न्याय के मंदिर न्यायालय से लोकतंत्र के मंदिर संसद का सफर

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छोटी सी लव स्टोरी

सरकार के खिलाफ जजों की प्रेस कांफ्रेंस से शुरु हुई नफरत प्यार में कब बदल गई किसी को नही पता।

गर्लफ्रेंड बोली- मैं पास हो गई।

ब्वॉयफ्रेंड : मैंने सिफारिश की थी। ये कॉलेज मेरे बाप का है और तुम मेरी गर्लफ्रैंड हो। मेरी सिफारिश तो चलनी ही थी।

गर्लफ्रैंड : बकवास मत करो! मैं अपनी मेहनत से पास हुयी हूँ। मेरी आंसरशीट के आधार पर निष्पक्ष और न्यायसंगत तरीके से टीचर ने मुझे फस्ट डिवीजन पास किया है।
क्या सुबूत कि तुम्हारी सिफारिश से मैं पास हुई हूँ !

ब्वायफ्रेंड : ठीक है, कल की एक खबर तुम्हें यक़ीन दिला देगी कि मेरी सिफारिश से ही तुम पास हुई है।

आज की ताज़ा ख़बर.. आज की ताज़ा ख़बर… आज की ताज़ा ख़बर..
टीचर को कॉलेज का प्रिंसिपल बना दिया गया.. प्रिंसपल बना दी गयीं टीचर..

( और इस झूठे आशिक़ की तरह एक वोट के आशिक़ ने दुनिया के सामने न्याय संगत न्यायिक फैसले को भी शक के कटघरे में खड़ा कर दिया।

ताकि बड़ा वोटबैंक मान ले कि सच के आधार पर फैसला नही हुआ था बल्कि ये फैसला हमने तुम्हारी खुशी के लिए करवाया था। अपना वादा निभाने के लिए हमने ही ये फैसला करवाया था।

  • नवेद शिकोह

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