जनता के बीच बहस बना फीस विवाद
पटना, 11 अक्टूबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी के बीच लोकप्रिय मैथिली लोक गायिका मैथिली ठाकुर एक बार फिर चर्चा में हैं। 25 वर्षीय मैथिली, जो मिथिला क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को देश-दुनिया तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं, अब भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की अटकलों से घिरी हुई हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ एक पुरानी घटना को लेकर विवाद छिड़ गया है, जिसमें छठ पूजा के एक गांवेलू कार्यक्रम के लिए कथित तौर पर 5 लाख रुपये फीस मांगने का आरोप लगाया जा रहा है।
मैथिली ठाकुर का जन्म 25 जुलाई 2000 को मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड के उरें गांव में हुआ। उनके पिता रमेश ठाकुर एक संगीत शिक्षक हैं, और परिवार की परंपरा के तहत उन्होंने बचपन से ही मैथिली, भोजपुरी और लोक संगीत की ट्रेनिंग ली। 2017 में ‘राइजिंग स्टार’ रियलिटी शो में फाइनलिस्ट बनने के बाद वे राष्ट्रीय स्तर पर मशहूर हुईं। ‘माई री माई’, ‘रंगबती’ और छठ पूजा गीतों जैसे उनके गाने करोड़ों व्यूज बटोर चुके हैं।
2021 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी का ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार’ मिला, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी तारीफ की। उनकी यूट्यूब चैनल पर 51 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं, और इंस्टाग्राम पर 63 लाख फॉलोअर्स। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे प्रति परफॉर्मेंस 5-7 लाख रुपये चार्ज करती हैं, जो उनकी लोकप्रियता को दर्शाता है।

राजनीतिक मोर्चे पर, मैथिली ने हाल ही में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं -केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय और चुनाव प्रभारी विनोद तावड़े से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि वे बिहार के विकास के लिए योगदान देना चाहती हैं, खासकर मिथिला क्षेत्र से। पार्टी सूत्रों के अनुसार, वे बेनीपट्टी या अलीनगर सीट से चुनाव लड़ सकती हैं। मैथिली ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य ‘बदलाव लाना’ है, न कि राजनीति को ‘खेल’ बनाना। 2020 में चुनाव आयोग ने उन्हें बिहार का ‘स्टेट आइकन’ भी घोषित किया था।
हालांकि, यह सबके बीच सोशल मीडिया पर एक वायरल पोस्ट ने विवाद खड़ा कर दिया। पूर्व विधायक प्रेम भारद्वाज समेत कई यूजर्स का दावा है कि छठ पूजा के दौरान मैथिली के अपने गांव के लोगों ने उन्हें कार्यक्रम के लिए बुलाया, लेकिन उन्होंने 5 लाख रुपये फीस मांगी। जब गांववालों ने 2 लाख रुपये ऑफर किए, तो उन्होंने इनकार कर दिया।
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भारद्वाज ने लिखा, “जो बिहारी छठ पूजा के समय अपने गांव के प्रोग्राम में आने के लिए 5 लाख रुपए मांगे, वो कहीं से बिहारी नहीं हो सकता!” एक अन्य पोस्ट में आशीष पांडेय ने सवाल उठाया कि क्या ऐसी गायिका बिहार की ‘सेवा’ कर पाएंगी?
यह आरोप एक गांववासी के न्यूज चैनलों पर दिए बयान पर आधारित बताया जा रहा है, लेकिन न तो कोई वीडियो सबूत उपलब्ध है और न ही मैथिली की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया। कुछ समर्थक इसे ‘फेक न्यूज’ बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे उनकी ‘बिहारीपन’ पर सवाल उठाने का मौका मान रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि सेलिब्रिटी कलाकारों की फीस बाजार दर पर निर्भर करती है, लेकिन सांस्कृतिक आयोजनों में छूट देना अपेक्षित होता है। मैथिली की राजनीतिक एंट्री बिहार के सांस्कृतिक चेहरे को मजबूत कर सकती है, लेकिन यह विवाद जनता के बीच बहस छेड़ चुका है। क्या वे अपनी छवि को साफ कर पाएंगी, या यह चुनावी माहौल में विपक्ष का हथियार बनेगा? जनता ही फैसला करेगी।







