बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय ने शुरु किये कई अवार्ड, सेवानिवृत्त अध्यापकों को भी देंगे काम
लखनऊ विश्वविद्यालय कई अवार्ड एक साथ शुरू करने जा रहा है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय अपने छात्रों को वह पार्ट टाइम काम भी देगा, जिससे उनकी छोटे-मोटे काम निकल सकें। यह योजना कर्मयोगी के नाम से आ रही है। इसमें अधिकतम धन राशि एक सत्र में 15000 रुपये दी जाएगी।

इस संबंध में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आलोक राय ने बुधवार को बताया कि हम छोटे-मोटे काम हर वक्त दूसरों को देते रहते हैं। लाइब्रेरी आदि का काम भी समय-समय पर दूसरों से कराया जाता है। वहीं दूसरी तरफ बाहर से विद्यार्थी आते हैं और अपने पाकेट मनी के लिए ट्यूशन पढ़ाते या अन्य काम करते हैं। इसके लिए यह योजना बनाइ्र गयी कि क्यों न हम अपने विद्यार्थियों के लिए अपने यहां ही कुछ काम दें। इस आधार पर यह योजना तैयार की गयी। जो विद्यार्थी जिस तरह का मेधा रखता है, उस हिसाब से उसे काम दिया जायेगा।
वहीं विश्वविद्यालय ने दूसरी योजना इंटरनल क्वालिटी ऐशोरेंस सेल के अंतर्गत कार्यरत अध्यापकों के प्रोत्साहन के लिए सीड मनी। इसके अंतर्गत जो भी अध्यापक कोई नया शोध करना चाहता है, उसके लिए कुछ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अंतर्गत नये प्रोफेसर्स को ज्यादा प्रोत्साहित किया जाएगा। तीसरी योजना एक्लेम है। इसके अंतर्गत विश्वविद्यालय केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा सम्मानित हो चुके प्रोफेसर को खुद भी सम्मानित करेगी और उनको इंटरनल सर्टिफिकेट के साथ ही अपनी वेबसाइट पर भी उनका नाम देगी। यह एक तरह से विश्वविद्यालय की तरफ से उनका सम्मान बढ़ाये जाना है। वहीं इसके साथ ही सेवानिवृत्त अध्यापकों की मेधा का लाभ विश्वविद्यालय उठा सके, इसके लिए ‘प्रोफेसर ऑफ़ एमिनेंस’ की स्कीम भी विश्वविद्यालय चलाने जा रहा है।







