अगले सत्र में आम के फल अच्छे लगें, इसके लिए अक्टूबर और नवम्बर माह में आम के बागवानों को कीटों के प्रति विशेष रूप से सजग रहना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार केला, अमरूद और पपीता के खेती करने वाले किसानों को भी रोग के प्रति सचेत रहते हुए कीटनाशक दवाओं को साथ ही अन्य दवाओं का छिड़काव करना चाहिए, जिससे कि पौधों में वृद्धि हो सके।
इस संबंध में मुख्य उद्यान विशेषज्ञ मलिहाबाद लखनऊ डा. राजीव कुमार वर्मा ने बताया कि आम के मिलीबग कीट के नियंत्रण हेतु तने और थाले के आस-पास क्लोरपाइरीफास 25 ईसी0 250 ग्राम प्रति वृक्ष धूल का बुरकाव करें तथा तनों के चारों ओर एल्काथिन की पट्टी लगावें। यदि बागवान माह अक्टूबर में जाला कीट के नियंत्रण हेतु उपाय न किए हो तो जाला छुड़ाने वाले यन्त्र से जाले को साफ करें तथा प्रभावित प्ररोहों को काटकर कीडों सहित जला दें।
कीटनाशी दवाओं जैसे कार्बरिल 0.2 प्रतिशत, 4 ग्राम दवा अथवा क्वीनालफास 0.05 प्रतिशत, 2 मिली0प्रति लीटर पानी के हिसाब से या लैम्डासाहलोथ्रिन एक मिली0प्रति ली0 पानी के साथ में स्टीकर एक मिली0 प्रति ली0 का घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि केला अवांछित पुत्तियों की कटाई तथा 50 से 60 ग्राम यूरिया एवं 100-125 ग्राम म्यूरेट आफ पोटाश प्रति पौधा मिट्टी में प्रयोग करें। 10 दिन के अन्तराल पर सिंचाई तथा पर्णधब्बा एवं सड़न रोग की रोकथाम हेतु एक ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति लीटर की दर से छिड़काव करें। अमरूद में जाड़े की फसल की तुड़ाई, खाद देना तथा छाल खानें वाले कीड़े की रोकथाम, आंवला फलों की तुड़ाई ग्रेडिंग एवं विपणन यदि फल गिर रहे हो तो 0.6 प्रतिशत बोरेक्स का छिड़काव करना चाहिए।
वहीं उप निदेशक उद्यान अनीस श्रीवास्तव ने बताया कि पपीता माह के पहले और तीसरे सप्ताह में सिंचाई कर उसमें खाद का प्रयोग करना चाहिए। इसके साथ ही वायरस जनित रोगों के लिए विशेष सजग रहने की जरूरत है। अनीस श्रीवास्तव ने बताया कि पपीते के पौधों में मुख्यतः मोजैक लीफ कर्ल, डिस्टोसर्न,कली व पुष्प वृंत का सड़ना, रिंगस्पॉट, जड़ व तना सड़न, एन्थ्रेक्नोज आदि रोग लगते हैं। इनके नियंत्रण में वोर्डोमिक्सचर 5:5:20 के अनुपात का पेड़ों पर सड़न गलन को खरोचकर लेप करना चाहिए।
अन्य रोग के लिए व्लाईटाक्स 3 ग्राम या डाईथेन एम्-45, 2 ग्राम प्रति लीटर अथवा मैन्कोजेब या जिनेव 0.2% से 0.25 % का पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना फायदेमंद होता है। कॉपर आक्सीक्लोराइट 3 ग्राम या व्रासीकाल 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव किया जाना ठीक होता है।







