20 मिनट के संघर्ष के बाद आखिर मिहीलाल के आगे तेंदुआ हार गया था
लखीमपुर खीरी, 5 जुलाई 2025: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में 24 जून को एक ईंट भट्ठे पर तेंदुए के हमले ने पूरे क्षेत्र में सनसनी मचा दी थी। इस घटना में 35 वर्षीय मिहीलाल गौतम ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए न केवल अपनी जान बचाई, बल्कि तेंदुए से भिड़कर कई अन्य लोगों की भी जान बचाई।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें मिहीलाल को तेंदुए की गर्दन दबोचकर उससे 20 मिनट तक संघर्ष करते देखा गया। आखिरकार, उनकी बहादुरी के सामने तेंदुआ हार गया और पास के खेतों में भाग गया। इस दौरान कई लोग घायल हुए, जिनमें वन विभाग के कर्मचारी और स्थानीय ग्रामीण शामिल थे। बाद में वन विभाग ने तेंदुए को बेहोश कर पकड़ लिया।
मिहीलाल की इस वीरता की खबर ने सोशल मीडिया और समाचार वेबसाइट्स पर खूब सुर्खियां बटोरीं। लोगों ने उनके साहस की जमकर सराहना की। इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी मिहीलाल की प्रशंसा की थी। आज, 5 जुलाई 2025 को, अखिलेश यादव ने लखनऊ में समाजवादी पार्टी कार्यालय में मिहीलाल गौतम को सम्मानित किया। उन्होंने मिहीलाल को 2 लाख रुपये की सहायता राशि का चेक सौंपा और उनके साहस को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
अखिलेश ने कहा, “मिहीलाल जैसे साहसी व्यक्तियों की समाज को जरूरत है। अगर कहीं चूक हो जाती, तो शायद वह आज हमारे बीच नहीं होते। उनकी बहादुरी हर किसी के लिए प्रेरणा है।”इस सम्मान समारोह में मिहीलाल के साथ उनके परिवार और स्थानीय कार्यकर्ता भी मौजूद थे। मिहीलाल ने इस सम्मान के लिए अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी का आभार व्यक्त किया। यह घटना न केवल मिहीलाल की वीरता को दर्शाती है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की गंभीरता को भी उजागर करती है।
एक यूजर आज़ाद फिरोज अंसारी ने मिहीलाल की वीरता पर लिखा –
अखिलेश यादव जी जैसा दिल होना चाहिए..
मिहीलाल को उसके बहादुरी के लिए 2 लाख देने का काम किया.
तूफानों से जो लड़ जाए, उसे मिहीलाल कहते हैं ,
दरिंदों की आँखों में आँख डाल दे, ऐसे कमाल कहते हैं।
बीस मिनट की जंग थी, पर दिल में हौसला बेशुमार था,
तेंदुआ हार गया, क्योंकि सामने इंसान नहीं, एक चट्टान था।
अखिलेश जी ने सराहा, दिया दो लाख का इनाम,
बहादुरी को सलाम है, ये है असली हिन्दुस्तान!
अकेला था, मगर झुका नहीं
शेर आया गांव में, दहशत सी छा गई,
हर दिशा में चीखें, हर आंखों में घबराहट आ गई।
मगर एक था जो रुका नहीं,
लहू से लथपथ होकर भी झुका नहीं। – आज़ाद फिरोज अंसारी






