सम्मेलन में गूंजा नारा ‘दलित पिछड़ा भाई-भाई, आरक्षण की मिलकर करेंगे लड़ाई’

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  • आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र द्वारा ‘‘पूना पैक्ट दिवस‘‘ पर आयोजित ‘‘दलित पिछड़ा आरक्षण बचाओ महासम्मेलन‘‘ में दलित व पिछड़े कार्मिकों को लगा जमावड़ा।
  • सम्मेलन में दलित व पिछड़े कार्मिकों के हित में 10 महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित।
 लखनऊ 24 सितम्बर। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, उप्र के तत्वाधान में आज पूना पैक्ट दिवस पर ‘विशाल दलित पिछड़ा आरक्षण बचाओ महासम्मेलन‘‘ नेहरू युवा केन्द्र सभागार, चौक, लखनऊ में सम्पन्न हुआ, जिसमें हजारों की संख्या में दलित व पिछड़े वर्ग के कार्मिकों ने भाग लेकर अपने हक की लड़ाई को एकजुट होकर लड़ने का ऐलान किया। सम्मेलन में यह नारा गूंजता रहा कि ‘‘दलित पिछड़ा भाई-भाई, आरक्षण की मिलकर करो लड़ाई।‘ पहली बार देखने को मिला कि इस सम्मेलन में पिछड़े वर्ग के कार्मिकों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर आन्दोलन को और तेज करने का आह्वान किया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में आरक्षण समर्थकों के पहुंचने से जिन समर्थकों को सभागार में जगह नहीं मिली वह नेहरू युवा केन्द्र के बाहर जम रहे जिनका उत्साह चरम पर था। सम्मेलन सुबह 11 बजे शुरू होकर 3.30 बजे तक चला।
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, उप्र के संयोजक अवधेश कुमार वर्मा द्वारा महासम्मेलन में 10 प्रस्ताव रखे गये, जिसको सभा में उपस्थित हजारों आरक्षण समर्थकों ने ध्वनिमत से पारित किया और सभी पैना पैक्ट समझौते के हर पहलू पर विस्तार से चर्चा की।
1- लोकसभा में लम्बित पदोन्नति में आरक्षण संवैधानिक संशोधन 117वां बिल अविलम्ब पारित किया जाय।
2- पदोन्नति में आरक्षण एवं परिणामी ज्येष्ठता को संविधान की 9वीं अनुसूची में डाला जाये।
3- पिछड़े वर्ग के कार्मिकों के लिये भी पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था बहाल की जाये।
4- उप्र के सभी सरकारी विभागों में उच्च पदों पर दलित व पिछड़े वर्ग के कार्मिकों को सम्मानजनक तैनाती दी जाये।
5- सभी सरकारी विभागों में अनुशासनात्मक विंग में अनिवार्य रूप से दलित व पिछड़े वर्ग के कार्मिकों को कम से कम 50 प्रतिशत पदों पर रखा जाये।
6- सपा सरकार के कार्यकाल में मा0 सुप्रीम कोर्ट आदेश की आड़ में गलत तरीके से पदावनत किये गये सभी कार्मिकों को वर्तमान सरकार द्वारा उनके पूर्व पद पर पुनस्र्थापित कराया जाये।
7-50 साल पूर्ण कर चुके सरकारी कार्मिकों के अनिवार्य सेवानिवृत्ति सम्बन्धी शासनादेश का क्रियान्वयन को तब तक रोका जाये, जब तक प्रत्येक विभाग की स्क्रीनिंग कमेटी में दलित व पिछड़े वर्ग के अनिवार्य रूप से 50 प्रतिशत सदस्यों को न तैनात कर लिया जाये।
8-वर्तमान सरकार में अनेकों विभागों में सातवें वेतनमान दिये जाने के नाम पर दलित कार्मिकों को अनावश्यक पदावनति रोकने व उनके वेतनमान को कम किये जाने की कार्यवाही पर पूर्ण रूप से विराम लगाया जाये।
9-अनुसूचित जाति/पिछड़े वर्ग के कार्मिकों को अनेकों बार फील्ड में तैनाती दिये जाने के कुछ दिन बाद ही येन केन प्रकारेण उनपर गलत आरोप लगाकर उनको हटा दिया जाता है, ऐसे असंवैधानिक कार्यवाही पर विराम लगाया जाये।
10-सभी विभागों के विभागाध्यक्ष अनिवार्य रूप से प्रत्येक माह एससी/एसटी व ओबीसी के कर्मचारियों/अधिकारियों के हितों के लिये बने सेवा संगठनों से दो पक्षीय वार्ता कर उनकी समस्याओं का निदान करायें।
महासम्मेलन को सम्बोधित करते हुए आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के संयोजकों सर्वश्री अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, राम शब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, श्याम लाल, रीना रजक, पीएम प्रभाकर, डा. राजकरन, राजेन्द्र प्रसाद वर्मा, अन्जनी कुमार, महेन्द्र सिंह, रामाशीष यादव, अनिल विश्वकर्मा, बनी सिंह, सुरेश गौतम, सुधा गौतम, मंजू वर्मा, अशोक सोनकर, राधा किशन राव, राधेश्याम, सुखेन्द्र प्रताप, संजय कुमार ने कहा कि अब समय आ गया है कि दलित व पिछड़े समाज को एकजुट होकर अपने हक की लड़ाई के लिये आगे आना होगा। जहां तक सवाल है केन्द्र की मोदी सरकार द्वारा पदोन्नति में आरक्षण बिल पास न करने का, जब हम सभी आरक्षण समर्थक एकजुट होंगे तो विवश हो मोदी सरकार को पदोन्नति में आरक्षण बिल पास करना ही होगा। सम्मेलन की अध्यक्षता केबी राम व संचालन श्री आरपी केन ने किया तथा समापन इं. अजय कुमार जी द्वारा किया गया।