नई दिल्ली, 09 सितम्बर 2018: 2001 में मिस इंडिया का खिताब जीत चुकी सेलिना जेटली के लिए मुश्किलें तब खड़ी हो गयी जब उन्होंने समलैंगिकता, एलजीबीटी समुदाय के एक्टिविस्ट लोगों के (लेस्बिएन, गे, बाईसेक्शुयल, ट्रांसजेंडर) के लिए उनके हक़ में अावाज उठायी, इस कारण वश उनके दोस्तों साथियों और परिवार वालों ने उनका साथ छोड़ दिया था। उन्होंने कहा वह फिर भी इस बात से घबराई नहीं और लगातार इनके हक में लड़ती रही। यह बात सेलिना ने गुरुवार सर्वोच्च न्यायलय (सुप्रीम कोर्ट) के समलैंगिकता के हक मेें दिए गए ऐतिहासिक फैसले पर कही है।
सेलिना जेटली ने सर्वोच्च न्यायलय के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि न्यायालय के इस फैसले से बहुत खुश हूं। मैं पिछले 15 साल से एलजीबीटी एक्टिविस्ट के रूप में काम करती रही। इसी आशा और इंतजार में थी कि एक ना एक दिन जरूर इसके हक में फैसला आएगा और वैसा ही हुआ। सेलिना ने आगे कहा कि एक सच्चे देशभक्त के रूप में मेरा हमेशा से यही सिद्धांत रहा है कि मैं किसी भी तरह का भेदभाव और किसी भी संस्कृति और सभ्यता में किसी भी तरह की हिंसा को सहन नहीं करूंगी।
बता दें कि 36 वर्षीय सेलिना जेटली 2001 में मिस इंडिया का खिताब जीत चुकी हैं। पिछले 15 साल से एलजीबीटी समुदाय के एक्टिविस्ट के रूप में काम कर रही हैं। सेलिना 2013 से यूनाईटेड नेशन इक्वैलिटी चैम्पियनशिप के साथ जुड़ी हुई हैं। सेलिना ने 2003 में फिरोज खान की फिल्म जानशीन से फिल्म उद्योग में कदम रखा था। इसके बाद सिलसिले(2005), नो एंट्री (2005), टॉ डिक एण्ड हैरी (2006), गोलमाल रिटर्न्स (2008) जैसी फिल्मों में काम किया।
सेलिना ने कहा कि हम इस बात की कल्पना भी नहीं कर सकते कि एलजीबीटी समुदाय के लोगों ने इतने सालों से कितने भेदभाव और मुश्किलों का सामना किया है। इतने सालों से अपने अधिकार और सम्मान की लड़ाई लड़ रहे एलजीबीटी समुदाय के लोगों के इतने साल के दर्द को हम नहीं भर सकते हैं। सेलिना ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के इस ऐतिहासिक फैसले से देश के लाखाें एलजीबीटी समुदाय के लोगों को खुली हवा में सांस लेने और समानता का अधिकार दिया है, जिससे वो लोग लंबे समय से वंचित थे। कोर्ट ने इस फैसले से एलजीबीटी समुदाय के लोगों को उनका आत्मसम्मान वापस दिया है।







