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    Home»ब्लॉग

    मजबूत होते सम्बन्ध

    ShagunBy ShagunMay 10, 2022 ब्लॉग No Comments6 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री

    विदेश नीति नेतृत्व के व्यक्तित्व से भी प्रभावित होती है। दो देशों के बीच बेहतर समझदारी से द्विपक्षीय संबन्ध सुदृढ़ होते है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी विदेश नीति में इस तत्व को बखूबी समाहित किया है।

    फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से भी नरेंद्र मोदी की आपसी समझ बेहतर रही है। यह संयोग है कि वह कुछ दिन पहले ही आम चुनाव में विजयी होकर पुनः फ्रांस के राष्ट्रपति बने है। दूसरी पारी की शुरुआत में ही उन्हें अपने मित्र नरेंद्र मोदी से मिलने का अवसर मिला। यह नरेंद्र मोदी की मित्रता का ही असर था जब वह पिछले कार्यकाल में वह काशी और विंध्याचल की यात्रा पर आए थे। यूरोप यात्रा के तीसरे चरण में नरेंद्र मोदी फ्रांस पहुंचे थे।

    भारत और फ्रांस के संबन्ध बहुत मजबूत है। वह भारत के सबसे मजबूत साझेदारों में से एक है। दोनों देश अनेक क्षेत्रों में परस्पर सहयोग कर रहे है। भारत फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी आगे बढ़ रही है। नरेंद्र मोदी और इमैनुअल मैक्रों के बीच उपयोगी हुई हुई। इसमें रक्षा व अंतरिक्ष क्षेत्र में मिलकर काम करने पर सहमति बनी। मोदी और मैक्रों ने राष्ट्रपति आवास पर वार्ता की और फिर प्रतिनिधिमंडल स्तरीय बातचीत भी हुई।

    भारत और फ्रांस के कूटनीतिक संबंधों की पचहत्तरवीं वर्षगांठ पर हुई इस मुलाकात का विशेष महत्व था। द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर वार्ता हुई।भारत व फ्रांस रणनीतिक साझेदारी की बढ़ाने पर सहमत हुए। हिंद प्रशांत व यूक्रेन संकट पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने रक्षा, अंतरिक्ष, असैन्य परमाणु सहयोग और लोगों से लोगों के बीच संबंधों सहित द्विपक्षीय संबंधों के सभी प्रमुख क्षेत्रों पर व्यापक चर्चा की।

    भारत और फ्रांस ने माना कि वो एक-दूसरे को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में प्रमुख साझेदार के रूप में देखते हैं। इस मुलाकात में राफेल डील का मसला एक बार फिर ताजा हो गया। भारत की विपक्षी पार्टियां व चीन पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश इस डील को रुकवाने का पुरजोर प्रयास कर रहे थे। इस डील को लेकर कांग्रेस के नेता चौकीदार चोर के नारे लगवा रहे थे। इसमें फ्रांस को भी लपेटने का प्रयास किया गया था। लेकिन फ्रांस ने बड़ी दृढ़ता से इस मुहिम को नाकाम कर दिया। यह डील पूरी हुई। राफेल विमान भारतीय वायु सेना की शक्ति बढा रहे है। राफेल को औपचारिक रूप से वायु सेना में शामिल करने का आयोजन किया गया था।

    फ्रांस की तत्कालीन रक्षामंत्री इसके लिए भारत आईं थी। यह एक प्रकार से सभी परिस्थित में फ़्रांस के भारत के साथ रहने का सन्देश था। इसी के साथ राफेल व तेजस का संयुक्त एयर शो हुआ था। यह भी औपचारिकता मात्र नहीं थी। इसका भी सामरिक महत्व व सन्देश था। भारत व फ्रांस निर्मित विमान संयुक्त रूप से दुश्मन मुल्क को जवाब देने में सक्षम हैं। दोनों के बीच इतना विश्वास और सहयोग का माहौल पहले कभी नहीं था। इसका विस्तार भी अभूतपूर्व है। पिछले कार्यकाल के दौरान राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रो भारत यात्रा पर आए थे। तब उनकी यात्रा में मिर्जापुर के छानबे ब्लाक से लेकर हिन्द महासागर का इलाका भी शामिल था। फ्रांस बड़ी मात्रा में निवेश पर सहमत हुआ था। जहाँ निवेश किया था, उस जगह जाना भी  विदेशी राष्ट्रपति के लिए सुखद रहा था।

    इमैनुअल मेक्रों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि वह भगवान भोलेनाथ और माँ विंध्यवासिनी की नगरी की यात्रा करेंगे। लेकिन, नरेंद्र मोदी की विदेश नीति में ऐसे तत्व भी शामिल रहते हैं। वह विंध्याचल के पास छानवे ब्लाक गए थे। यहां विंध्याचल धाम की चुनरी से उनका स्वागत किया गया था। यहाँ से वह दुनिया की सबसे प्राचीन नगरी भोले बाबा की काशी पहुंचे थे। गंगा में नौका विहार किया था। काशी में उनकी उपस्थिति में हर हर महादेव का परंपरागत उद्घोष होता रहा।

    चौरासी घाटों पर भारतीय संस्कृति का जीवंत रूप दिखाई दिया। अपने राजनीतिक जीवन में  वह दुनिया के अनेक स्थानों पर गए होंगे, लेकिन वसुधा को कुटुंब समझने वाली ऐसी संस्कृति के दर्शन उनको कहीं नहीं हुए होंगे। बहुत संभव है कि नरेंद्र मोदी भारत की इस दार्शनिक धरोहर से दुनिया को परिचित कराना चाहते थे। भारत और फ्रांस के बीच  रक्षा और परमाणु ऊर्जा सहित अनेक अहम समझौते हुए थे। दोनों देश एकदूसरे के जंगी जहाजों के लिए अपने नौसैनिक अड्डे खोलने के लिये राजी हुए थे। रक्षा और सामरिक जानकारी की उचित गोपनीयता भी कायम रखे जाने पर सहमति बनी थी। जिससे अन्य देश उसका लाभ न उठा सके।

    जाहिर तौर पर यह  सहमति चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के मद्देनजर बनाई गई थी। इससे अनुमान लगाया जा सकता है भारत व फ्रांस एक दूसरे के विश्वसनीय सहयोगी है। दोनों देशों के सामुद्रिक और सामरिक समझौतों से चीन की विस्तारवादी  चाल का मुकाबला करना आसान हुआ है। दोनों देशों के सैनिक एक दूसरे के सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल और साजो सामान का आदान प्रदान भी कर सकेंगे। युद्ध अभ्यास, प्रशिक्षण,आपदा राहत कार्यो में दोनों देश सहयोग करेंगे। इसके अलावा शिक्षा,  पर्यावरण,शहरी विकास, रेलवे, सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग  बढ़ा रहा है।

    आतंकवाद के खिलाफ साझा रणनीति पर अमल किया जा रहा है। फ्रांस पर भी कई बार आतंकी हमले हो चुके हैं। अंतरिक्ष  प्रौद्योगिक क्षेत्र  में आपसी सहयोग तेज किया गया है। इसका प्रयोग समुद्री क्षेत्र में किया जाएगा। परमाणु सहयोग के तहत जैतापुर संयंत्र का कार्य जल्दी पूरा करने का करार हुआ था। यहाँ छह परमाणु संयंत्र लगाए जाएंगे। इसकी क्षमता सोलह सौ पचास मेगावाट होगी। महाराष्ट्र के तट पर बनने वाला यह देश का सबसे बड़ा न्यूक्लियर पार्क होगा। दोनों देशों का व्यापार अगले कुछ वर्षों में पन्द्रह अरब यूरो तक पहुँचने की संभावना है। इसका रोडमैप बना लिया गया  है। दोनों देशों की कम्पनियों ने अलग से पन्द्रह अरब डॉलर के समझौते किये थे।

    मिर्जापुर जिले के छानवे ब्लॉक के दादरा कला में उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े सौर ऊर्जा संयंत्र का लोकार्पण किया गया। फ्रांस के सहयोग से यह प्लांट  बना है। इसकी क्षमता पचहत्तर  मेगावाट है। इसे सौ मेगावाट तक  बढ़ाया जाएगा। तीन सौ बयासी एकड़ में बने इस संयंत्र से पांच लाख यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। दोनों देशों के द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक रिश्तों में बहुत सुधार हुआ। आपसी सहयोग आगे बढ़ा। चीन की  विस्तारवादी  गतिविधियों के विरोध में अब फ्रांस भी भारत के साथ आ गया है।

    फ्रांस ने माना कि वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति बहुत मजबूत हुई है। इसीलिए फ्रांस ने चीन के मुकाबले भारत का  खुलकर साथ देने का निर्णय किया है। हिन्द महासागर में चीन कृत्रिम बन्दरगाह और सैन्य ठिकाने बना रहा है। शांति चाहने वाले देशों के लिए यह चिंता का विषय है। ऐसे में फ्रांस के साथ हुआ समझौता बेहद महत्वपूर्ण है। फ्रांस और भारत मिलकर उपग्रह से भी यहां निगरानी करेंगे। दोनों देशों के सैनिक संयुक्त कार्यवाई भी करेंगे। इसके साथ ही आतंकवाद के मुकाबले का साझा मंसूबा भी महत्वपूर्ण है। अन्य देशों के मुकाबले फ्रांस का इसे लेकर दोहरा मापदंड नहीं है।

    Shagun

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