Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Sunday, August 23
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग

    नेपथ्य से: मैलानी की बाघिन का आतंक

    By September 4, 2017Updated:September 4, 2017 ब्लॉग No Comments9 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 697

    ‘घूरती लेटी बाघिन सीधी हुई। एक पंजा उठाया और जोर से गुर्राई। रायफल,कैमरे सब छिटक गए। भगदड़ सी मची। सब भाग पड़े। एफडी ने सबको चेताया डोंट सिस्टर्ब हिम…why you people disturbing her… Charge kar degi…पीछे मुड़ कर देखा तो बाघिन नहीं आ रही थी। हाथ पैर सुन्न पड़ गए थे,जैसे जान ही न बची हो। 10 मिनट तक तो धड़कने ऐसे चलती रहीं जैसे पांच हजार किलोमीटर की दौड़- दौड़ कर आए हों ‘


    हेलो हेलो सर अभी लोकेशन ट्रेस नहीं हो रही हम लोग लगे हुए हैं…हेलो सर इधर कोई पगमार्क नहीं मिल रहा….हेलो बाघिन का मूवमेंट कठिना नदी के पास पुल के नीचे मिला है पहुंचिए उधर…सर हम हाथी लेकर उधर ही पहुंच रहे…जिप्सियों के स्टेयरिंग मुड़ गए…घर्र घर्र करते गाड़ियां हवा से बातें करती नेशनल हाइवे नम्बर 737 पर गोला खुटार रोड पर पहुंच गईं। एक हाथ से रायफल तनी थी तो एक हाथ में वायरलेस पर लोकेशन दी जा रही थी। ये तस्वीर है यूपी के खीरी जिले में जहां तीन लोगों को मौत के घाट उतार चुकी बाघिन की तलाश वन विभाग के अफसर और वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट कर रहे हैं। मैलानी रेंज में नीली बत्ती लगी गाडी पर सवार दुधवा के फील्ड डायरेक्टर सुनील चौधरी पूरे आपरेशन की कमान संभाले हैं। पसीने से तरबतर चौधरी कभी वायरलेस पर तो कभी अपने मोबाइल पर टीमों को निर्देश दे रहे थे। थोड़ी ही देर में ‘आपरेशन बाघिन’ में लगी दस गाड़ियाँ कठिना पुल पर पहुँच चुकी थीं। सबकी निगाहें बाघिन की एक झलक पाने को बेताब थीं। उस खबरी से पूंछा गया कहाँ देखा था, ऊँगली उठा इशारा करते हुए बोला साहब नदी किनारे उस झाडी से निकला था। बस फिर क्या था। तुरन्त आँखों ही आँखों में टीम लीडर का इशारा हुआ। डीएफओ साउथ संजय बिस्वाल की एक टीम उत्तर से,डब्लूडब्लूएफ डब्ल्यूटीआई के एक्सपर्टस् की टीम सामने से। लखनऊ से आए ट्रेंकुलाइजिंग एक्सपर्ट डॉ उत्कर्ष शुक्ला और फील्ड डायरेकटर पुल के ऊपर से बाघिन पर की तलाश में चल दिए। कुछ ने कैमरे तान रखे थे कुछ ने बंदूके रायफल संभाल रखी थी। एक एक कदम खतरे से भरा हुआ था। पर फील्ड डायरेक्टर चौधरी को इन्तजार था तो बस हाथियों का था। बेसब्री से महावत को फोन लगाया कब तक पहुंच रहे हो….उधर से आवाज आई सर 15 मिनट और लगेगा बस् डेढ़ किलोमीटर दूर हैं।

    29 अगस्त 2016 की सुबह का साढ़े दस बजा था। जंगल का किनारा कठिना नदी का पुल और पुल से गुजरने वाले लोगों को भी आभाष होने लगा कि यहां कुछ चल रहा। लोग रुक रुक कर पूँछ रहे थे क्या हुआ साहब यहां। इशारा आगे बढ़ने को कर दिया जाता था। सबका ध्यान था तो बाघिन की एक झलक पाने को। थोड़ी देर में ही हाथी आते दिखाई दिए। आपरेशन के चीफ ने इशारा किया जंगल में उतार दो। कुछ लोग रायफलें और बायनाकुलर लेकर हाथियों पर और सवार हुए। हाथी को महावत ने पैर लगाया हाथी जंगल में उतर पड़े। पीएसी पुलिस भी आ चुकी थी। पूरे इलाके को घेरा जा चूका था। बंदूके,रायफलें,एसएलआर तनी थीं। बस नहीं नजर आ रही थी तो वो बाघिन। मैलानी रेंज के छेदीपुर और सुआबोझ में तीन लोगो को अपना शिकार बना चुकी चालाक बाघिन ने अब अपनी जगह बदल दी है। बाघिन छेदी पुर गाँव छोड़ के पाँच किलोमीटर दूर नेशनल है वे को पार कर दूसरी तरफ चली गई। ट्रेंकुलाइजिंग एक्सपर्ट,दिल्ली से आए वाइल्ड लाइफ के विशेषज्ञ सबके सब उस बाघिन को खोज रहे हैं। जिस बाघिन को तीन मौतों का गुनहगार माना जा रहा। उसको लोकेट कर सबसे पहले उसकी कुछ तस्वीरें टीम के लिए लेना जरूरी था। जिससे पहचान की जा सके की ये ही वो बाघिन है। जिसने छेदी पुर में दो बुजुर्गों को हलाक किया। सबके सब इसी इन्तजार में थे। वाइनाकुलर का रुख झाड़ियों की तरफ ही था। पर कोई भी हलचल नहीं थी। सब इधर उधर चारों तरफ सतर्क निगाहों से बाघिन को तलाश रहे थे। तभी झाड़ियों में थोड़ी हलचल हुई। सबकी निगाहें उधर ही थीं। व्हिसपररिंग आवाज में एफडी को रेंजर वीसी तिवारी ने बताया सर उधर…ऊँगली उठा इशारा किया। एफडी ने मुंह पर ऊँगली रख कर शशशह….कहा और आगे बढ़े।

    डीएफओ संजय बिस्वाल के कैमरे से तीन चार क्लिक की आवाजें आईं… पर इसी बीच झाड़ियों ने हिलना बन्द कर दिया। कैमरे को फोटो मोड पर कर देखा तो मुंह बिचका दिया। शायद संजय अपने क्लिक से संतुष्ट नहीं थे। एफडी ने इशारे में पूंछा क्या हुआ। डीएफओ संजय बिस्वाल ने नकारात्मक ढंग से सर हिला दिया। सबके सब फिर से उधर ही निगाह टिकाए थे। प्रीकाशन बरते जा रहे थे। भीड़ भी बढ़ने लगी थी। कुछ गार्ड और पुलिस पीएसी के जवान उनको खदेड़ रहे थे। भीड़ भी आतुर थी बाघिन की एक झलक पाने को। मोबाइल कैमरे सैकड़ो की तादात में आ थे। पुल से लेकर जंगल किनारे तक भीड़ खड़ी थी। मैलानी के एसओ अजय यादव भी खुशनसीब थे। फूले नहीं समा रहे थे। बाघिन की एक झलक जो उनको मिल चुकी थी। बोले’ साँसे रुक गई थीं मेरी। बहुत बड़ा सा मुंह चमकती लाल लाल आँखे और खड़े कान,वाह क्या खूबसूरत बाघिन है। मैंने जिंदगी में पहली बार देखा जंगल में ऐसे। रोमांच से भर गया वह भाई मजा आ गया।’

    डब्ल्यूटीआई और फारेस्ट के अफसर यही डिस्कस कर रहे थे कि एक फोटो तो कम से कम अच्छा आ जाए कैमरे में जिससे हम पुरानी फोटो से मिलान कर सकें कि ये वही बाघिन है या दूसरी। इसी चिंता में सबके सब लगे थे। ट्रेंकुलाइज करने को पहले पहचान जरूरी है। तय ये हुआ इन्तजार किया जाए बिना डिस्टर्ब किए बाघिन के निकलने का।
    दिन के ढाई बज चुके थे। सूरज ऐसा तप रहा था जैसे सब जला डालेगा। कठिना नदी का किनारा। उस पार धान के हरे भरे धूप को सहन करते खेत। इस तरफ उजड़ते जंगल के किनारे साल के तितर बितर हो चुके कुछ पेड़,जिनकी छाया इस समय सबके लिए जीवन सरीखी थी। टीम के लोग भी बिना खाना पानी के थके हुए नजर आने लगे थे पर थे फिर भी सब सतर्क! भीड़ की तरफ से हो हल्ला होता था बीच बीच में। दूर हाई वे पर निकलते बड़े बड़े ट्राले,ट्रकों के हॉर्न की आवाजें ही उस जंगल किनारे के सन्नाटे को तोड़ रही थीं। हालांकि जंगल में कई जगह नो हॉर्न के बोर्ड लगे हैं टाइगर के इलाके के होर्डिन्स लगे हैं। पर यहां नियम कानून कहाँ चलता। गति सीमा भी 30 किलोमीटर प्रति घण्टा के बोर्डो को मुंह चिढाते 80-90 की स्पीड में निकलते भारी भरकम ट्रक।

    बाघिन अब कठिना नदी के किनारे आराम फरमा रही थी । वन विभाग की टीम के साथ मैं भी अपने साथी प्रतीक के साथ लगा था। बाघिन की खोज में टीम खीरी शाहजहांपुर जिले के बॉर्डर पर जंगल किनारे पहुंच गई। कोई बाघिन की एक तस्वीर लेने को घण्टो अपना मोबाइल से फोटो मोड पर लगाए इन्तजार कर रहा था,कोई उचक उचक कर बाघिन की एक झलक पाने को बेताब था। पहले झाड़ियों में बैठी बाघिन साफ़ नहीं दिखी। अचानक वन विभाग के अफसर हरकत में आए। एफडी डॉ उत्कर्ष और डीएफओ संजय बिस्वाल किनारे गए कुछ खुसुर पुसुर की। अचानक संजय एक रायफल धारी गार्ड को लेकर उस तरफ बढ़े जिधर नदी पार बाघिन झाड़ियों में बैठी थी। डीएफओ की जैसे बांछे खिल गई हों। तुरत कैमरे का ट्रिगर दबने लगा। क्लिक क्लिक क्लिक की लगातार कई आवाजें आई। डीएफओ पीछे मुड़े एफडी की तरफ इशारा किया। उनका इशारा क्या हुआ, वहाँ मौजूद हर आदमी के सब्र का बाँध टूट गया हो जैसे। सबके साथ हम भी हमारे कैमरा सहयोगी प्रतीक के साथ वहां पहुंच गए। डीएफओ मुड़े तो मुझे देख कुछ अनमने भी हुए। पर सामने बाघिन की आँखे झाड़ियों के बीच से साफ़ दिख रही थीं। बाघिन लेटी थी। आराम से कठिना के पानी के किनारे छाँव में। मैने खुसपुसाते हुए प्रतीक से कहा लीड लगाओ। प्रतीक समझ चुके थे मेरी मंशा। बाघिन को एक्सक्लूसिव कैमरे में कैद करना था। वो भी महज 20-25 फीट की दूरी से। सामने बाघिन थी। उसकी लाल लाल सुर्ख आँखे,बड़ा सा माथा,काली पीली और सफेद पट्टियों का खूबसूरत संयोजन जो कुदरत ने सिर्फ और सिर्फ बाघों को ही दिया है। बाघ जितना खूंखार होता है उतना ही शर्मीला भी। पर ये बाघिन आँखों से आँखे हटा ही नहीं रही थी। डायरेक्ट आई कांटेक्ट था। सहयोगी प्रतीक ने इशारा किया मैंने भी धीरे से बोलना शुरू किया। बाघिन हमारे कैमरे में 20 फीट की दूरी से कैद हो रही थी। भय,रोमांच,हर्ष उल्लास और न जाने कितने मिलेजुले भाव हमारे मन में थे। बाघिन को इतनी नजदीक से शायद पहली बार हम भी देख रहे थे। महज 20 फीट की दूरी थी हमारे और बाघिन के बीच। हम कठिना के इस पार बाघिन उस पार। पर शायद ये अब बाघिन को भीड़ रास नहीं आ रही थी। आराम में खलल उसे बर्दास्त नहीं था। घूरती लेटी बाघिन सीधी हुई। एक पंजा उठाया और जोर से गुर्राई। रायफल,कैमरे सब छिटक गए। भगदड़ सी मची। सब भाग पड़े। एफडी ने सबको चेताया डोंट सिस्टर्ब हिम…why you people disturbing her… Charge kar degi…पीछे मुड़ कर देखा तो बाघिन नहीं आ रही थी। हाथ पैर सुन्न पड़ गए थे,जैसे जान ही न बची हो। 10 मिनट तक तो धड़कने ऐसे चलती रहीं जैसे पांच हजार किलोमीटर की दौड़ दौड़ कर आए हों। खैर जान में जान आई।

    बाघिन अभी भी झाड़ियों में छिपी बैठी थी। घंटो टस से मस नहीं हुई। आराम से लेटी रही। एक्सपर्ट ने लैपटॉप में फोटो डाल मिलान शुरू कर दिया था। टीम के जान में जान आई। बाघिन को ट्रेस कर लिया गया फोटो फिर मिल गए। शाम का धुंधलका छाने लगा था। सूरज की पीली लाल रौशनी से जंगल की खूबसूरती और बढ़ गई थी। पर शाम के धुंधलके के साथ ही बाघिन को ट्रेंकुलाइज करने के ऑपरेशन बाघिन पर भी धुंधलका छा गया। रात होने की वजह से टीमों ने अपने को विड्रॉ किया। निगरानी ट्रेसिंग की टीमों को छोड़ सब चल दिए। अगले दिन की उम्मीद लिए।

    प्रशांत पांडे

    Keep Reading

    Trump Trapped in a Labyrinth: US President's Mounting Difficulties Amid the Maze of an Iran War

    चक्रव्यूह में फंसे ट्रंप: ईरान युद्ध की भूलभुलैया में अमेरिकी राष्ट्रपति की बढ़ती मुश्किलें

    Maa Khaira Bhavani had appeared in the form of a divine beam of light.

    ज्योति पुंज के रूप में प्रकट हुईं थीं माँ खैरा भवानी

    People grappling with the unending problem of adulteration.

    मिलावट की अंतहीन समस्या से झूझते लोग

    India's Golden Burst at the Commonwealth Games: Boxing Makes History, Neeraj Shines Again

    कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का स्वर्णिम धमाका: मुक्केबाजी ने रचा इतिहास, नीरज ने फिर कमाल दिखाया

    India's Glorious Performance: Historic 'Golden Double' and Silver in Judo; Lovpreet Wins Silver in Weightlifting

    भारत का गौरवमयी प्रदर्शन: जूडो में ऐतिहासिक ‘गोल्डन डबल’ और सिल्वर, वेटलिफ्टिंग में लवप्रीत का सिल्वर

    Dreams buried in the silence of hospitals

    अस्पतालों की खामोशी में दफन होते सपने

    Comments are closed.

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    rampant sale of adulterated sweets in the market.

    त्योहार नजदीक, बाजार में नकली मिठाई का खुला खेल

    August 22, 2026
    Ritual bathing of the deity at Lakshman Tila with Ganga water from Bithoor; organization remains steadfast despite police restrictions.

    लक्ष्मण टीला पर बिठूर के गंगाजल से जलाभिषेक, पुलिस रोक के बावजूद संगठन अडिग

    August 22, 2026

    कोरिया इंडस्ट्री एक्सपो (KoINDEX) 2026 का 27 अगस्त को यशोभूमि में होगा शुभारंभ

    August 22, 2026

    गलगोटियास विश्वविद्यालय ने Microsoft के सहयोग और byteXL द्वारा संचालित उद्योग-एकीकृत AI एवं ML डिग्री का शुभारंभ किया

    August 22, 2026
    Ayushmann Khurrana's visit to Jalna A message of child safety and a secure childhood.

    आयुष्मान खुराना की जालना यात्रा : बच्चों की सुरक्षा और सुरक्षित बचपन का संदेश

    August 21, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading