विशेषज्ञ की राय, धान का बीज उपचारित करना जरूरी
लखनऊ, 27 मई 2020: ‘रोहिणी रवे, मृग तवे, कुछ दिन आद्रा जाय कहे घाघ घाघिन से स्वान भात न खाय’। अर्थात यदि रोहिणी नक्षत्र में तपन के साथ हल्की बारिश हो जाय, मृगसिरा में पूरा तपन हो और वह कुछ समय तक आद्रा तक रहे तो खरीफ की फसल इतना ज्यादा होगी कि सियार भी चावल नहीं खाएंगे। कृषि शास्त्र के प्रसिद्ध कवि घाघ की पंक्ति इस वर्ष मौसम विभाग के अनुसार चरितार्थ होने वाली है। लाकडाउन के बीच किसान धान का बीज डालना शुरू कर दिये हैं। उधर मौसम विभाग, ज्योतिषाचार्यों के अनुसार बारिश अपने समयानुसार अच्छी होने के आसार हैं।

25 मई से रोहिणी नक्षत्र की शुरूआत हो गयी है। अगेती धान का बीज पड़ना भी इसी के साथ शुरू हो जाता है। कृषि वैज्ञानिक डाक्टर सतीश का कहना है कि किसानों को धान की बीज डालने से पहले उसको ठीक ढंग से उपचारित कर लेना चाहिए। शंकर किस्म के धानों में पंत संकर-1, नरेन्द्र-2, पीएचबी, प्रो. एग्रो एराइज, पीएसी, पूसा, यूएस-312 आदि हैं। इसके अतिरिक्त सरजू बावन, पंत धान-10, नरेन्द्र आदि धान मध्यम श्रेणी के दिन पकने में लेते हैं।
खेतों की तैयारी के संबंध में डाक्टर सतीश का कहना है कि गर्मी की जुताई करने के बाद 2-3 जुताइयां करके खेत की तैयारी करनी चाहिए। साथ ही खेत की मजबूत मेड़बन्दी भी कर देनी चाहिए ताकि खेत में वर्षा का पानी अधिक समय तक संचित किया जा सके। अगर हरी खाद के रूप में ढैंचा/सनई ली जा रही है तो इसकी बुवाई के साथ ही फास्फोरस का प्रयोग भी कर लिया जाय। धान की बुवाई- रोपाई के लिए एक सप्ताह पूर्व खेत की सिंचाई कर दें, जिससे कि खरपतवार उग आवे, इसके पश्चात् बुवाई और रोपाई के समय खेत में पानी भरकर जुताई कर दें।
वहीं मौसम विभाग के निदेशक जेपी गुप्ता का कहना है कि मौसम अभी तप रहा है लेकिन इस वर्ष बारिश अच्छी होने की संभावना है। अभी 29 मई के बाद आंधी और बारिश होने से मौसम कुछ ठंडा होगा। इसके बाद फिर कुछ दिन मौसम गर्म रहेगा अर्थात मृगसिरा में तपन ज्यादा रहेगी।
ज्योतिषाचार्य श्रीनिवास संत का कहना है कि इस वर्ष मृग में तपन के साथ ही बारिश की अच्छी संभावना बन रही है। बीच-बीच में सूखा के भी आसार बन रहे हैं लेकिन वह कम समय के लिए होगा। इस कारण खेती उत्तम होगी और किसानों के लिए खुशहाली का समय होगा।








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