- करोड़ों पौधे सूखने के बाद रेंजर और डीएफओ में खिंची तलवार एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप शुरू
- कौशांबी की धरती मे वन विभाग के रोपित दो करोड़ पौधे यदि जीवित होते तो उनकी बाजारू कीमत 50 हजार करोड रुपए होती
- 14 वर्षों में दो करोड़ पौधा रोपण करने में 100 करोड रुपए की रकम सरकारी खजाने से हुई खर्च
कौशांबी: 14 सालों का ‘हरा सपना’ सूखकर राख हो गया! वन विभाग ने 2012 से 2025 तक अखिलेश-योगी सरकारों में 2 करोड़ पौधे रोपने का दावा किया, 100 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से उड़ाए लेकिन हकीकत? सिर्फ 20 लाख पौधे जिंदा, बाकी गायब या सूखे!
अगर ये पौधे जिंदा होते तो बाजार वैल्यू 50 हजार करोड़! लेकिन अब अफसरों में जंग छिड़ी: रेंजर DFO पर लापरवाही का ठीकरा फोड़ रहे, DFO रेंजर्स को दोषी बता रहे। पूर्व DFO ने चार्ज देते वक्त 2 करोड़ का ‘हरा खाता’ सौंपा, लेकिन अब कहां हैं वो पौधे? देखभाल की कमी या रोपे ही नहीं भ्रष्टाचार की बू आ रही है!
विभागीय आंकड़ों में बड़ा खेल: मजदूरी से लेकर रोपण तक करोड़ों बहाए, लेकिन नतीजा शून्य। कौन है मास्टरमाइंड? सड़कों पर चर्चा गर्म, जनता मांग रही सरकार कब करेगी जांच और कार्रवाई?
ये सिर्फ पौधों का नहीं, पर्यावरण और पैसों का घोटाला है! क्या होगा इन ‘हरे चोरों’ का?







