Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Tuesday, October 6
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»मीडिया

    पहले राजनीतिक दलों से मांगों फिर अखबारों से मांगना हिसाब! 

    By July 5, 2018 मीडिया No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 609
    • डीएवीपी के खिलाफ कोर्ट जायेगा अखबार बचाओ मंच
    • 6 महीने बाद देशभर के 90%अखबार होंगे बंद
    लखनऊ, 05 जुलाई। अस्तित्व बचाने की आखिरी कोशिश में अखबार बचाओ मंच न्यायालय की शरण में जायेगा। मंच ये तर्क रखेगा कि जब राजनीतिक दल अपने चंदे का हिसाब और टैक्स नहीं देते तो फिर अखबारों पर एक-एक पैसे का हिसाब और नये-नये टैक्स क्यों थोपे जा रहे हैं।
    दरअसल दो-तीन महीने बाद पूरे देश के अखबारों का नवीनीकरण होना है। जिसके लिये डीएवीपी द्वारा एक-एक कागज और पाई-पाई का हिसाब मांग लेने से देश के 95%अखबार नवीनीकरण नहीं करा पायेंगे। अखबार बचाओ मंच का कहना है कि अखबारों से संबधित सरकार की पालिसी के खिलाफ डीएवीपी मनमाने ढंग से अखबारों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। सरकार की विज्ञापन नीति के हिसाब से एक करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले अखबारों को बैलेंस शीट देना अनिवार्य है। जबकि डीएवीपी ने बीस लाख के ऊपर के टर्नओवर वाले अखबारों के लिए बैलेंस शीट अनिवार्य कर दी है।
    क्या है पूरा मामला :
    शायद ही कोइ ऐसा व्यवसाय होगा जिसमे कोई manipulation न होता हो , उसी तरह नियमों और कानूनों को देखते हुए देश के 99% मान्यता प्राप्त अखबारों को भी प्रसार संख्या में manipulation करना पड़ता है। बड़े-बड़े ब्रांड अखबार  भी बीस हजार कापी को दो लाख प्रसार बताने पर मजबूर है। इस झूठ की मंडी की जिम्मेदार सरकार की गलत नीतियां भी हैं। यदि कोई अपने अखबार का वास्तविक दो हजार के अंदर का प्रसार बताता है तो उसे डीएवीपी से विज्ञापन की सरकारी दरें नहीं मिलती। और यदि दो हजार से पंद्रह हजार तक के प्रसार का दावा करता है तो उसे लघु समाचार की श्रेणी में रखा जाता है। लघु श्रेणी की विज्ञापन दर इतनी कम होती हैं कि इन दरों से कम संसाधनों वाला अखबार भी अपना बेसिक खर्च भी नहीं निकाल सकता है। यूपी सहित देश के बहुत सारे राज्यों में कम प्रसार वाले अखबारों के पत्रकारों को राज्य मुख्यालय की मान्यता भी नहीं मिलती। शायद राज्य सरकारों का मानना है कि कम प्रसार वाले अखबारों में राज्य मुख्यालय यानी प्रदेश स्तर की खबरें नहीं छपतीं हैं। सरकारों की इन गलत नीतियों के कारण भी प्रकाशक अपना प्रसार बढ़ा कर प्रस्तुत करता है।
    अब ये झूठ देश के करीब 95% अखबारों को ले डूबेगा। और देश के लाखों अखबार कर्मी और पत्रकार बेरोजगार हो जायेंगे। यानी सरकारी नीतियों और प्रकाशकों के टकराव की इस चक्की में आम अखबार कर्मी/पत्रकार पिस जायेंगे।
    क्योंकि अब बताये गये प्रसार के हिसाब से करोड़ों की राशि के कागज की खरीद और अन्य प्रोडक्शन कास्ट का हिसाब दिये बिना डीएवीपी अखबारों का नवीनीकरण नहीं करेगा।  अखबारी कागज पर जीएसटी होने के कारण अब तीन का तेरह बताना संभव नहीं है।
    यही कारण है कि अखबारी कागज पर से जीएसटी हटाने की मांग को लेकर प्रकाशकों, अखबार कर्मियों और पत्रकारों ने खूब संघर्ष किया। सरकार के नुमाइंदों को दर्जनों बार ज्ञापन दिये। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक धरना-प्रदर्शन किये। वित्त मंत्री से लेकर पीएमओ और जीएसटी कौंसिल से लेकर विपक्षी नेता राहुल गांधी तक फरियाद की। फिर भी हासिल कुछ नहीं हुआ।
    डीएवीपी ने अखबारों की नयी मान्यता के आवेदन पत्र में अखबारों से एक एक पैसे का पक्का हिसाब मांगा है। यानी कागज की जीएसटी से लेकर बैंक स्टेटमेंट मांग कर ये स्पष्ट कर दिया है कि तीन महीने बाद नवीनीकरण के लिए देशभर के सभी अखबारों से ऐसे ही हिसाब मांगा जायेगा। और इस तरह का हिसाब देशभर के 95%अखबार नहीं दे सकेंगे।
    इस संकट से लड़ने के लिए पत्रकार संगठन एक बार फिर सक्रिय हो गये हैं। इन संगठनों का मानना है कि अखबार बंद होने से प्रकाशक तो हंसी-खुशी अखबार बंद करके किसी दूसरे धंधे में आ जायेंगे लेकिन देश के लाखों अखबार कर्मी/पत्रकारों के पास रोजगार का दूसरा विकल्प नहीं होगा।
    इस बार पत्रकार संगठन सरकार से पहले तो ये मांग करेंगे कि अखबारों के कम और वास्तविक प्रसार को सरकारी विज्ञापनों की इतनी दरें मिल जायें कि कम संसाधनों का बेसिक खर्च निकल आये। दूसरी महत्वपूर्ण मांग ये होगी कि कम प्रसार वाले अखबारों के पत्रकारों की राज्य मुख्यालय की
    प्रेस मान्यता बरकरार रहे।
    दस लाख से कम कुल वार्षिक विज्ञापन पाने वालों से डीएवीपी आय-व्यय का हिसाब ना मांगे। कम संसाधनों, कम आमदनी और कम विज्ञापन पाने वाले इन अखबारों को जीएसटी से मुक्त किया जाये।
    अखबारों को इन संकटों से बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहा पत्रकार संगठनों का साझा मंच ‘अखबार बचाओ मंच’ का कहना है कि यदि ये मांगे भी पूरी नहीं हुयीं तो न्यायालय का सहारा लेना पड़ेगा।
    मंच का सबसे मजबूत तर्क होगा कि जब राजनीतिक दल चंदे का हिसाब देने के लिए विवश नहीं हैं तो कम संसाधन और बहुत ही कम सरकारी विज्ञापन पाने वाले देश के अधिकांश अखबार एक-एक पैसे का हिसाब देने के लिए विवश क्यों किए जा रहे हैं।
    कार्पोरेट के अखबार करोड़ों रुपये की लागत लगाकर अखबारों में घाटे सह भी सकते हैं। क्योंकि वो अपने मुख्य व्यापार से अरबों रूपये का मुनाफा कमाते है। इनके मुख्य व्यापारों में सरकारों के सहयोग की जरूरत पड़ती है। सरकारों को समाचार पत्रों में सरकारों के गुड वर्क को ज्यादा उजागर करने और खामियों को छिपाने की गरज रहती है। इन कारणों से देश की जनता कार्पोरेट के ब्रांड अखबारों से विश्वसनीयता खोती जा रहे है। पाठक सच पढ़ना चाहता है। उसका रूझान छोटे-छोटे अखबारों की तरफ बढ़ रहा है। लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कार्पोरेट और पेड न्यूज की बेड़ियों में ना जकड़ जाये इसलिए पाठक चार पन्ने के छोटे अखबार में चार सच्ची खबरें पढ़ना चाहता है। जिस तरह राजनीतिक दलों की नीतियों से प्रभावित होकर लोग गुप्त दान करते हैं ऐसे ही छोटे अखबारों को अभी अब लोग दान स्वरुप टुकड़ों – टुकड़ों में कागज देने लगे हैं। जब राजनीतिक दलों के चंदे का हिसाब नहीं तो छोटे अखबारों का हिसाब क्यों?
    – नवेद शिकोह, 8090180256

    Keep Reading

    UPWJU State Executive Committee Reconstituted: Senior Journalist Ajay Trivedi Appointed New State General Secretary

    यूपीडब्लूजेयू की प्रदेश कार्यसमिति का पुनर्गठन: वरिष्ठ पत्रकार अजय त्रिवेदी बने नए प्रदेश महामंत्री

    District correspondents will not undergo a fresh LIU verification: Information Director

    जिला संवाददाताओं की दोबारा LIU जाँच नहीं होगी: सूचना निदेशक

    Journalism is the lifeblood of democracy: Keshav Prasad Maurya

    पत्रकारिता लोकतंत्र की प्राणवायु है : केशव प्रसाद मौर्य

    Journalism is no longer merely about news; it is a responsibility to guide society in the right direction: Bharat Singh

    पत्रकारिता अब सिर्फ खबर नहीं, समाज को सही दिशा देने का दायित्व है: भारत सिंह

    Srijan Samman on Hindi Journalism Day: Emphasizing the Need for Emotional Intelligence in the AI ​​Era

    हिंदी पत्रकारिता दिवस पर सृजन सम्मान, एआई युग में इमोशनल इंटेलिजेंस की जरूरत पर जोर

    Becoming the Voice of Journalists on Labour Day, Memorandum Submitted to Deputy Chief Minister

    श्रम दिवस पर पत्रकारों की आवाज़ बनी, उपमुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    ‘नये औजार से कबीर की खुदाई’ ने छेड़ा नया विमर्श, पुस्तकों के बीच गूंजीं कविताएं

    ‘नये औजार से कबीर की खुदाई’ ने छेड़ा नया विमर्श, पुस्तकों के बीच गूंजीं कविताएं

    October 5, 2026
    Teachers' 11-point demands resonated at the TFI conference; calls made for the old pension scheme and relief regarding the TET.

    टीएफआई सम्मेलन में शिक्षकों की 11 सूत्रीय मांगें गूंज उठीं, पुरानी पेंशन और टीईटी से राहत की मांग

    October 5, 2026

    अकीदा बनाम अंधविश्वास: पक्के विश्वास और भटकती भीड़ की दास्तान

    October 5, 2026
    Anuj Yadav becomes Lucknow's chess champion; wins the title with 5.5 points after drawing the final game.

    अनुज यादव बने लखनऊ के शतरंज चैंपियन, आखिरी बाजी ड्रॉ कर 5.5 अंक से जीता खिताब

    October 4, 2026

    जब एकादशी का पुण्य जुड़ता है पितरों के कल्याण से: 6 अक्टूबर को इन्दिरा एकादशी

    October 4, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading