युवा पीढ़ी की समस्याओं का निवारण है योगा

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पंकज कुमार

वर्तमान परिदृश्य में समस्त मानवजाति विभिन्न अवसादों, विकारों एवं तनावपूर्ण माहौल में साँसें ले रही हैं। समस्त मानव जाति अपने वैभव, विलासिता एवं सुख सुविधाओं को प्राप्त करने में इतने व्यस्त हैं कि उनके पास इस शरीर को स्वस्थ और निरोग रखने के लिए जरा सा भी वक्त नहीं हैं । बच्चे हो या युवा या फिर वृद्ध सभी अपनी अभिलाषाओं की पूर्ति करने में तल्लीन हैं। उन्हें ये अच्छी तरह ज्ञात है कि इस शरीर को आराम की भी जरूरत होती हैं। ये जानकर भी लोग स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह हैं, जिसका परिणाम ये देखने को मिलता है कि वे तनाव एवं अवसाद तथा अनगिनत रोगों का शिकार हो जाते हैं।
खासकर वर्तमान समय की युवा पीढ़ी तनाव एवं अवसाद का शिकार हैं। दिन प्रतिदिन खबरों की सुर्खियों में ये देखने को हमें मिलता है कि फला मेडिकल, इंजीनियरिंग ,कैट , आईआईटी की तैयारी करने वाले युवा ने तनाव , अवसाद में आकर खुद खुशी या आत्महत्या कर ली। ऐसी परिस्थितियों में योग उनके लिए एक बेहतर सहज ,उपयुक्त एवं सुयोग्य विकल्प साबित हो सकता है यदि वे योग अभ्यास को 10 या 15 मिनट अपना बहुमूल्य समय देकर अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बना ले तो योग उन्हें अवसाद तथा तनाव के मार्ग से निजात दिला सकता है।

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वैसे योगा का शाब्दिक अर्थ होता है -जोड़ना ।योग एक साधना, व्यायाम ,तपस्या एवं आध्यात्मिक क्रिया है जो मानव को समस्त प्रकार के रोगों   यथाअस्थमा ,यकृत ,दिल संबंधी बीमारियों ,उच्च रक्तचाप एवं मानसिक असंतुलन से निजात दिलाने में महती भूमिका निभाता है। भारत में प्राचीन काल से ही ऋषि मुनि ,साधु संत महात्मा और बुद्धजीवी लोग योग की क्रिया को अपनाते रहे हैं। जिससे कारण ही वे लोग रोगमुक्त होकर आत्म शांति सुख या परमसुख का उपभोग करते रहें हैं। योग का उल्लेख ऋग्वेद में भी मिलता है। प्राचीन काल मे योग को प्रारंभ करने का श्रेय योग गुरु पतंजलि जी को जाता है। हालांकि उनके द्वारा योग का प्रसार करने से पूर्व योग के बारे में प्राचीन भारत के लोग भलीभांति परिचित थे।

वर्तमान समय में समस्त मानव जाति तनाव अवसादों एवम विकारों से ग्रस्त है। हालांकि इस वैज्ञानिक युग मे चिकित्सकों ने इन विकारों को काफी हद तक दूर करने में सफलता हासिल की हैं। फिर भी मानव जाति इन अवसादों ,तनावों और विकारों के जंजाल से मुक्त नहीं हो सकी है। ऐसे युवा पीढ़ी के तनाव ग्रस्त माहौल को देखते हुए भारत के योग गुरु बाबा रामदेव जी ने पूरे विश्व मे योग को प्रचारित एवं प्रसारित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग को मान्यता दिलाने के बारे में सोचा। जिससे समस्त मानव जाति को अवसाद के मार्ग से मुक्त कर स्वास्थ्य एवं प्रसन्नता के मार्ग पर लाया जा सके ।

बाबा रामदेव और भारत के साफ सुथरी छवि के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के अथक प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र संघ में योग को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हुई। संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की घोषणा की। संयुक्त राष्ट्र संघ ने योग की थीम -सामंजस्य और शांति के लिए योग रखी है। विश्व की समस्त मानव जाति ने सहजतापूर्वक स्वीकार किया। आज पूरी दुनिया योग मय हो चुकी है जिससे स्पष्ट होता है कि योग निश्चित तौर पर हर्बल तरीके से मानव जाति को इन तमाम विकारों को दूर करने में मदद कर रहा है ।

योग उन तमाम विकारो को दूर कर पा रहा है जिनसे  मेडिकल साइंस भी नही दूर कर पा रहा है। मेडिकल साइंस जहाँ उपरोक्त विकारों से  दवावो के जरिये तुरंत तो निजात दिला देता है लेकिन दीर्घ काल के लिए नहीं।आने वाले 21 जून 2017 को पूरी दुनियां में योग का प्रचार प्रसार करने के लिए योग अभ्यास आयोजित किये  जा रहे हैं ताकि दुनिया योग को अपना कर तनाव एवं अवसदमुक्त हो सके।  निश्चित तौर पर योग को अपना कर दुनिया की समस्त मानव जाति सामंजस्य ,शांति ,प्रसन्नता ,अवसदमुक्त, तनावरहित एवं स्वस्थता के साथ जी सकेगी। इस अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर मैं विश्व मे सामंजस्य और शांति स्थापित करने की कामना करता हूं।

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