यों में हो रहे लगातार सड़क हादसों से लोगों में चिंता होना स्वभाविक है, ऐसे में अभी वर्ष 2022 के अंतिम दिन 31 दिसम्बर 6:30 बजे देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर से शर्मसार हो गई है। यहां पुराने वर्षं के विदाई और नये वर्ष के आगमन के जश्न मनाने के बीच कुछ दरिंदों ने एक लड़की को दर्दनाक मौत की नींद सुला दिया था। शनिवार की शाम 6:30 बजे रात लड़की स्कूटी से घर जा रही थी कि तभी कार सवार कुछ युवकों ने टक्कर मार दी और फिर 4 किमी तक सड़क पर स्कूटी समेत घसीटते हुए उस लड़की को ले गए थे जिसके कारण लड़की लड़की की मौके पर मौत हो गई थी।

हाल ही में लखनऊ के गोमती नगर निवासी की बाँदा में पीछे से आ रहे एक डम्पर ने स्कूटी सवार महिला को टक्कर मार दिया जिससे वह डम्पर में फंस कर लगभग 1 किलोमिटर तक घसीटती चली गईं जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
अभी कुछ दिन पहले ही टाटा सन्स के पूर्व चेयरमैन और उद्योगपति साइरस मिस्त्री की भी इसी तरह एक सड़क हादसे में 4 सितंबर 2022 रविवार के दिन मृत्यु हो गयी थी।
खैर मृत्यु का कारण भले उनके कार की गति सीमा भले रही हो, लेकिन इस मामले में देश में चर्चाएं तो बहुत हुई और मार्ग दुर्घटनाओं को रोकने के लिए तमाम उपाय करने की बातें भी की गईं लेकिन धरातल पर विशेष कुछ अभी तक होता नहीं दिखाई दे रहा है। वैसे आपको बता दें कि सड़क दुर्घटनाओं की सही रिपोर्टिंग के लिए देश के छह राज्यों में प्रयोग के तौर पर जो परियोजना शुरू की गई है, उसे न केवल सफल बनाये जाने की जरूरत है, बल्कि उसे यथाशीघ्र पूर्ण भी किए जाने की आवश्यकता है।

देश के मद्रास राज्य में स्थित आईआईटी की सहायता से अधिक दुर्घटना वाले राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, बिहार एवं राजस्थान में शुरू किये गये पायलट प्रोजेक्ट के दायरे को बढ़ाया भी जाना चाहिए, क्योंकि हमारे देश में सड़क दुर्घटनाओं की सही समय से न तो रिपोर्टिंग हो पाती है और न ही सही ढंग से छानबीन हो पाती है, जिसके कारण अधिकतर सड़क दुर्घटनाओं में हताहत हुये लोगों को समय पर राहत भी नहीं मिल पाती है। वैसे हमारे यहां सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने का कोई पुख्ता और कारगर व्यवस्था आज तक नहीं हो पाया है, तो दुसरी तरफ मार्ग दुर्घटना से संबंधित दावों के निस्तारण में अनावश्यक देरी भी होती है।
अभी हाल ही मे देश की सर्वोच्च अदालत ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को यह निर्देश दिया है कि सड़क हादसों की रिपोर्ट तुरंत दर्ज करने की व्यवस्था किया जाए।
पता नहीं हमारे देश में ऐसा कब तक चलता रहेगा क्योंकि किसी भी सड़क हादसों पर सही समय पर रिपोर्टिंग नहीं होने और इसकी कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने के कारण मार्ग दुर्घटना से सम्बंधित दावों का निस्तारण में देरी से भुक्तभोगी को यथा समय कोई मदद नहीं मिल पाती है, इसलिए इसे शीघ्र करने की व्यवस्था होना चाहिए।
नव वर्ष के अवसर पर देश में अनेकों जगहों से भीषण सड़क दुर्घटनाओं के समाचारों ने लोगों के अन्तर्मन को विचलित किया है।







